लकवा का देसी इलाज पतंजलि व 5 आयुर्वेदिक उपाय

lakva ka desi ilaaj

लकवा का देसी इलाज पतंजलि । लकवा एक ऐसी प्रॉब्लम है जो किसी भी उम्र हो सकती हैं । जिसे हिंदी मे पक्षाधात भी कहते हैं । इनका प्रभाव बॉडी के किसी भी अंग मे हो सकता हैं । जिसे उनके अंग टेढ़े – मेढे हो सकते हैं । जैसे चेहरे का टेढ़ा – मेढा, अंग का न हिलना – डुलना या पूरे शरीर में अकड़ना आदि अनेक प्रकार से हो सकता हैं ।

लकवा मारना को paralysis भी कहते हैं । मनुष्य का शरीर विभिन्न तंत्रिकाओं और मांसपेशियों का संगठित रुप है।अगर शरीर के किसी पार्ट में संवेदनशीलता समाप्त हो गई हो यानि वो भाग काम करना बंद कर दिया हो इस स्थिति को लकवा कहते हैं। शरीर का वह भाग निष्क्रिय हो जाता है । चलना फिरना और मूवमेंट बंद हो जाता हैं । तो चलिए जानते हैं – 10 साल पुराने लकवे का इलाज के बारे में –

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लकवा क्यों होता हैं ?

लकवा का मुख्य कारण मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में रक्त आपूर्ति का रुकना है या फिर मस्तिष्क की कोई भी रक्त वाहिका फट जाने के कारण जिसे ब्रेन हेमरेज कहते हैं आसपास में खून भर जाता है। क्योंकि मस्तिष्क को शरीर का नियंत्रक केंद्र माना जाता है जो सभी भाग को संचालित करता है अगर किसी भाग में यह रुकावट उत्पन्न होता है चाहे वह किसी भी कारण से हो गिरने के कारण चोट लगने के कारण या अनियंत्रित दबाव के कारण भी हो सकता हैं ।

मस्तिष्क प्रेरक तंत्रिका है जो सभी विषयों में अपना संवाहन करती है अगर किसी तरह की कटौती होती है तो लकवा जैसी समस्या से व्यक्ति ग्रसित हो जाता हैं । आम धारणा के अनुसार यह देवी – देवताओं का प्रकोप माना जाता है । जो झाड़ मंत्र से ठीक हो जाता है ।

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लकवा का देसी इलाज पतंजलि में –

लकवा के उपचार में व्यायाम करना सर्वोत्तम माना जाता है पतंजलि में लकवा में अनुलोम विलोम प्राणायाम विशेष रूप से लाभप्रद होता है इसके अलावा भस्त्रिका कपालभाति उज्जाई भामरी और उदगीत प्रणायाम करने से लकवा जैसे बीमारी में लाभ होता है ।

  • पतंजलि दवाई के तौर पर बड़ी उम्र के लोग 10 ग्राम एकांग वीर रस 10 ग्राम प्रवाल पिष्टी 2 से 4 ग्राम मोती पिष्टी 1 से 2 ग्राम रसराज रस और योगेंद्र रस को मिलाकर साथ पुरिया बनाकर सुबह-शाम खाली पेट खाएं। इसके नियमित सेवन से लकवा जैसी समस्या दूर होती है।
  • इसके अलावा सरसों के शुद्ध तेल या फिर घी को गर्म कर जिस भाग में लकवा हुआ है उस पर नियमित रूप से मालिश करें जिससे नसों में रक्त प्रवाह की सक्रियता बढ़ जाएगी और धीरे-धीरे वह अपने पूर्व रूप में आने की चेष्टा करेगी।
  • एक एक गोली मेघावती त्रयोदशांग गुग्गुल शिलाजीत रसायन और अश्वगंधा कैप्सूल दूध के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लकवा जैसी समस्या में राहत मिलती हैं।
  • इसके अलावा हथेली में कुछ पॉइंट है जिसे दबाने से रक्त प्रवाह होने लगेगी रिंग फिंगर के ऊपरी भाग को दबाए शरीर में जिस तरफ लकवा हुआ है उस तरफ के हाथ पैर को उंगली को दबाए जिससे रक्त संचार में बढ़ोतरी होगी और रोगी को इस समस्या से राहत मिलेगी ।
  • सोंठ आयुर्वेद लकवा का देसी इलाज में बहुत ही फायदेमंद होता है इसे पानी में डालकर उबाल लें ठंडा होने के बाद छानकर इसे रोजाना पिए रोगी को बहुत राहत मिलता है।

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पुराना से पुराना लकवा का देसी इलाज पतंजलि –

लकवा में शरीर का कोई भी अंग काम करना बंद कर देता है मुंह टेढ़ा होने लगता है और भूलने में भी दिक्कत होने लगता है आवाज है स्पष्ट नहीं होती है यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति में हो सकता है। दिनचर्या में बदलाव और आहार की नियमिता से व्यक्ति स्थाई रूप से ठीक हो सकता है।

  • लकवा बीमारी में करेले का सेवन लाभप्रद होता है लकवा ग्रस्त व्यक्ति रोजाना करेले की सब्जी खाएं या फिर उसका जूस पिए उसमें या फायदेमंद होता है।
    पुरानी बीमारी के तौर पर प्याज का सेवन बहुत ही लाभप्रद होता है नियमित रूप से प्याज लकवा ग्रस्त व्यक्ति खाएं या फिर उसका रस का सेवन करें या पुरानी से पुरानी बीमारी में भी राहत देती है।
  • लहसुन चौकी आयुर्वेदिक औषधि है इसके छिपकली को पीसकर एक चम्मच मक्खन में मिलाकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को रोजाना सेवन करने से लकवा ठीक हो जाता है।
  • तुलसी का पौधा और उनकी पत्तियाँ को औषधीय पौधों के रूप में जाना जाता है तुलसी के पत्ते दही और सेंधा नमक को अच्छे से मिला लीजिए अब इसलिए को लकवा ग्रस्त प्रभावित अंगों पर लगाने से आराम मिलता है इसके अलावा पानी में तुलसी के पत्तों को उबालकर भाप लेने से प्रभावित अंगों पर लेने से जल्द ही सुधार होता है।
  • सरसों के तेल में 50 ग्राम लहसुन डालकर गर्म करके ठंडा होने के बाद तेल को छानकर किसी डब्बे में रख लें इस तेल को रखवा ग्रसित अंगों पर मालिश करने से पुरानी से पुरानी बीमारी दूर होती है।
  • कालीमिर्च को पीसकर 3 चम्मच घी में मिलाकर पेस्ट बना लें और लकवा ग्रसित अंगों पर इससे मालिश करें यह बहुत ही फायदेमंद होता है।

लकवा का आयुर्वेदिक दवाई –

अभ्यंग महामाश तेल धनवंतरी तेल शेर वाला तेल जैसे औषधीय तेल से प्रभावित ही सुपर शरीर की मालिश करने से रक्त संचार बढ़ता है और पेशियों में मजबूती आती है।

  • अश्वगंधा इसे इम्यूनिटी पावर में बूस्टर हर भी कहा जाता है यह उत्तर को को प्रोग्रेसिव करने में मददगार होता है और साथी मांसपेशियों को मजबूती और थकान के इलाज में लाभ होता है।
  • लकवा रोगी को न्यूरो जेनरेटिव ब्रह्मा ना गुणों के कारण दिया जाता है।
  • बाला यह आयुर्वेदिक औषधि शरीर के मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ हृदय के लिए भी अच्छा माना जाता है नसों में उत्तेजित उत्पन्न करना दर्द सुन्नता और मांसपेशियों की ऐंठन में बहुत ही आरामदायक होता है ‌
  • निर्गुंडी के आयल से मालिश करने पर शरीर में दर्द और जागरण तो दूर होती ही है साथी रक्त संचार में भी मददगार साबित हुई है।
  • रसना इसमें ऐसे गुण हैं जो शरीर की में कायाकल्प को सुधारने में मददगार होती है जलन रोधी गुण के कारण मांसपेशियों को आराम देती है वादा रहा है इसलिए लकवे के मरीज में रचना बहुत जरूरी है। इसके अलावे में भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है।

लकवा ग्रस्त व्यक्ति की चूंकि मांसपेशियों की बीमारी है। जिसमें शरीर की गतिविधियां कमजोर पड़ती है और वाणी में भी रुकावट पैदा होती हैं। यह बीमारी लाइलाज नहीं है थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता के साथ-साथ व्यायाम और कुछ घरेलू आयुर्वेदिक औषधियों के माध्यम से इस बीमारी में राहत देगी ।। कल्पना झा ।।