विटामिन डी की कमी के लक्षण । Vitamin D Deficiency symptoms.

Vitamin d deficiency symptoms in hindi.
Vitamin D deficiency symptoms in hindi. विटामिन एक तरह का कार्बनिक यौगिक है। और सभी जीवों की इसकी कुछ मात्र की आवश्यकता होती है। यह शरीर द्वारा ख़ुद उत्त्पन नहीं होता है, बल्कि पौष्टिक आहार से इसकी पूर्ति होती है। हमारे शरीर को कई तरह के विटामिन की जरुरत होती है। उनमें से ही एक है विटामिन दी, जिसका हमारे शरीर में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है ।

Vitamin D deficiency की पूर्ति भी बहुत आसानी से की जा सकती है। इसके लक्षण पहले पता नहीं चलते हैं, अर्थात व्यक्ति को पता भी नहीं होता है कि वो विटामिन डी की कमी का शिकार हो चुका है। तो क्या हैं इसके लक्षण ? विटामिन डी हमारे शरीर के लिए क्यों है इतना जरुरी ? इसका पाता कैसे चलेगा ? आइए जानते – विटामिन डी की कमी के लक्षण । Vitamin D Deficiency symptoms in hindi.

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विटामिन डी क्या है । what is vitamin D.

विटामिन डी हमारे शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिन है। आज रक्त में कैल्शियम, मैगनिशिम तथा फॉसफोरस को संतुलित करने का कार्य करता है।
Vitamins कई प्रकार के होते है जैसे विटामिन ए, बी, सी, डी, ई आदि । इन सब विटामिन का अलग अलग कार्य है ।

इसी प्रकार विटामिन डी भी हमारे शरीर में उपस्थित एक पोषक तत्व है । जिनकी कमी या अधिकता भी नुकसानदेह साबित हो सकती है । विटामिन डी एवं विटामिन डी2, विटामिन डी3 दो प्रकार की होती है ।

विटामिन डी की कमी के लक्षण । vitamin D deficiency symptoms.

Vitamin d deficiency symptoms का हमें पहले पता नहीं चलता है, बल्कि इसकी कमी के उपरांत हमें जो लक्षण प्रदर्शित होने लगते हैं उसके आधार पर हम जानते हैं कि शरीर में विटामिन डी की कमी ही गई है। जैसे –
हड्डियों में दर्द- रीढ़ की हड्डी, कूल्हे और पैरों की हड्डियों में लगातार हल्का दर्द महसूस होता है।
मांसपेशियों में कमजोरी – मांसपेशियों में ऐंठन होने लगती है।

सूखा रोग (रिकेट्स) – यह रोग ज्यादातर बच्चों में होता है। इसमें हड्डियां कमजोर और नरम हो जाती हैं और टूटने का भय बना रहता है।
व्यक्ति की हाईट – इसमें बच्चे का विकास धीमा हो जाता है।
दाँतो की समस्या – दाँतो की संरचना में परिवर्तन, डांतों में कैविटी तथा दाँतो के विकास संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती है।

थकान और पसीना आना – विटामिन डी की कमी के कारण बहुत जल्दी थकान महसूस होने लगता है और कभी-कभी बहुत ज्यादातर पसीना आने लगता है।
बालों का झड़ना विटामिन डी की कमी के कारण बलों का पतला होना और बलों का झड़ना शुरू हो जाता है।

डिप्रेशन अगर व्यक्ति हर वक़्त डिप्रेशन में रहता है, निराशा और तनाव महसूस करता है, तो यह भी विटामिन डी की कमी का परिणाम ही है।

महिलाओं में विटामिन डी की कमी के लक्षण । vitamin D deficiency symptoms in women.

 

पुरुषों की तरह महिलाओं में भी vitamin d deficiency symptoms कुछ भिन्नता होती है जैसे –
हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द – हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द विटामिन डी की कमी का लक्षण है, जो सभी में कॉमन है, लेकिन महिलाओं में इसकी वज़ह से कमर में दर्द की समस्या ज्यादा होती है।
थकान और कमजोरी – नार्मल अवस्था में भी थोड़ा सा काम करने में थकान व कमजोरी महसूस होना विटामिन दी की कमी का लक्षण है।

तनाव – अक्सर देखा गया है कि जो महिलाएं ज्यादा तनाव में रहती हैं, उनमें विटामिन दी की कमी होती है, और इससे उनकी सेहत पर बुराई प्रभाव पड़ता है।
शरीर में सूजन व घाव भरने में देरी – सूजन जैसी समस्या और शरीर के घाव भरने में देरी या चोट लगने के उपरांत उसे ठीक होने में बहुत समय लगना विटामिन डी की कमी का संकेत है।

बालों का झड़ना – यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों की है। इस स्थिति में बाल पतले व कमजोर हो जाते हैं और झड़ने लगते हैं।

विटामिन डी की कमी के कारण | causes of vitamin D deficiency.

 

विटामिन डी की कमी के हमारे खानपान के अलावा भी अन्य कारण होते है जैसे –
सर्दियों का मौसम – मेडिकल न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार विटामिन दी की पूर्ति भोजन से बहुत कम, बल्कि मात्र सूर्य की रौशनी से पूरी हो जाती है। सर्दियों में सूरज की रौशनी की कमी और लोगों का विटामिन दी वाले खाद्य पदार्थो के सन्दर्भ में अनभिज्ञ होना, विटामिन दी की कमी का एक बड़ा कारण है।

मोटापा – मोटे व्यक्तियों में विटामिन डी की कमी हो सकती है, अर्थात जिनका BMI 30 से ज्यादा होता है, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है।

डार्क स्किन – जिनका स्किन डार्क होता है, उनमें भी विटामिन डी की कमी का खतरा बना होता है। अक्सर ये स्थिति अधिक उम्र वाले व्यक्तियों में होती है क्योंकि उनकी त्वचा सूरज की रौशनी कि सिंथेसिस करने में असमर्थ होती हैं।

खान-पान में लापरवाही – पौष्टिक और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन ना करने से भी इसका खतरा बाढ़ जाता है। विशेषकर सर्दियों के मौसम, क्योंकि उस समय सूरज की रौशनी बहुत कम प्राप्त होती है।

विटामिन डी 2 और विटामिन डी 3 में क्या फ़र्क है ? What between different vitamin d2 and d3.

विटामिन दी दो प्रकार के होते हैं। विटामिन डी 2 और विटामिन डी 3। हमारे शरीर को दोनों की जरुरत होती है। विटामिन डी वसा घुलनशील विटामिन है जो विटामिन डी 2 और विटामिन डी 3 से मिलकट बनता है।

लेकिन इन दोनों का स्रोत अलग-अलग है।
जहाँ विटामिन डी 3 हमें मछली, अंडे की जर्दी, मक्खन और कुछ सप्लीमेंट से प्राप्त होता है, वहीं दूसरी ओर विटामिन डी 2 धूप में उगे हुए पौधे से पूरा होता है। जैसे – मशरूम आदि |

vitamin D3 deficiency symptoms.

विटामिन डी 3 की कमी के लक्षण | vitamin D3 deficiency symptoms.

 

Vitamin D3 भी विटामिन डी का एक प्रकार है जो एक महत्वपूर्ण पोषक तत्त्व है । इनकी कमी भी भारी पड़ती हैं जैसे –
रोग प्रतिरोधकता क्षमता में कमी – शरीर की इम्युनिटी कम हो जाती है। व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है। सर्दी-खांसी, बुखार और लंग्स की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

थकान महसूस होना – बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है। और हर घड़ी नींद की अनुभूति होती है।
मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द – पीठ में, जोड़ों में और मांसपेशियों में लगातार दर्द बना रहता है।

विटामिन डी 3 की कमी से होने वाली बीमारियां कौन-कौन सी हैं ? vitamin D3 deficiency disease in hindi.

 

विटामिन डी की कमी से कई बीमारियां होती है जैसे जोड़ो का दर्द, बीपी आदि । इनकी कमी से होने वाली बीमारियां इस प्रकार है –
Osteoporosis & Fracture – विटामिन डी 3 हड्डियों से कैल्शियम सोख लेता है। इसका असर हड्डियों पर ज्यादा पड़ता है। हड्डियां कमजोर जो जाती हैं, और टूटने का खतरा बना रहा है।

हाई ब्लड प्रेसर और हार्ट अटैक की बीमारी – शोध के मुताबिक विटामिन डी 3 की कमी से हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए ब्लड प्रेशर के नियंत्रण की आवश्यकता होती है।

विटामिन डी 3 की कमी के कारण | vitamin D3 deficiency causes in hindi.

सूर्य का प्रकाश – जब शरीर सूर्य की रौशनी के संपर्क में आता है, तो ही इस विटामिन का निर्माण होता है। जो लोग सूर्य के प्रकाश के कम संपर्क में आते हैं या जहाँ कम धूप निकलती है, वहाँ विटामिन d3 की कमी की संभावना कुछ ज्यादातर होती है।

त्वचा का रंग – त्वचा का काला और सांवला रंग भी इसके बनने की प्रक्रिया में बाधक है। क्योंकि यह शरीर में सूर्य की किरणों को प्रवेश करने से रोकता है।

BMI का ज्यादा होना – ज्यादातर रक्त से वसा की कोशिकायें विटामिन डी 3 को सोख लेती है, यह भी विटामिन डी की कमी का कारण बनता है। अतः मोटापा भी इसकी कमी का एक प्रमुख कारण है।

विटामिन डी की कमी से कौन-कौन सी बीमारियां होती है ? vitamin D deficiency disease in hindi.

रिकेट्स – यह बच्चों में विटामिन डी की कमी से होने वाली गंभीर बीमारी है। इसमें हड्डियां नरम और कमजोर हो जाती है, जिससे हड्डियों के टूटने का खतरा रहता है। रिकेट्स विशेषकर 3 से 18 महीने की उम्र में दिखाई देता है।

● एनीमिया और निमोनिया का होना |
● बचे का वजन नहीं बढ़ता है और विकास धीमा हो जाता है।
ऑष्टीयोमलेशिया – व्यस्कों में विटामिन डी की कमी से होने वली बीमारी को ऑष्टीयोमलेशिया कहा जाता है। इसमें हड्डियां नरम हो जाती है, रीढ़ की हड्डी झुक जाती है, मांसपेशियों में कामजोरी आ जाती है। तथा हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है | ये दोनों रोग हड्डियों में ख़निज की कमी के कारण होता है, अर्थात लंबे समय तक कैल्शियम की कमी इस बीमारी का मुख्य कारण है।

विटामिन डी की कमी से होने वाले नुकसान | vitamin D deficiency risk factors.

1. हड्डियों को नुकसान पहुँचता है।
2. रोग प्रतिरोध क्षमता कम हो जाती है।
3. ह्रदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
4. शुगर और बी. पी. की समस्या बढ़ जाती है।

विटामिन डी की कमी का उपचार । vitamin D deficiency treatment in hindi.

vitamin D deficiency यानी विटामिन डी कमी की पूर्ति करना हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है । जब तक इन इनकी कमी पूरी नहीं होगी हमारा शरीर विभिन्न रोगों से घिरा रहेगा । विटामिन डी कमी को हम घर पर ही कर सकते है |

धूप का सेवन करना – हमारे लिए सूर्य की धूप किसी वरदान से कम नहीं है । इनका नियमित रूप से सेवन करना हमारे शरीर के लिए उपयोगी है । प्रतिदिन सुबह सुबह आधा – एक घण्टा सूर्य की रोशनी में बैठकर धूप का सेवन करना चाहिए ।

कैल्सियम युक्त भोजन सामग्री एवं टेबलेट का सेवन करें ।
◆ विटामिन डी के कैप्सूल, टैबलेट, सिरप या इंजेक्शन लगाकर विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते है ।
◆ विटामिन डी युक्त आहार सेवन करे जैसे दूध, अंडा, मछली, दही आदि ।
◆ नियमित रूप से योग करे ।

विटामिन डी के लिए आहार । vitamin d rich foods vegetarian.

गाय का दूध – इसमें पर्याप्त मात्र में प्रोटीन, कैल्शियम, मैगनिशियम होता है, जो विटामिन डी की कमी को पूरा करता है।
मछली – झींगा मछली, मैकरेल, हिलसा, कैट फिश, टूना मछली
अंडा – अंडे की जर्दी से विटामिन डी के पोशक तत्व विद्यमान होते हैं।

मशरूम – इसमें विटामिन डी की मात्रा तो कम है पर शुद्ध शाकाहारी लोगों के लिए उपयुक्त है। जैसे दूध, दही, मक्खन आदि ।
रिकोटा चीज – यह भेड़ के दूध से तैयार किया जाता है। इसमें कैल्शियम, मैंगनिशियम, आयरन के साथ-साथ विटामिन A, B, E, और विटामिन k की भी पूर्ति हो जाती है।

बीफ का लिवर – इसमें कैल्शियम, मैंगनिशियम, आयरन, फॉसफोरस के अलावा विटामिन A, B, C, E और विटामिन के K सबकुछ विद्यमान होता है।
संतरे का जूस – इसमें कैल्शियम, मैंगनिशियम, आयरन, फॉसफोरस के साथ विटामिन A, B, C और विटामिन E की भी पूर्ति हो जाती है।

विटामिन डी की आयुर्वेदिक दवा । vitamin D ki ayurvedic dawa.

● Nutrela vitamin D natural – यह पतंजलि का प्रोडक्ट है, यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक है। इसमें बायो फार्मेटेंड सोर्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह आपकी हड्डियों, जोड़ो के दर्द को राहत देने के लिए बहुत उपयोगी है ।

Patanjali Vitamin D Capsule – यह भी विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए एक अच्छी आयुर्वेदिक दवा है । इसी प्रकार Patanjali Vitamin D Tablet भी उपलब्ध है । इनका उपयोग भी आप डॉक्टर की सलाह से कर सकते है ।

विटामिन डी कैप्सूल | vitamin D capsule.

1. कार्बामाइड फ़ोर्ट D3 और विटामिन B12
2. Naveda Calcium Supliment (1000mg)
3. Nutribears – बच्चों को किशोरों के लिए
4. विटामिन D3 Cholecaliferol

विटामिन डी की अधिकतता से होने वाले नुकसान | Vitamin D disadvantage.

किडनी फेल की समस्या – शरीर में जब विटामिन डी ज्यादा मात्रा में पहुँचता है, तो रक्त में कैल्शियम का स्तर भी बढ़ जाता है जो अन्य टिश्यूज को नुकसान पहुँचाता है। कई बार यह किडनी के फेलियर का कारण भी बन जाता है।

लंग्स की कार्यप्रणाली में परेशानी – जब ज्यादा विटामिन डी मिलता है, तो कैल्शियम और फॉसफोरस रक्त में कृस्टल बनकर जमा हो जाता है, जिससे फेफड़ों की दक्षता में असर पड़ता है। इससे सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होनी शुरू हो जाती है।

Gastointestinal problems – विटामिन डी की ज्यादा मात्र हमारी आंतों को भी नुकसान पहुँचाती है। इससे पेट दर्द, डायरिया और कब्ज जैसी समस्याएं होने लगती है।

मनुष्य के शरीर में विटामिन डी कितना होना चाहिये ?

हमारे शरीर के लिए विटामिन डी एक अहम पोषक तत्त्व है । जिनका सन्तुलन होना जरूरी है । आमतौर पर 20ng से कम होने पर विटामिन डी की कमी मानी जाती है । और 30ng होने पर स्वस्थ माना जाता है । इनकी कमी घर पर भोजन में बदलाव करके की जा सकती है ।

यदि शरीर में प्रति मिलिलीटर में 20 नैनोग्राम से 50 नैनोग्राम के बीच विटामिन है, तो यह अच्छा संकेत है। लेकिन यदि प्रति मिली. में 12 नैनोग्राम से कम है तो शरीर में विटामिन दी कमी मानी जाएगी।

Vitamin D deficiency supplements का उपयोग

विटामिन डी की कमी से जितनी समस्याएं है, उतनी समस्याएं विटामिन डी की अधिकतता से भी है। खासकर जब हम विटामिन डी की पूर्ति किसी सप्लीमेंट के द्वारा करते हैं। विटामिन दी के संतुलन का सबसे सरल उपाय सूर्य की रौशनी और विटामिन डी युक्त आहार है। यही इसका उत्तम समाधान है, सप्लीमेंटस के कई और साइड इफ़ेक्ट भी होते हैं, जो बाद में कई और गंभीर बीमारियों को जन्म देती है।

हमें प्रति दिन योग और व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए। वासायुक्त आहार, नामक, चीनी, कैफिन आदि का इस्तेमाल सीमित करना चाहिए। और समय-समय पर ब्लड टेस्ट कराकर पता लगाते रहना चाहिए कि हमारे शरीर में विटामिन डी का स्तर कितना है। और उसके अनुरूप खान-पान पर ध्यान देना चाहिए।। रशीद अकेला ।।