कुंडलिनी जागरण के लक्षण व लाभ । Kundalini awakening in hindi.

Kundalini awakening in hindi.

Kundalini awakening in hindi. कुंडलिनी जागरण के लिए ईश्वर में आस्था होना जरूरी है। आध्यात्मिकता में विश्वास ही हमारी साधना ठोस आधार होता है। kundalini Aaweking के लिए नाड़ी चक्र पर एकाग्रचित्त जरूरी है। मानव जीवन 4 पुरुषार्थ से संयोजित है। वेदों के अनुसार धर्म, अर्थ, काम का उपभोग करते हुए मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य है मोक्ष की प्राप्ति। मोक्ष प्राप्ति के लिए सदा कई मार्ग अपनाए गए हैं। सगुण भक्ति निर्गुण भक्ति अनेकों ऋषियों, संतों ने योग, साधना, ध्यान, यज्ञ तपस्या, भक्ति, हठयोग, ज्ञान आदि के द्वारा परमधाम को पाने का प्रयास किया है।

आत्मा परमात्मा का ही अंश है। घट घट में ईश्वर का निवास है। अपने अंदर ही ईश्वर को खोजना और उस में विलीन हो जाना ( kundalini Aweking ) कुंडलिनी जागरण का आधार है। योग साधना से मन को एकाग्र कर अपनी संपूर्ण पूजा को मेरुदंड के अंत में स्थित छोर पर एकत्र कर विभिन्न शिराओं के जाल को जागृत करना कुंडलिनी शक्ति जागरण कहा जाता है। कुंडलिनी के एक बार जागृत होने पर शरीर में एक विशेष प्रकार का स्फुरण व ऊर्जा का संचार होता है। वह ऊर्जा सीधे मस्तिष्क में प्रवेश करती है इससे साधक का तेज ओज प्रदीप्त होता है।

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कुंडलिनी शक्ति क्या है ? What is Kundalini awakening in hindi.

मेरुदण्ड के अंतिम छोर पर जहां बहुत सारी शिराओं का जाल है वहीं निचले भाग में इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना नाड़ियाँ होती हैं जो सामान्यतः सुसुप्त अवस्था में रहती हैं। सहस्त्रआर से अर्थ शिव परमात्मा से माना जाता है । एक विशेष प्रकार की दिव्य ज्योति आलोकित होती है। कुंडलिनी शक्ति का अर्थ एक ऐसी दिव्य शक्ति के रूप में लिया जाता है तो कुंडल के रूप में शरीर में स्थित है जो मेरुदंड के अंतिम छोर में स्थित नाड़ी जो साढ़े तीन लपेटे लगाकर नागिन की तरह कुंडली मारकर बैठी रहती है यही कुंडलिनी कहलाती है।

कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के सही उपाय है कुछ मनुष्य के भीतर यह शक्ति आध्यात्मिक साधना करने के उपरांत जागृत हो जाती है तथा कुछ योग आदि क्रियाओं के पूर्ण होने पर जागृत हो जाती सभी में शक्ति अलग-अलग वजह से जागृत हो सकती हैं इसके जागरण के अलग – अलग नियम है। कुंडलिनी का जागरण आत्मा के विकास में एक प्रमुख घटना है। कुंडलिनी जागृत करने की विभिन्न विधियाँ हैं। अधिकांश तौर पर आध्यात्मिक अभ्यास या योग अभ्यास कुंडलिनी शक्ति के जागरण ( Kundalini power Activation ) में काफी सफल होते हैं।

कुंडलिनी जागरण होने पर क्या होता हैं ?

कुंडलिनी शक्ति एक दिव्य शक्ति है जो सप्त चक्रो को भेदकर ऊपर की ओर उठती हैं । जैसे जैसे कोई साधक साधना करता है । तो कुंडलिनी शक्ति जाग्रत होने लगती है । इस दौरान उसके मूलाधार चक्र में स्पंदन होने जैसा अनुभव होना प्रारंभ हो जाता हैं । फिर कुंडलिनी जैसे जैसे ऊपर उठती है । तो एक एक चक्र में रुकती हुई आगे का क्रम जारी रखती हैं । मगर जिस चक्र में रुकती है तो उस चक्र का शुद्धिकरण कर देती हैं ।

इस प्रकार नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करते हुए कुंडलिनी जागरण होता हैं । इस दौरान साधक को इष्टदेव के दर्शन होने के साथ साथ ॐ या हूं हूं की दिव्य वाणी सुनाई देती हैं ।

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कुंडलिनी शक्ति जागृत होने पर आंखों की दृष्टि प्रभावित होती हैं । साधक को काला, पिला और नीला दिखाई देता है । जब कुंडलिनी शक्ति अंतिम चक्र ( सस्त्रधार चक्र ) तक पहुँचती हैं तो साधक को सिर में ( चोटी वाले स्थान पर ) चीटियों के चलने जैसा आभास होता है ।

साधक की रीढ़ की हड्डी में कंपकपी सी होती हैं । जबकि उनका शरीर हल्का हल्का सा गेंद की तरह उछल कूद करने लगता हैं । साधक मानसिक व शारिरिक कष्टो से मुक्त होने लगता है ।

कुंडलिनी शक्ति के चमत्कार –

कुंडलिनी शक्ति एक महामाया शक्ति है । यह शक्ति जब जागृत होती हैं तो शरीर के सातों चक्रो का भेदन करते हुए ऊपर उठती हैं । यानी मूलाधार चक्र से लेकर सहस्रार तक की समस्त नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करते हुए साधक को असीम शक्ति का आभास कराती हैं ।
स्वर विज्ञान के अनुसार इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों को शुद्ध करने के साथ शरीर की 72 हजार नाड़ियों का शुद्धिकरण कुंडलिनी जागरण के दौरान होता हैं ।

सुषुम्ना नाड़ी शरीर के मूलाधार से शुरू होकर यह मस्तिष्क के सर्वोच्च पर स्थित सहस्रार चक्र तक जाती है। यानी सुषुम्ना नाड़ी सबसे बड़ी नाड़ी हैं जिसमे सभी चक्र विद्यमान होते हैं। इसलिए इड़ा को गंगा, पिंगला को यमुना और सुषुम्ना नाड़ी को सरस्वती कहा गया है। इन तीनो का पहला मिलन केंद्र को मूलाधार चक्र कहा जाता है। यही कारण है कि मूलाधार चक्र को मुक्तत्रिवेणी एवं आज्ञाचक्र को युक्त त्रिवेणी कहा जाता हैं।

मेरुरज्जु में प्राणों के प्रवाह के लिए एक सूक्ष्म नाड़ी स्थित है जिसे सुषुम्ना कहा जाता है। जब कुंडलिनी शक्ति जब इन चक्रों का भेदन करती हुई आगे बढ़ती है तो उस में शक्ति का संचार होता है । साथ साथ कई गुप्त शक्तियां प्रकट हो जाती हैं ।

कुंडलिनी जागरण से प्राप्त अलौकिक शक्तियां । Kundalini jagaran se shaktiyan.

कुंडलिनी शक्ति जागरण के दौरान 7 चक्रो जागृत होने पर साधक को असीम शक्तियों की प्राप्ति होती हैं । साधक को नव सिद्धि प्राप्त हो जाती हैं । साधक अपनी दिव्य दृष्टि से इस समस्त सृष्टि को देख सकता हैं । इस शक्ति के जागरण से साधक भूतकाल, भविष्य काल को आसानी से देख सकता है । अपने शरीर को छोड़कर बाहर आ जा सकता है । ईश्वर के विषय से रु ब रु हो सकता है । साधक इस शक्ति के माध्यम से मानव कल्याण की आसानी से कर सकता है ।

कुंडलिनी शक्ति कैसे जागृत करें । How to Kundalini awakening in hindi.

मानव शरीर के अंदर सात चक्र होते हैं इन सातों चक्रों की उर्जा को कुंडली चक्र भी कहा जाता है । यह चक्र मूलाधार चक्र, स्वादिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धि चक्र, आज्ञाचक्र एवं सहस्त्रार चक्र के नाम से जाने जाते है । कुंडलिनी शक्ति मूलाधार चक्र के निचे सर्प की भांति कुंडली मारे सुप्त अवस्था मे विराजमान होती है । इन चक्रो में ऊर्जा का भंडार होता है । इनमें से तीन चक्र जागृत हो जाए तो वह मानव शरीर सबसे स्वस्थ के रूप में देखा जाता है यही सातों चक्र को जागृत करने के बाद इसे कुंडलिनी शक्ति कहा जाता है।

हठयोग के अनुसार हमारे शरीर में सात चक्र 72000 नाडियां और 10 प्रकार की वायु या प्राण होते हैं हमारे शरीर में मेरुदंड से गुजरने वाली सुषुम्ना नाड़ी में सात चक्र या ताले होते हैं । यह शक्ति जागृत कर मनुष्य अन्य मनुष्यों से अलग कर देती है तथा ईश्वर से एक करीबी रिश्ता बनने लग जाता है । ऐसे मनुष्य जन्म – मृत्यु, सुख – दुख की दृष्टि से ऊपर उठकर सोचने लग जाते हैं।

ब्रह्मचर्य एवं कुंडलिनी जागरण |

मन बुद्धि विचार आदि में ये बहुत आगे होते है तथा अन्य की तुलना में बेहतर होते हैं। कुंडलिनी शक्ति जागरण के बाद मनुष्य की असीम ऊर्जा विराजमान हो जाती है। सोई हुई कुंडलिनी को जागृत कर सात चक्रों को भेदते हुए सहस्त्रार चक्र में स्थित होना कुंडलिनी जागरण है इसका अर्थ जीवात्मा का परमात्मा से मिलन होना है। यहां योगी परम गति को प्राप्त करता है जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होता है।

कुंडलिनी जागरण के पहले एवं ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है । यहां ब्रह्मचर्य का मतलब सन्यासी बनना नहीं है । आप घर पर रहकर भी ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर सकते हैं ।

योग ( Meditation ) द्वारा कुंडलिनी शक्ति को कैसे जागृत करे ।

योग आदि की लगातार गहन साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत हो सकती है। इसके लिए योग्य गुरु के सानिध्य में योग क्रिया को करना होता है जैसे प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, ध्यान मुद्रा, पद्मासन आदि द्वारा कुंडलिनी शक्ति ( Kundalini shakti ) को जागृत कर सकते हैं।

पढ़े – 7 चक्र को कैसे जागृत करें । Chakra meditation in hindi.

इसके अलावा विभिन्न प्रकार की मुद्राओ द्वारा भी कुंडलिनी शक्ति को जागृत कर सकते हैं। मुद्राओं का प्रभाव शरीर की भीतरी ग्रन्थियों पर पड़ता है। इन मुद्राओं द्वारा शरीर के अवयवों तथा उनकी क्रियाओं को प्रभावित एवं नियन्त्रित किया जा सकता है। इन चमत्कारिक मुद्राओं की अलग-अलग क्रिया विधि है जो सही तरीके से करनी चाहिए । उनमें से कुछ महत्वपूर्ण मुद्राओं की क्रिया विधि और उनके फायदे इस प्रकार से है।

कैसे करें कुंडलिनी aweking योग । Yoga for Kundalini awakening in hindi.

यदि साधक की आस्था मजबूत है और परमात्मा के प्रति जिज्ञासा तथा आसन प्राणायाम योग आदि को लंबे समय तक एकाग्र चित्त होकर नियमित रूप से करें तो Kundalini Aweking कुंडलिनी जागृत हो जाती है । अपनी सच्ची साधना और विश्वास भाव से गुरु के सानिध्य में भी कुंडलिनी जागृत हो जाती है। लययोग के अनुसार संगीत के द्वारा भी kundalini aweking कुंडलिनी जागृत किया जा सकता है।

स्वामी शिवानंद के अनुसार चार प्रकार के योग होते हैं
1. हठ योग ( पढ़े – हठ योग की परिभाषा । Benefits of hatha yoga in hindi. )
2. राजयोग
3. मंत्र योग
4. लय योग इसके साथ साथ भक्ति व ज्ञान योग भी प्रमुख है।

खेचरी मुद्रा से कुंडलिनी जागरण कैसे करें ?

आजकल बहुत कम लोग इसे जानते होंगे ये एक ऐसी मुद्रा है जिसे करने के उपरांत उड़ने की शक्ति प्राप्त हो जाती है पवन पुत्र हनुमान जी इस मुद्रा द्वारा आकाश में उड़ पाते थे। जीभ को उलट कर और तालू के गड़्ढे में जीभ के अगले भाग को लगा देने को खेचरी मुद्रा कहते हैं। तालू के अन्त भाग में एक पोला स्थान है जिसमें आगे चलकर एक छोटा सा माँस लटकता है, उसे कपिल कुहर कहते हैं।

इसी मास के टुकड़े को जीभ के सबसे अगले हिस्से को बार बार सटाने की कोशिश करे और यह कोशिश नित प्रतिदिन करने से कुछ महीने में धीरे धीरे जीभ लम्बी होकर कुहर से सट जाती है । जब जीभ के सटने लगती है, कपाल में प्राण – शक्ति का संचार होने लगता है और ऊर्जा के इसी संचार से एक बड़ा ही दिव्य आनन्द आता है और शरीर में दिव्य शक्तियां जागृत होने लगती है।

महामुद्रा से कुंडलिनी शक्ति जागृत कैसे करें ।

इस मुद्रा को करने वाले हमेशा जवान व सुन्दर और स्वस्थ बना रहते है। इसे करने में, बाएँ पैर की एडी़ को सीवन भाग में लगावें और दाहिना पैर लम्बा कर लें।

लम्बे किये हुए पैर के अँगूठे को दोनों हाथों से पकड़े। सिर को घुटने से लगाने का प्रयत्न करते हुए अपनी नाक के बायीं तरफ से लम्बी साँस खींचकर कुछ देर कुम्भक करके फिर नाक के दायीं तरफ से रेचक प्राणायाम कीजिए । शुरुआती में 5 प्राणायाम बाईं मुद्रा से करने चाहिये । फिर दाएँ पैर से भी उतनी ही देर यह मुद्रा करें जितनी देर बाएं से की थी। इससे काम, क्रोध, लोभ, अहंकार आदि का नाश होता है तथा रोगों से मुक्ति मिलती है।

शाम्भवी मुद्रा से कुंडलिनी शक्ति जागृत कैसे करें ?

इस मुद्रा के अनुसार सुखासन या पद्मासन में बैठकर अपनी आंखे बंद करके दोनों भौहों के बीच ( जहां तिलक या बिंदी लगाते ) ध्यान लगाने की विधि को शाम्भवी मुद्रा कहते हैं। भगवान शिव के द्वारा साधित होने के कारण इस मुद्रा का नाम शाम्भवी मुद्रा पड़ा है।

यह मुद्रा तीसरे नेत्र को भी जगाता है जिससे दिव्य लोकों का दर्शन होता है, आनन्द का अनुभव होता है तथा शरीर के सारे रोगों का नाश होता है और कुण्डलिनी जागरण में सफलता जरूर मिलती है।

अगोचरी मुद्रा से कुंडलिनी जागरण कैसे करें ?

इस Poss में ध्यान की मुद्रा में बैठकर नाक से 4 अंगुली आगे के शून्य स्थान पर दोनों आंखों की दृष्टि को एक बिन्दु पर केन्द्रित करके ध्यान लगाना ही अगोचरी मुद्रा कहलाता है। ये मुद्रा पाप का नाश करती है और ईश्वर से आध्यात्मिक रिलेशन बनाती है। इसके अतिरिक्त नभो मुद्रा, महा-बंध शक्तिचालिनी मुद्रा, ताडगी, माण्डवी आदि बहुत तरह की मुद्राओं के बारे में “घेरण्ड सहिता” में बताया गया है।

पढ़े – कुंडलिनी शक्ति का पूरा सच । Kundalini shakti in hindi.

मंत्रो ( Mantro ) द्वारा कुंडलिनी शक्ति को जागृत कैसे करें ?

कुंडलिनी जागृत करने के लिए मंत्र साधना पहली विधि है। मंत्र एक पवित्र शब्द, या शब्दों का समूह होता है जो मनुष्य में आध्यात्म को बढ़ाता है। इन मंत्रों की खोज ऋषियों मुनियों द्वारा की गई थी और इन्हें गुरु शिष्य परंपरा के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी प्रदान किया जाता रहा है।

मंत्र जाप के अभ्यास से कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत किया जा सकता है, जो कि एक निश्चित या अनिशिचत संख्या में प्रतिदिन मंत्र के जाप द्वारा पूर्ण होती है। यह किसी योग्य गुरु के सानिध्य में किया गया अभ्यास है जिसे मनुष्य एक समय के पश्चात खुद भी कर सकता है। कुंडलिनी शक्ति को मंत्रों से जागरण करना आसान है । यह एक लंबे समय और मंत्र के बहुत सारे जाप के उपरांत ही सम्भव है। मंत्रो के द्वारा कुंडलिनी जागरण एक आसान और सुरक्षित विधि भी है।

रेकी विधि ( Reki vidhi ) द्वारा औरा क्लीनिंग और कुंडलिनी जागरण कैसे करें ?

रेकी विधि द्वारा ध्यान मुद्रा में स्थित होकर अपने औरा को क्लीन करके शक्ति के संचार को जागृत करना तथा कुछ वैज्ञानिक क्रिया को ध्यान से करना और उसे लगातार दोहराते हुए एक विशिष्ट अनुशासन के साथ तथा गुरु के सानिध्य में सभी क्रियाओं को पूर्ण करना। इन सभी क्रियाओं को पूर्ण करने के उपरांत शरीर मे एक विशिष्ट ऊर्जा का संचार होता है जो कुँडलिनी शक्ति ( Kundalini shakti ) जागृत होने के लक्षण हैं।

पढ़े – मूलाधार चक्र जागृत कैसे करें । Muladhar chakra meditation in hindi.

कुंडलिनी जागरण के लक्षण । symptoms of Kundalini awakening in hindi.

आत्मा परमात्मा का ही एक अंश है घट घट में परमात्मा का निवास है। और कुंडलिनी द्वारा मनुष्य अपने ही शरीर में स्थित उस परम तत्व से एकाकार करता है, जिससे साधारण मनुष्य की आत्मा अनजान जाती है। जिसकी kundalini Aweking ( कुंडलिनी जागृत ) हो जाती है । उसके मुख पर एक दिव्य आभा अलौकिक चमक दिखाई पड़ती है ।

वह शांत चित्त व मनमोहक मुस्कान के साथ सदैव अविचल भाव से युक्त हो जाता है। वह दिव्य अनुभूति के साथ अलौकिक कार्यों में संलग्न होता है क्योंकि कुंडली में जागृति से उतपन्न ऊर्जा को मस्तिष्क भी संभाल कर नहीं रख सकता वह दिव्य योगी कई ब्रह्मांडों की खोज कर सकता है। किसी भी व्यक्ति के विचारों में पढ़ने की क्षमता उसमें आ जाती है।

कुंडलिनी जागरण योग के समय होने वाली अनुभूति | First experience of Kundalini awakening in hindi.

शरीर के परमात्मा द्वार, ज्योतिपुंज, सहस्रार चक्र तक पहुंचने से पहले छह ताले अर्थात नाडी चक्र खोलने होते हैं। जब कुंडलिनी का मूलाधार चक्र जागृत होता है तो ऐसा लगता है जैसे कुछ स्फुरण हो रहा है, कुछ स्पंदित होता हुआ था । गुदगुदाता हुआ सा अनुभव जिससे लगता है । कुंडलिनी ऊपर उठ रही है शरीर और मन ऊर्जावान होने लगते हैं । शरीर हल्का होकर आकाश की ओर उन्मुख होता हुआ प्रतीत होता है । गहन और शून्य अंधकार के बाद प्रीत प्रकाश की अनुभूति होती है ।

वह प्रीत प्रकाश धीरे-धीरे नीले आलोक में बदलकर चमकीली ज्योति से साक्षात्कार करवाता है । शरीर गेंद की तरह उछलता कुलांचे भरता प्रतीत होता है। रीढ़ की हड्डी 90 डिग्री की अवस्था में कंपन करती हुई गर्दन को और भी लंबी और ऊंची करती हुई प्रतीत होती है । ऐसा लगता है जैसे शरीर का आकार विशाल काय हो गया है । और मस्तक आकाश को स्पर्श कर रहा है सहस्रार चक्र में चींटियों के चलने जैसी हलचल होने लगती है।

ध्यान मुद्रा में इष्ट देव का दिखना –

कुंडलिनी शक्ति जागृत होने के बाद ध्यान मुद्रा में इष्ट देव का के दर्शन होने लग जाते हैं जैसे ही हम ध्यान लगाते हैं वैसे हमारे गुरुदेव या ईष्ट देव के दर्शन होने लग जाते हैं ऐसा प्रतीत होता है कि हम उनके समीप है और ध्यान मुद्रा में हं हं या गर्जना जैसे स्वर अनायास ही निकल पड़ते हैं।

symptoms of Kundalini awakening in hindi.

एक से अधिक शरीर का अनुभव होना –

कुंडलिनी शक्ति जागृत होने के पश्चात एक से अधिक शरीर का अनुभव होने लग जाता है तथा ऐसा लगता है कि एक ही शरीर मे दो लोग मौजूद हैं इसमे मनुष्य बहुत घबरा जाता है और ध्यान आदि करना छोड़ देता है लेकिन यह घबराने का विषय नही बल्कि इसे समझने की आवश्यकता है। मनुष्य के शरीर में तीन प्रकार के शरीर मौजूद हैं स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर । स्थूल शरीर जिसे सभी देख सकते हैंलेकिन सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर का अनुभव सिर्फ कुंडलिनी जागरण के उपरांत ही अनुभव किया जा सकता है।

दिव्य ज्योति के दर्शन होना | Kundalini awakening in hindi.

जब कुंडलिनी शक्ति का जागरण होता है तो हमें अपने ध्यान मुद्रा में एक दिव्य ज्योति पुंज के दर्शन होने लग जाते हैं । साधक को अलौकिक अनुभूति का अनुभव होता है ध्यान लगाते वक्त दोनों गांव के बीच एक ज्योति दिखने लग जाती है शरीर में हल्केपन का अनुभव होने लग जाता है।

पढ़े – अनुलोम विलोम के फायदे नुकसान । Anulom vilom ke fayde nuksan.

कुंडलिनी जागरण से शक्तिपात होना –

कुंडलिनी शक्ति जागरण के बाद जब ध्यान की मुद्रा में मनुष्य बैठता है तो उसे ऐसा प्रतीत होने लग जाता है कि जैसे उसके शरीर मे आकाश से कोई शक्ति उसके शरीर में समा रही है तथा शक्ति या उर्जा का भंडार उसके शरीर के अंदर समा रहा है या प्रवेश कर रहा है और उसका शरीर बहुत ही हल्का हो जाता है ऊर्जा के भंडार को मनुष्य अंतर्मन से महसूस कर सकता है ।

कुंडलिनी शक्ति के जागरण के बाद ऐसा प्रतीत होने लग जाता है जिसमें आत्मा और शरीर का भेदभाव खत्म हो जाता है। रेकी विधि में जब भी ध्यान की मुद्रा में कुंडली जागरण के बाद बिठाया जाता है तो आप अपने आभा को अपने दोनों हाथों से महसूस कर सकते हैं तथा दोनों हाथों को आकाश की ओर रखकर यह महसूस किया जा सकता है कि प्राकृतिक शक्ति हमारे अंदर समा रही है।

ईश्वर के ज्योति पुंज के दर्शन होना –

कुंडलिनी जागरण के उपरांत ध्यान मुद्रा में बैठने के बाद ईश्वर के ज्योतिपुंज के दर्शन होने लग जाते हैं। ऐसा लगता है ईश्वर साक्षात हमारे सामने उपस्थित है और हम उनसे बातें कर सकते हैं उन्हें महसूस कर सकते हैं और उन्हें देख सकते हैं।

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बाएं पैर में कुंडलिनी जागरण के लक्षण क्या हैं ?

मानव ऊर्जा क्षेत्र में 280 से अधिक चक्र बिंदु हैं। जब उत्तेजित ऊर्जा इन चक्रों की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती हैं तो सबसे पहले 3 निचले प्रमुख चक्रों पर अपना असर डाल सकती है । जैसे पैरो के तलवे, पिंडलियों, टखनों, कूल्हों, जांघों, घुटनों, बछड़ों में क्रम चक्र बिंदुओं को प्रभावित करती है।

जब भय और चिंता का नाश होता है तो पैर के चक्रों के माध्यम से उसी तरह से नकारात्मक ऊर्जा भी प्रवाहित की जाती है जैसे नल से पानी निकलता है। साथ ही शरीर के बाएं हिस्से के बजाय बायां पैर जो दिव्य स्त्री पहलू का प्रतिनिधित्व करता है । जहां से नकारात्मक प्रभाव को नष्ट करने का कार्य शुरु होता हैं ।

यदि कुण्डलिनी पूरे जोर से पिट्यूटरी ग्रंथियों को उत्तेजित करती है तो तंत्रिका तंत्र गर्दन के पीछे वाले हिस्से को पार कर जाता है । जहां हमारे मस्तिष्क का दाहिना भाग शरीर के बाएं हिस्से को नियंत्रित करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो शरीर का दाहिना भाग पुरुष जो ऊर्जा और सूर्य की उच्च आत्मा बुद्धि को प्रभावित करता है । जबकि बाईं ओर चंद्रमा और स्त्री से जुड़ा हुआ है। यदि उच्च बुद्धि को दाहिनी ओर प्रभावित किया जाता है तो बाईं ओर अधिक तीव्रता से प्रभावित होगा । यही कारण है साधक को बायां पैर में दर्द और सुई जैसा चुम्भन होना स्वाभाविक है ।

कुंडलिनी शक्ति जागरण के नुकसान । side effects of Kundalini awakening in hindi.

हठयोग से कुंडली जागृत करने की बात आने पर लाभ की अपेक्षा हानि पर विशेष ध्यान जाता है कहीं कुंडलिनी जागरण से कोई भूचाल तो नहीं आ जाएगा कहीं हमारा मन विक्षिप्त तो नहीं हो जाएगा ।
वही जब ये जागृत होती हैं तो कई तरह की आवाज़ें सुनाई पड़ती हैं । कई प्रकार के शारीरिक दर्द होते है । यहां तक कि साधक की दृष्टि भी प्रभावित होती हैं ।

एक कुंड में फंसी सुषुम्ना ऊर्जा को जागृत करना ही kundalini Aweking कुंडलिनी जागरण है सामान्यतः सनातन हठयोग में कहीं भी इसके किसी विशेष खतरे की कोई संभावना नहीं मिलती है हमने भयानक मन से शब्दों द्वारा रची गई एक कल्पना है जिसे कुंडलिनी के नुकसान के रूप में रचा गया ।

कुंडलिनी जागरण कितना दर्दनाक है ? Is painful Kundalini awakening in hindi.

कुंडलिनी शक्ति जागरण के दौरान शरीर की विभिन्न प्रकार समस्याएं हो सकती हैं। यहां तक ​​की इससे दर्द की भी अनुभूति हो सकती है। कुंडलिनी जागरण के प्रमुख दुष्प्रभावों से बचने के लिए व्यक्ति को उचित साधना से गुजरना चाहिए। योग्य गुरु के सानिध्य में सख्त शारीरिक सफाई अभ्यास, सख्त आहार आवश्यकताओं, अधिक श्वास अभ्यास, ध्यान, और सख्त अहंकारी प्रवृत्तियों से मुक्ति भी शामिल है।

जैसा कि हम जानते है कि जब विशेष ऊर्जा प्रवाह के अनुकूल होने के लिए हमारे शरीर की ऊर्जा, भौतिक शरीर और हमारे मन के रूप में एक क्रमिक और लंबी प्रक्रिया होना स्वभाविक है। इसे समझने के लिए आपको धैर्य, आत्म सयंम रखना होगा। कुण्डलिनी शक्ति जागरण के इस अभ्यास के माध्यम से, उन सभी पुराने मनोवैज्ञानिक और नकारात्मकताओं को दूर करने की आवश्यकता है जिनका कभी अपने जीवन में सामना किया था।

कुंडलिनी जागरण के दौरान शरीर में दर्द क्यो होता हैं ?

जब कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है तो शरीर में दर्द भी होता है जिसके लिए डॉक्टरों को कोई कारण नहीं मिलता है । शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है, या अजीब रुकावटें होती हैं जहां कुंडलिनी शक्ति रुकी हुई लगती है । तो उस चक्र की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती हैं । मतलब कि उस अंग में दर्द होता है ।

आमतौर पर कुंडलिनी शक्ति जागरण की साधना के दौरान गर्दन में अत्यधिक दर्द महसूस हो सकता है। कंठ चक्र जो विशुद्धि का क्षेत्र है। दर्द क्यों पैदा होता है इसके कई कारण हो सकते है । जैसे इस चक्र में ऊर्जा अक्सर अवरुद्ध हो जाती है क्योंकि हममें से अधिकांश लोग अपनी भावनाओं को रोक कर रखते हैं और खुद को अभिव्यक्त करने से बचते हैं। ये सभी अव्यक्त भावनाएँ एक सूक्ष्म ऊर्जा क्षेत्र में बंद हैं। यह सूक्ष्म ऊर्जा क्षेत्र दर्द का कारण बन सकता है।

दर्द होने का एक अन्य कारण एक पुरानी चोट हो सकती है जिसे आपके शरीर के सिस्टम में बंद कर दिया हो । साधको के अनुसार कुंडलिनी शरीर में किसी भी अंग या क्षतिग्रस्त चीज को हटाने की कोशिश कर रही है। आपकी ऊर्जा इन बिंदुओं पर अटक जाती है, और सभी रुकावटों से मुक्त होने की लालसा से दर्द होता है।

अंतिम निष्कर्ष | Kundalini awakening in hindi.

मानव शरीर मे कुदरत द्वारा प्रदत्त चमत्कारिक शक्तियों का भंडार पाया जाता है । मगर आम इंसान न ही देख सकता है और न ही महसूस कर सकता है क्योंकि ये शक्तियां सोई हुई होती है । इसे जाग्रत करना पड़ता है । कुंडलिनी शक्ति भी इनसे से एक है । Kundalini shakti एक ऐसी शक्ति है । एक ऐसा Power है जिसे इंसान महामानव बन जाता है ।

वह प्रकृति की हर शक्ति से वाफिक हो जाता है । देव समान दिव्य दृष्टि कारक बन जाता है । भगवान शिव से लेकर अब तक न जाने कितने ही महामानवों ने कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करके इस भूमि पर अपना चमत्कार दिखाया जैसे श्री राम, श्री कृष्ण, वेदव्यास, चैतन्य महाप्रभु, मीरा बाई, स्वामी विवेकानंद, गौतम बुद्ध, महावीर एवं स्वामी निखिलेश्वरानंद जी सहित अनेको महामानवों ने योग साधना द्वारा kundalini shakti को जाग्रत किया ।

FAQ

Q1. अपनी कुण्डलिनी शक्ति को कैसे जागृत किया जाये ?

जबाब – हठ योग के अनुसार साधक निरन्तर कुंभक का अभ्यास के दौरान सांस को धीरे धीरे छोड़े । क्योंकि इस प्रक्रिया से कुंडलिनी पर सीधा प्रभाव पड़ेगा और Kundalini aaweking हो जाएगी ।

Q2. कुंडलिनी जागरण का मार्ग क्या है ?

जबाब – कुंडलिनी शक्ति शरीर के सभी चक्रो का भेदन करके यहां तक पहुँचती है । जब मूलाधार चक्र से सहस्रार चक्र तक जिसव चेतना, शिव का प्रमुख स्थान माना गया । जहां पर पूर्ण जागरण एवं परमात्मा मिलन कहते है । कुंडलिनी शक्ति  जागरण ( Kundalini Aaweking ) का मुख्य मार्ग योग साधना है ।

Q3. चक्र को कैसे जागृत करें ?

जबाब – जब साधक नियमित रूप से इन्द्रिय संयम एवं ध्यान लगाने से धीरे धीरे चक्र जागृत होने लगता है । विशेष रूप से जब रात्रि काल में सोने से पूर्व अभ्यास करने से जल्दी सफलता मिलती है ।

Q4. कुण्डलिनी जागरण क्या है ? Kundalini awakening in hindi.

जबाब – Kundalini shakti एक ऐसी दिव्य शक्ति है जो मूलाधार चक्र के निचे साढ़े तीन फेरे लगाकर सोई हुई अवस्था में होती है । जिसे जागृत करने के लिए साधक को योग साधना करनी पड़ती है ।

Q5. कुंडलिनी जागती है तब क्या होता है ?

जबाब – कुंडलिनी शक्ति जागृत होने पर साधक को दिव्य दृष्टि / शक्ति का स्वामी बन जाता है । कुंडलिनी शक्ति से समस्त कष्टों से मुक्ति मिल जाती है । परम आनन्द की प्राप्ति करने के साथ साथ आत्मा – परमात्मा का मिलन होता है ।

Q6. कुण्डलिनी जागरण में कितना समय लगता है ?

जबाब – कुंडलिनी शक्ति जागरण के लिए साधक को नियमित रूप से, दृढ़ संकल्प अभ्यास करने की आवश्यकता होती है । जैसे जैसे एक के बाद एक चक्र को भेद कर आगे बढ़ती है वैसे वैसे साधक को आभास हो जाता है । लेकिन इनकी अवधि साधक एवं उनकी साधना पर निर्भर करती है । जितना एकांग्रता से ध्यान करेंगे उतनी जल्दी जागृत होगी ।

Q7. कुंडलिनी योग कैसे करते है ?

जबाब – कुंडलिनी योग करने के लिए सबसे पहले एकांत स्थान में बैठे एवं अपनी सांसो को नीचे से ऊपर की ओर ले जाए । इस योग का मुख्य आधार सांसो ध्यान केंद्रित करना है । अपनी सांसो को रीढ़ की हड्डी से ऊपर की ओर ले जाने का गुरु के सानिध्य में निरंतर प्रयास करें ।

Q8. कुंडलिनी की कितनी अवस्थाएं हैं ?

जबाब – कुंडलिनी की प्रमुख छः अवस्था होती है । जो इन 6 चक्रो के नाम से जाना जाता है । प्रत्येक चक्र ऊर्जा का प्रमुख आधार स्तम्भ कहलाता है । जो मेरुदंड से ऊपर उठता हुआ सर के मध्य तक जाता है । और कायिक क्षेत्र सातवाँ भाग होता है । ये छह चक्र चेतना के आधार पर प्रत्येक अवस्था से जुड़े हुए होते हैं ।