बेल पत्र खाने के 21 फायदे, नुकसान एव उपयोग विधि

belpatra khane ke fayde.

बेल पत्र खाने के फायदे । बेल को बहुत से नामों से जाना जाता है । इसे बिल्व, बेल या बेलपत्थर, भी कहते हैं । यह फल हमारे देश भारत में लगभग सभी जगह होने वाला फल का पेड़ है । इसमें रोगों को नष्ट करने के अनेक गुणों की वजह से बेल को बिल्व भी कहा जाता है । बेल को शाण्डिल्रू (दर्द निवारक), श्री फल, सदाफल आदि कई नामों से जाना जाता है । बेल के गूदे को बल्व कर्कटी और इसका सूखा गूदा बेलगिरी कहलाता है ।

यह पौधा भारत में पाया जाता है। इनका उपयोग जूस या शरबत के रुप बेल किया जाता है। हिंदु धर्म में बेल को एक पवित्र पौधा माना जाता है और विशेष रूप से भगवान भोलेनाथ की पूजा में बेल के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है । ज्यादातर लोगों को बेल से होने वाले फायदे के बारे में पूरी जानकारी ही नहीं है, आयुर्वेद में इसे अत्यंत महत्वपूर्ण औषधि माना गया है, जो पाचन संबंधी अनेक बीमारियों में लाभदायक है ।  इस फल का हर हिस्सा ही स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी है, बाहर से यह फल जितना ही कठोर होता है । अंदर से उतना ही मुलायम और गूदेदार होता है । इसके गूदे में उपलब्ध बीज अनेक बीमारियों के इलाज में लाभदायक होते हैं । – belpatra khane ke fayde.

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बेल में पाए जाने वाले पोषक तत्व –

बेल पत्र में पोषक तत्वों और विटामिन की भरमार पाई जाती हैं । इसमे मौजूद टैनिन और पेक्टिन खासतौर से दस्त और डायरिया के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के अतिरिक्त बेल के फल में प्रोटीन, विटामिन सी, फाइबर, कैल्शियम और आयरन भी बहुत ज्यादा मात्रा में होते हैं । यदि बेल का नियमित सेवन करें तो शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति होने के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत बढ़ जाती है ।

बेल पत्र खाने के फायदे

यह अद्भुत फल पेट से जुड़ी सभी समस्याओं को ठीक करने में अत्यधिक लाभदायक है । इसके सेवन से पाचन प्रणाली ठीक रहती है जिसके कारण अपच और कब्ज़ जैसी समस्याओं से बहुत लाभ होता है । आयुर्वेद में तो बेल के गुणों का न सिर्फ प्रमुखता से उल्लेख मिलता है, अपितु यह भी बताया गया है कि यह कब्ज़ के अतिरिक्त मधुमेह, डायरिया, पेचिश, स्कर्वी, कान के दर्द आदि रोगों में भी लाभदायक है ।

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बेल पत्र खाने के डायबिटीज ( मधुमेह ) के रोगियों के लिए फायदे –

बेलपत्र लाभदायक होता है । किन्तु उन्हें भी बहुत ही कम मात्रा में बेलपत्र का सेवन करना चाहिए। यदि आप किसी विशेष बीमारी के लिए दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो ऐसी स्थिति में बेलपत्र के नियमित सेवन के लिए आपको वैद्य से राय लेनी चाहिए । बेल फल के लाभ और हानि को ध्यान में रखते हुए गर्मियों के मौसम में बेल का सेवन करें और इसके लाभ लें । अगर इसके सेवन से कोई समस्या होती है तो डॉक्टर से राय लेनी चाहिए ।

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बेल पत्र खाने से पेट के लिए फायदे –

पाचन तंत्र ठीक करने सहित बेल के अनेक लाभ होते हैं वर्तमान कालीन व्यस्त जिंदगी में अधिकांश लोग पेट की अनेक समस्याओं से परेशान रहते हैं और पाचन तंत्र के ठीक से काम न करने के कारण से अनेक प्रकार के रोग होने लगते हैं । बेल का सेवन पाचन को ठीक करने के साथ ही अन्य सभी समस्याओं से राहत दिलाने के साथ ही शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों और विटामिनों की आपूर्ति करती है ।

बेल पत्र खाने के पेचिश और डायरिया मे फायदे –

पेचिश और डायरिया के इलाज में बेल का सेवन सर्वाधिक लाभदायक माना जाता है । खाना ठीक से न पचने के कारण पेचिश और डायरिया आदि अनेक समस्याएं होने लगती हैं । इन सभी प्रॉब्लम से निजात दिलाने में बेल पत्र का सेवन करना लाभदायक है । इतना हि नही डायरिया तो मात्र 3 से 5 दिनों में ठीक हो जाता है ।

सेवन विधि – बेल गिरी के 1/2 चम्मच चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करने से बहुत लाभ होता है ।

बेल पत्र खाने के हृदय रोग के लिए फायदे –

हृदय रोगियों के लिए भी बेलपत्र का सेवन अत्यधिक लाभदायक होता है । बेलपत्र का काढ़ा बनाकर पीने से हृदय मजबूत होता है और दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम हो जाता है । इसी प्रकार अस्थमा या श्वास के रोगियों के लिए भी बेल पत्र अमृत के समान है । इन पत्तियों का रस पीने से श्वास रोग में बहुत लाभ मिलता है ।

बेल पत्र खाने के फायदे

  • मुँह के छाले – मुँह के छाले और मसूड़ों की समस्या से बहुत से लोग परेशान रहते हैं । बेल का गूदा पानी में उबालकर कुल्ला करने से छाले और मसूड़ों की समस्या दूर होती है । नियमित रुप से इस प्रक्रिया को अपनाने से बहुत लाभ मिलता है ।
  • भूख बढ़ाएँ – यदि भूख न लगती हो, कब्ज हो, जी मिचलाता हो तो इसका गूदा पानी में मथ कर उसमें चुटकी भर लौंग, काली मिर्च का चूर्ण और थोड़ी सी मिश्री मिला कर कुछ दिन लेने से भूख खुल जाती है ।
  • बुखार होने पर – यदि बुखार होने पर बेल की पत्तियों को उबाल के काढ़े का सेवन किया जाय तो बहुत फायदा होता है ।

बेल जूस के फायदे और नुकसान –

बेल के पत्तों का रस या बेलपत्र जूस डायबिटीज के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है । मधुमेह रोगी को अच्‍छे परिणाम प्राप्त करने के लिए बेलपत्र के रस को रोजाना सुबह के समय पीना चाहिए ।

बेलपत्र का रस बनाने के लिए 1 या 2 बेलपत्र, 5 – 6 तुलसी के पत्ते आधा आंवला, 2 – 3 पुदीना के पत्ते, 2 – 3 टहनी करी पत्ता और दो चम्मच लौकी के रस की जरूरत होती है ।

इन सभी चीजों को एक ब्लेंडर की सहायता से महीन पेस्ट बनाकर इस पेस्ट को पीने योग्य बनाने के लिए इसमें पानी मिलाकर अपने स्वादानुसार इसमें काला नमक मिलाकर रोज पीने से बहुत फायदा होता है । इस रस को बहुत अधिक देर तक न रखें । रस तैयार करने के 1 से 2 घंटे भीतर ही इसका सेवन लाभदायक होता है ।

खून साफ करने में सहायक –

बेल का रस खून को साफ़ करने में सहायक होता हैं । बेल के नियमित सेवन से खून शुद्ध होता है और खून में संक्रमण की वजह से होने वाली अनेक प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलता है ।

सेवन विधि – पके हुए बेल का गूदा निकालकर रात भर पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसका शर्बत बना करके पीने से बहुत लाभकारी होता है ।

बार बार शौच जाने की प्रॉब्लम से मुक्ति –

बहुत से लोग बार – बार शौच जाने की समस्या से पीड़ित रहते हैं । उन्हें सदैव यह लगता है कि उनका पेट साफ़ ही नही हुआ । आयुर्वेद में इस रोग को अजीर्ण कहा गया है । इस रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेल का सेवन अत्यंत उपयोगी है । बेल के नियमित सेवन से पेट ठीक से साफ़ होता है और बार – बार शौच जाने की समस्या से लाभ मिलता है । बेल में लैक्सेटिव क्षमताएँ होती हैं जो हमारी आँतों को भी ठीक तरह से साफ़ रखती हैं ।

सेवन विधि – दो चम्मच बेल के गूदे को आधा गिलास पानी में मिलाकर शर्बत बना कर दिन में दो बार इसका सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है ।

किडनी के लिए लाभदायक –

पके बेल का सेवन किडनी के लिए भी अत्यंत लाभदायक है, यह किडनी की कार्यक्षमता को भी बढ़ाती है । एक शोध- खोज के अनुसार – बेल की जड़ों और पत्तियों में डायूरेटिक गुण होते हैं जो मूत्र का उत्पादन बढ़ाती हैं । मुख्य रूप से वाटर रिटेंशन की समस्या से आराम दिलाने में बहुत कारगर है ।

किसी भी व्यक्ति के शरीर में अचानक पानी और नमक बढ़ने की समस्या को वॉटर रिटेंशन कहते हैं । इसके कारण हमारे शरीर का वजन अचानक से बढ़ने के साथ ही टांग, पैर और एड़ियों में दर्द होने लगता है । वॉटर रिटेंशन की वजह से अनेक लोगों के हाथ, पैर और पेट में सूजन की समस्या होने लगती है । इस तकलीफ से पीड़ित व्यक्ति के टिश्यू में असामान्य रूप से पानी भरने लगता है ।

सेवन विधि – आधा चम्मच बेल की पत्तियों के पावडर को पानी के साथ मिलाकर नियमित सेवन करने से बहुत लाभ होता है ।

गर्मियों में लू से बचाव –

गर्मियों में बहुत से लोगों को लू लग जाना एक गंभीर समस्या है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक कोई भी लू की चपेट में आ सकता है । बेल के शरबत से शरीर को ठंडक पहुँचती है और लू से हमारे शरीर की रक्षा भी करती है । बेल के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है । तपती धूप में बाहर जाने से पहले एक गिलास बेल पत्र का शरबत पीने से गर्मियों में लू से बचाव होता है।

सेवन विधि – पके बेल का दो चम्मच गूदे को आधा गिलास पानी में मिलाकर बेल का शर्बत बना कर प्रति दिन एक से दो बार सेवन करने से अत्यधिक लाभ होता है ।

जिगर (लीवर) के लिए लाभदायक –

बेल की पत्तियाँ लीवर को स्वस्थ रखने में लाभदायक होती हैं । लीवर से जुड़ी बीमारियाँ भी तभी होती हैं, जब शरीर में टॉक्सिन या हानिकारक विषैले पदार्थ बढ़ जाते हैं या किसी तरह का संक्रमण हो जाता है । शोध में पाया गया कि बेल में एंटी बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल, एंटी फंगल गुण होने के साथ ही इसमें बीटा- कैरोटीन भी पाया जाता है , जो लीवर को हर प्रकार के संक्रमण और चोट से बचाने में सहायक होता है ।

सेवन विधि – पके बेल के गूदे को निकालकर रात भर के लिए पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसे पीस के खाने से लाभ मिलता है ।

बेलपत्र खाने से स्कर्वी रोग मे फायदे –

विटामिन सी की कमी की वजह से स्कर्वी रोग हो जाता है । इस के कारण मसूड़ों से खून रिसने लगता है और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने लगते हैं । लगातार बेल का सेवन करने से इस रोग को बहुत हद तक ठीक कर देती है । बेल में उपलब्ध विटामिन सी से शरीर की यह कमी को दूर हो जाती है और साथ ही इम्युनिटी पॉवर को भी बहुत मजबूत बनाती है ।

सेवन विधि – आधा से एक चम्मच बेलगिरी चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर खाने से बहुत लाभ मिलता है ।

बेल जूस से कान के दर्द में फायदे –

बेल के फल से केवल हाजमा ही ठीक नहीं होता बल्कि यह कान दर्द में भी बड़ा लाभदायक है । कान में दर्द और कान से मवाद का बहना एक आम समस्या है । आयुर्वेद के अनुसार बेल के उपयोग से कान के दर्द, कान बहने और बहरेपन जैसी समस्याओं से आराम मिलता है ।

यद्यपि अनेक बार कान में दर्द की समस्या किसी और कारण से भी हो सकती है । इसके लिए कान से संबंधित चिकित्सा में आयुर्वेदिक चिकित्सक या वैद्य की सलाह के अनुसार ही बेल का सेवन करना चाहिए ।

उपयोग विधि – बिल्वादी तेल एक आयुर्वेदिक तेल है, यह मुख्य रूप से बेल से बनता है । यह तेल कान के दर्द से राहत देने में बहुत लाभदायक होता है । यद्यपि इसका उपयोग सुयोग्य चिकित्सक या वैद्य की देख- रेख में ही करना चाहिए ।

स्तन दूध उत्पादन बढ़ाए

हाल ही में माँ बनी स्त्रियों के लिए तो इसके जूस का सेवन बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है । ये स्वास्थ्य को बेहतर कर स्त्रियों के स्तनों के दूध के उत्पादन को बढ़ाता है ।

रतौंधी की समस्या में लाभ –

लगभग दस ग्राम ताजे बेल के पत्तों को सात काली मिर्च के साथ अच्छे से पीस कर इसमें आधा पाव पानी मिलाकर अच्छे तरह से छानकर फिर इसमें दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना सुबह और शाम पीने से बहुत फायदा होगा । रात में बेल के पत्ते को पानी में भिगोकर फिर उस पानी से सुबह उठकर आँखों को धोने से बहुत लाभ होता है ।

मूत्र रोग से राहत –

पेशाब की किसी भी समस्या से मुक्ति पाने के लिए दस ग्राम बेलगिरी में पाँच ग्राम सोंठ का बारीक चूर्ण मिला कर लगभग आधा लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर इस काढ़े को रोज पीने से बहुत लाभ मिलता है ।

बेल का सेवन कैसे करें –

यूँ तो बेल को अनेक तरह से खाया जा सकता है । किन्तु बेल का रस या बेल के शरबत का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है । इसका बाहरी हिस्सा बहुत कठोर होता है, उसे तोड़ कर अंदर के लिसलिसे गूदे में से बीज को निकालकर खा सकते हैं या रात भर इस गूदे को पानी में भिगोकर अगली सुबह इसे खाते हैं । अनेक लोग इसके गूदे को सुखाकर उसका चूर्ण बनाकर भी सेवन करते हैं । जिसे बेलगिरी चूर्ण कहा जाता है ।

इसके अतिरिक्त बेल की पत्तियों का रस भी अतुलनीय गुणकारी होता है और अनेक बीमारियों में इसका उपयोग किया जाता है । बहुत से लोग बेल का मुरब्बा बनाकर उसका सेवन करते हैं । यह स्वाद में मीठा और बहुत फायदेमंद होता है ।

बेल से नुकसान –

बेल फल अत्यधिक लाभदायक होता है ,साधरणतया इससे कोई नुकसान नहीं होता, किन्तु आवश्यकता से अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बेल नुकसान दायक भी हो सकता है । बेल के सेवन से निम्न नुकसान भी हो सकते हैं और किन परिस्थितियों में बेल का उपयोग नहीं करना चाहिए ।

  • कब्ज़ – यदि मल के सख्त होने की वजह से कब्ज़ की शिकायत है तो ऐसे में बेल के सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि बेल मल को सख्त बनाती है । इस कारण कब्ज़ की समस्या और बढ़ सकती है ।
  • मधुमेह में परहेज – मधुमेह से पीड़ित रोगियों को बाज़ार में मिलने वाले बेल का शरबत का सेवन करने से उस शरबत में उपलब्ध शुगर की अधिक मात्रा हानिकारक हो सकती है । इस कारण मधुमेह के रोगियों को बेल के शरबत का सेवन नहीं करना चाहिए या चिकित्सक की राय से इसका सेवन करन चाहिए ।
  • थायराइड रोग में परहेज – बेल, थायराइड हार्मोन पर और थायराइड की दवाइयों के प्रभाव पर असर डालती है , अतः थायराइड के रोगियों को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए या चिकित्सक की सलाह के अनुसार सेवन करन चाहिए ।

यद्यपि सामान्य रूप से बेलपत्र और बेलपत्र फल का उपयोग स्वास्थ्य ठीक करने के लिए ही किया जाता है । फिर भी कुछ परिस्थितियों में बेलपत्र का उपयोग करने से लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती हैं । जैसे कि – स्तनपान कराने वाली या गर्भवती महिलाओं को बेलपत्र का सेवन नहीं करना चाहिए । बेलपत्र में एंटी-फर्टीलिटी गुण होने के कारण अधिक मात्रा में इसका सेवन करना महिला और पुरुषों दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है । बहुत अधिक मात्रा में बेलपत्र का सेवन करने से भूख की कमी प्रॉब्लम हो सकती है।। डॉ. राजेश कुमार जैन ।।