बिना दवाई डिप्रेशन का इलाज । अवसाद के 5 सबसे अच्छे उपाय

Bina dawai depression ka ilaaj  -

बिना दवाई डिप्रेशन का इलाज । आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में अवसाद हिस्सा बनता जा रहा है । सामान्य उदासी छोड़कर यदि लगातार उदासी जारी रही है डिप्रेशन के शिकार हो सकते है । अवसाद मन की वह स्थिति है जिसे मन की तमाम तरह की भावनाऐं तेजी से उत्पन्न होती है ।

चूंकि मन तो अनेकों संवेदनाओं एवं भावनाओ युक्त होता है । लेकिन डिप्रेशन की स्थिति में अस्थिरता बढ़ जाती है । उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन, गुस्सेल प्रवृत्ति, बात बात पर झगड़ना, जल्दी अंतिम निर्णय लेना, कभी कभी तो आत्महत्या ( सुसाइड ) जैसी स्थितियां बन जाती है । तब दवाई लेने की स्थिति बन जाती है ।

एक शोध के अनुसार आज हर पांचवा व्यक्ति अवसाद का शिकार है । चुंकि तनाव को डिप्रेशन से अलग मानते है । क्योकि तनाव कुछ समय के लिए होता हैं । जबकि अवसाद लम्बी अवधि का होता हैं तो चलिए जानते है डिप्रेशन ( depression ) के बारे में –  Bina dawai depression ka ilaaj  –

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डिप्रेशन क्या होता है ?

अवसाद / डिप्रेशन का तात्पर्य मनोविज्ञान के क्षेत्र में मनोभावो संबंधी दुख से होता हैं । इसे रोग/ सिंड्रोम की संज्ञा दी जाती हैं । किसी कार्य का न होने या मन मुताबिक सफल न होने पर जो मन में जो दुःख होता है । या मन मे कोई टीस जो आपको हर बार सताती रहती है उसे तनाव कहा जाता है ।

जब इंसान तनाव में लगातार घिरा रहता है तो अवसादग्रस्त हो जाता है । यह एक प्रकार से मनोविकार है जिसे इंसान खुशी के माहौल में चिंताग्रस्त नजर आता है । एक आसान कार्य को करने में समय लगा देता है । अस्थिरता बनी रहती है जिसे वह सही निर्णय नहीं ले पाता है ।

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बिना दवाई डिप्रेशन का इलाज कैसे करें –

अवसाद एक बीमारी हैं वो किसी को भी हो सकती हैं । सामान्य स्थिति में होने पर इलाज की कोई आवश्यकता नहीं होती है लेकिन जब ज्यादा हावी हो जाता है तब इलाज की आवश्यकता होती है । अक्सर लोग बोलते हैं कि सुबह रोज जल्दी उठना उठे, समय पर खाना खाइये, एक्सरसाइज किजिये और यह सारी बाते सही भी हैं ।

एक रिपोर्ट ( Global burden of disease ) की रिपोर्ट में डिप्रेशन के फैलाव का अनुमान पुरुषों में 1.9% और महिलाओं के लिये 3.2% है और एक साल फैलने के बाद इसका पुरुषों में 5.8% और महिलाओं में 9.5% होने का अनुमान लगाया गया है । इसलिये इंसान डिप्रेशन से बचने के लिये आयुर्वेद, योगा, नैचुरोपेथी की शरण में भी जा रहा है ।

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बिना दवाई डिप्रेशन का इलाज  –

संतुलित आहार ग्रहण करें – अवसाद को दूर करने में खान पान अहम भूमिका निभाता है । नियमित संतुलित आहार जैसे फल, हरी सब्जियो का सेवन करने से अवसाद से राहत मिलती है । ऊर्जा का संचार होता है ।

पर्याप्त नींद ले – नींद हमारे स्वस्थ तन एवं मन के लिए बहुत जरूरी होता है । यह न केवल तनाव से राहत देती है बल्कि डिप्रेशन से बचाती है । यह बिना दवाई डिप्रेशन का सबसे अच्छा इलाज है ।

योगा करें – योग विज्ञान कभी भी तथ्यों के बिना समर्थन नहीं करता लेकिन योग और इसके अलग – अलग आसनों पर मेडिकल साइंस ने भी मुहर लगा दी हैं । योग की कारण चमत्कारी परिणाम देखने को मिले हैं । ध्यान और योग विभिन्न आयामों की मदद से तनाव का बिना दवा के इलाज संभव हो पाया है ।

आसन – डिप्रेशन को दूर करने के लिए ध्यान एवं योग विज्ञान ने कुछ आसान बताये है जिसे नियमित रूप से करने आपको तनाव से मुक्ति मिल सकती है और आप ताजगी का अनुभव करेंगे । ये आसन इस प्रकार से है – • भुजंगासन • धनुरासन • त्रिकोणासन • नौकासन ।

वो करे जिसमें मन लगे – आपको क्या खाना पसंद है ? कौनसा खेल पसंद है ? क्या घुमना अच्छा लगता है ? फिर कुछ और जिसे करने को आपका मन बैचेन रहता है । कुछ लोग पहाडों की यात्रा पर गये । कुछ पेंटिंग करने लगे । कुछ लोग भोजन में मग्न हुए लेकीन कुछ लोग दिनों के बाद उनमें परिवर्तन देखे गये । इसलिये अगर आपके आसपास कोई डिप्रेशन या उदासिनता का शिकार है तो उसकी मदद करें ।

बिना दवाई डिप्रेशन का इलाज व घरेलू उपाय –

नींबू – इसके मिश्रण के सेवन से डिप्रेशन से मुक्ति मिलती हैं । 1 चम्मच नींबू का रस, 1 चम्मच हल्दी पावडर, 1 चम्मच शहद, 2 कप पानी मिलाकर एक बर्तन में मिश्रण तैयार करें और नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होगा ।

इलायची- चाय मन को प्रभावित करती हैं । मूड को खुश करने में मदद करती हैं । लगभग 1.5 ग्राम इलायची पावडर और पानी का काढा बनाले । हर रोज एक ग्लास का सेवन करें ।

अश्वगंधा – अश्वगंधा डिप्रेशन के लिये सबसे अच्छा आयुर्वेदिक उपाय हैं । हर रोज शहद के साथ 1 चम्मच अश्वगंधा का सेवन करें जिसे आपको लाभ होगा ।

डिप्रेशन ( अवसाद ) के लक्षण –

  • सदैव उदास रहना – हमेशा उदास रहना एक दफा डिप्रेशन वाली स्थिति होती हैं । इसके लिये 2 शर्तो के बारे में जानना जरूरी है – पहला – हर वक्त मन में खिन्नता का भाव रहना है । और दूसरा – उदासी – जो उदासी होती हैं वो सामान्य उदासी से ज्यादा हावी होती हैं । कई बार लोग कहते हैं खालीपन महसूस होता हैं । यह जो शर्ते हैं जो डिप्रेशन की उदासी सामान्य उदासी से अलग करती है । यह उदासी किसी न किसी रूप में रहती है ।
  • ग्लानि सा आभास होना – मन में हमेशा ग्लानि रहती है । इंसान हमेशा खुद को कोसता ही रहता है की वक़्त बर्बाद कर रहा हूँ या जो कर रहा हूँ गलत कर रहा हैं ।
  • एकांग्रता का अभाव – किसी भी कार्य पर इंसान ध्यान नहीं दे पाता है जेस कोई विद्यार्थी है तो पढाई में ध्यान नहीं दे पायेगा । या कोई उधमी हैं तो कार्यक्षेत्र में ध्यान नहीं दे पाता हैं । यानी वह अपने लक्ष्य पर फोकस नहीं कर पाता है और एकांग्रता का अभाव खलता है ।
  • नकारात्मक विचार – डिप्रेशन पूर्ण स्थिति में इंसान मन में नकारात्मक विचार घर कर जाते है । जो स्वत् ही आते हैं । जीवन की आश टूटने लगती हैं । दूसरों के प्रति यही सोच रहती है कि कोई मेरी मदद नहीं कर सकता है । यदि नकारात्मक विचार जब ज्यादा हावी हो जाते है तो ऐसा इंसान मन से हार मानने लगता हैं । इस सोच के साथ आत्महत्या करने के लिए भी बढ सकते है । ना केवल नकारात्मक बल्कि सकारात्मक चीजे भी दिखाई देना बंद हो जाती हैं । जो नकारात्मक चीजों को अंदर आने देता हैं । डिप्रेशन की यह स्थिति मनुष्य के लिए बहुत खतरनाक सिद्ध होती है ।

डिप्रेशन के कारण –

हर इंसान में डिप्रेशन होने की संभावना एक जैसी नहीं हैं । बहुत सारे कारण होते है जैसे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं अन्य । मगर मोटे तौर पर 2 कारण मानते हैं –

  1. अनुवांशिक – अगर कोई मरीज के पारिवारिक सदस्य डिप्रेशन का शिकार हैं तो उनमें तनाव की संभावना 3 गुना ज्यादा होती है । हद से ज्यादा गम्भीरता तनाव से घेरे रखती हैं । पहले पता नहीं था कि कौन कौनसे जीन शामिल है मगर अब शोध से विशेष जीन को ढुंढा जा चुका है । जिसमें से एक का नाम हैं स्क्रोटोनिन ट्रांसपोर्टर जीन, यह कई तरिके का होता हैं । यह भी पाया गया हैं की कुछ लोगो में खास किस्म जीन हैं । इस जीन का उसके होने से डिप्रेशन होने की संभावना ज्यादा होती हैं ।
  2. तनाव की भूमिका निभाने वाले तथ्य – तनाव की भूमिका निभाने वाले कई तथ्य होते हैं जैसे कि जॉब से निकलना या किसी कारण से मन पसन्द जॉब न मिलना । सामाजिक स्तर पर सम्बन्धों में दिक्कत हो गई मान लिजिये तलाक या सम्बंध विच्छेद हो गया हो या आपसी अनबन के कारण डिप्रेशन की स्थिति बन जाती है । किसी कार्य में आर्थिक नुकसान हो गया । इस तरह से ऐसे कई कारण है जो निराशा स्थिति उत्पन्न करते है । लेकिन जैसे जैसे स्थितियां और ज्यादा बिगड़ जाती है तो आप धीरे धीरे डिप्रेशन की गिरफ्त में जाने लगते हैं ।

डिप्रेशन से नुकसान या दुष्प्रभाव –

यह उदासी, नुकसान / गुस्से की भावनाओं में देखा जाता हैं । यह बीमारी लोगो की नियमित दिनचर्या को प्रभावित करती हैं । लोग अलग अलग तरह से तनाव का अहसास करते हैं । आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जायेगा जिसे किसी कार्य को ठीक से नहीं कर पायेंगे । सरदर्द भी हो सकता है ।

लम्बे समय तक डिप्रेशन के शिकार होने पर ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है । इतना ही नहीं थायराइड के शिकार हो सकते है । अवसाद बीमारियों की जड़ है । इससे आपके शरीर के हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है । इसलिए आवश्यक है कि समय पर डॉक्टरी परामर्श लेना जरूरी समझे ।