टीबी के लक्षण और बचाव । Tuberculosis (TB) ke lakshan in hindi.

Tuberculosis (TB) ke lakshan in hindi.

Tuberculosis (TB) ke lakshan in hindi. आजकल नीरस खान-पान और बढ़ते फास्ट फूड के प्रचलन से लोगों का जीवन स्तर गिरता जा रहा है । हम अपनी जीभ के स्वाद के लिए बाजार में बने उत्पादों को अपनाते जा रहे हैं । घर के बने पौष्टिक भोजन से मुंह मोड़ते जा रहे हैं । जिसके अनेक दुष्प्रभाव हमारी जीवन शैली में देखने को मिल रहे हैं । स्वास्थ्य के साथ जो हम खिलवाड़ कर रहे हैं । हम विज्ञापनों के प्रभाव में आकर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का इस्तेमाल कर लेते हैं। जिसके साइड इफेक्ट देखने को मिल रहे हैं ।

लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं है । जबकि स्वास्थ्य ही सब कुछ है। भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों में एक बीमारी बहुत तेजी से अपना रूप दिखा रही है । वह है क्षय रोग अथवा टीबी ( Tuberculosis ) अकेले भारत में विश्व के 21% लोग टीबी रोग के शिकार हैं । हर साल लगभग 22 लाख व्यक्ति टीबी संक्रमण के शिकार हो जाते हैं । इसके प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। इसके लिए 24 मार्च को हर वर्ष विश्व टीबी रोग दिवस मनाया जाता है । आइये जानते है – टीबी रोग के बारे में – Tuberculosis (TB) ke lakshan in hindi.

क्षय रोग क्या है ? What is Tuberculosis in hindi.

क्षय रोग को टीबी या तपेदिक रोग के नाम से भी जाना जाता है। क्षय का अर्थ कम होना या घटाने से लिया जाता है । अर्थात क्षय रोग एक ऐसी बीमारी है जो होने के बाद शरीर को दीमक की तरह काटती रहती है । यह एक संक्रमण से फैलने वाली खतरनाक बीमारी है । यह ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से फैलता है। यह बीमारी सबसे अधिक फेफड़ों को प्रभावित करती है । वैसे यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है । जिस अंग में टीवी का संक्रमण हो जाता है। वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने लगता है । उदाहरण के लिए फेफड़ों में टीबी होने से धीरे धीरे फेफड़ों में बैक्टरिया के कारण छेद हो जाते है जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है । फिर धीरे धीरे फेफड़े पूरी क्षतिग्रस्त हो जाते है ।

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टीबी के बैक्ट्रिया संवेदनशील अंगों को अधिक प्रभावित करता है। जैसे फेफड़ों, मस्तिष्क, बच्चेदानी, मुख्, लिवर, किडनी, गला आदि। रोगी के खासने, छींकने, बोलने, सांस लेने से फैलती है। टीबी बहुत ही खतरनाक बीमारी है। यदि उचित समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह जानलेवा भी बन जाती है । यह रोगी को दिनोंदिन बीमार बना कर रखती है। टीवी का संक्रमण मध्यम आर्थिक स्थिति वाले देशों में अधिक देखने को मिल रहा है । जहां स्वास्थ्य सुविधाएं और खान पान बेहतर नहीं है।

टीबी की बीमारी कैसे होती हैं ? Cause of Tuberculosis in hindi.

टीबी यानी तपेदिक एक संक्रामक बीमारी है । जो एमटीबी जीवाणु (माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस) के कारण होती है । हालांकि यह संक्रमण बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, जो व्यक्ति के जीवन भर रह सकता है।
पुराना जुकाम भी टीबी का रूप ले सकता हैं । इसी प्रकार भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में टीबी संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि टीबी छीकने, खांसने से फैलती है ।

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क्षय रोग के 8 प्रमुख लक्षण । TB ke lakshan in hindi.

क्षय रोग का बैक्टीरिया सूक्ष्म होता है, जो शरीर में प्रवेश करने पर कुछ समय तक कोई लक्षण नहीं दिखाता है । लेकिन जैसे जैसे संक्रमण बढ़ता है। वैसे – वैसे टीवी के लक्षण आने आरंभ हो जाते हैं। जो निम्न में हो सकते हैं –
1. लगातार खांसी आना – टीबी फेफड़ों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाती है । फेफड़ों में संक्रमण होते ही सूखी खांसी आनी आरंभ हो जाती है। बाद में जैसे जैसे संक्रमण बढ़ता है, वैसे वैसे बलगम युक्त व खून वाली खांसी आती है। यदि यह खांसी अधिक दिनों तक बनी रहे तो डॉक्टर की सलाह से जांच करानी चाहिए।

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2. पसीना अधिक आना – टीबी के मरीज को पसीना बहुत अधिक आता है। ठंड के समय भी टीबी का मरीज पसीने से तरबतर रहता है। रात को पसीना अधिक आता है, तो यह टीबी का लक्षण ( TB ke lakshan in hindi. ) माना जाता है।

3. बुखार आना – जिन लोगों को टीवी का संक्रमण हो जाता है । उन्हें हल्का बुखार आने लगता है। संक्रमण अधिक बढ़ने पर बुखार तीव्र गति से आने लगता है।

टीबी के लक्षण । Symptoms of Tuberculosis in hindi.

4. थकान महसूस होना – टीवी का मरीज दिन पर दिन कमजोर होता जाता है। वह हमेशा अपने शरीर में थकावट महसूस करता है। हाथ पैरों में भड़कावन रहती है । कामकाज में उसका मन नहीं लगता है।

5. वजन का कम होना – टीवी के मरीज का लगातार वजन कम होता जाता है। उसे खाया पिया हजम नहीं होता है । उसका खाने पीने से मन हट जाता है । भोजन में स्वाद नहीं आता है ।

6. ठंड महसूस होना – क्षय रोग का मरीज अंदर ही अंदर से ठंड महसूस करता है। शरीर गर्म होता है फिर भी उसे ऐसा लगता है कि सर्दी लग रही है।

7. सांस का फूलना – टीबी से मरीज के फेफड़े खराब हो जाते हैं। जिसके कारण उसका सांस फूलता है ।खांसी अधिक होने के कारण सांस लेने में दिक्कत आती है। थोड़ा चलने फिरने पर या वजन उठाने पर उसका दम सा भरने लगता है।

8. पीठ में जकड़न होना – टीबी रोगी की पीठ में जकड़न रहती है । हल्का दर्द रहता है । खांसते वक्त पीठ में दर्द होता है। कभी-कभी यह दर्द असहनीय भी हो जाता है।

पेट में टीबी के लक्षण । Pet me TB ke lakshan in hindi.

जब पेट में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्यूबरकुलोसिस का संक्रमण होता हैं तो पेट में ऐंठन की प्रॉब्लम रहती है । यह नाभि के आस पास के क्षेत्रों में रहता है । साथ ही साथ उल्टी दस्त की शिकायत भी रहती हैं । इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें ।

महिलाओं में टीबी के लक्षण । Mahilaon me TB ke lakshan in hindi.

टीबी एक आम बीमारी है । इनका संक्रमण किसी को भी हो सकता है मगर महिलाओं, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों में कमजोर इम्युनिटी के कारण जल्दी फैलता है । इनके शुरुआती लक्षणों में लगातार खासी होना, बुखार, बलगम के साथ खून आना, रात में पसीना आना, पीठ दर्द एवं अधिक थकान महसूस होना मुख्य हैं ।

छोटे बच्चों में टीबी के लक्षण । Bachchon me TB ke lakshan in hindi.

छोटे बच्चों में टीबी की बीमारी का औसत सामान्य है । एक्सपर्ट के अनुसार 10 में से 1 बच्चे में पाई जाती हैं । इनके प्रमुख लक्षणों में लीफ नोट्स में सूजन, सांस लेने की परेशानी, खांसी आना, रात में बुखार आना आदि । टीबी की बीमारी अंधेरे एवं बंद कमरे में जल्दी फैलती है ।

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टीबी के इलाज के बाद सावधानियां ।

  1. समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहें।
  2. नियमित रूप से दवाओं का सेवन करें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोर्स बन्द न करें।
  3. थूकते या खांसते समय छोटे रुमाल का या कपड़े का प्रयोग करें।
  4. स्वच्छ, खुले व हवादार कमरे में रहे।
  5. अच्छा पौष्टिक आहार का सेवन करें।
  6. रोज हल्का व्यायाम करें।
  7. धूम्रपान व नशीले पदार्थों का सेवन न करें।
  8. गन्दी जगहों पर जाने से बचें।
  9. छोटे बच्चों को समय पर bcg का टीका लगवाएं।
  10. शारीरिक स्वच्छता का ध्यान रखें।
  11. क्षय रोग के रोगी का झूँठा किसी ओर को न खिलाएं।

क्षय रोग में क्या खाएं ?

क्षय रोग में अपने खान पान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है । उसे हमेशा पौष्टिक आहार लेना चाहिए । उसे विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई युक्त भोजन ही लेना चाहिए । जैसे – दूध, ब्रोकली, सीताफल, टमाटर, नीबू, सन्तरा, केला, आंवला, शकरकन्द, गाजर, साबुत अनाज, लहसुन, मछली, पत्तेदार सब्जियां, सहजने की सब्जी, नारियल पानी, पनीर, लोकी का ज्यूस, तुलसी का सेवन, प्याज का रस आदि।

क्षय रोग में क्या न खाएं ?

क्षय रोग का संक्रमण होने पर निम्न लिखित परहेज करना ज्यादा अच्छा रहता है।

  1. कोल्ड ड्रिंक का सेवन बन्द कर दें।
  2. तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी आदि का सेवन न करें।
    शराब, एल्कोहल पदार्थों का सेवन न करें।
  3. चाय, कॉफी जैसे केफीन युक्त पदार्थों का अत्यधिक सेवन न करें।
  4. बाजार के बने फ़ास्ट फूड का सेवन न करें।
  5. अत्यधिक मसाले युक्त भोजन से परहेज करें।
  6. तली, भुनी चीजो का कम प्रयोग करें।
  7. रिफाइंड तेल का सेवन न करें।
  8. अधिक फैट युक्त भोज्यपदार्थों का सेवन न करें।

टीबी रोग के ईलाज में उपयोगी दवाइयां । Treatment of Tuberculosis in hindi.

आजकल सरकार टीबी रोग के प्रति बहुत सचेत है इसके संक्रमण के को देखते हुए प्रत्येक हॉस्पिटल में टीबी का ईलाज संभव है । लेकिन यह ईलाज लंबा चलता है। टीबी संक्रमण से पूरी तरह मुक्त होने के लिए लगभग 6 महीने तक दवाईयां लेनी होती हैं । ये दवाइयां सरकारी अस्पताल में निशुल्क दी जाती हैं। सरकारी हॉस्पिटल में इसके संक्रमण को देखते हुए पूरे कोर्स की तीन प्रकार की दवाइयां दी जाती है । जो टीबी के संक्रमण से मुक्ति देती हैं । फिर भी कुछ ऐसी दवाएं हैं जिनका उपयोग टीबी के उपचार में किया जाता है। जो बाजार में उपलब्ध है। वे निम्नलिखित हैं-

1. आइसोनायजीड दवा (inh)
2. रिफेमपीन (rmp)
3. पायराजीनामाइड (pza)
4. इथेम्ब्युटल (etibl, emb)
5. पायरी डोक्सिन (vitamin-b6)

टीबी की दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट भी देखने को मिल सकते हैं । जिन पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है । जैसे उल्टी, दस्त, एलर्जी, खुजली, आंखों में जलन, जी खराब होना, सांस ज्यादा फूलना आदि । जिनके बारे में डॉक्टर को तुरंत बताना चाहिए।

निष्कर्ष – Tuberculosis in hindi.

हमें अपने स्वास्थ्य के बारे में सचेत रहना चाहिए। स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए। हमेशा पौष्टिक और सुपाच्य आहार लेना चाहिए। समय-समय पर अपने शारीरिक स्वास्थ्य की जांच करवाते रहना चाहिए। ताकि अपने स्वास्थ्य को और बेहतर बनाया जा सके । संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए । एक-दो हफ्ते से अधिक यदि खांसी रहे तो तुरंत टीबी की जांच करानी चाहिए। क्षय रोग से संबंधित लेखों को पढ़ते रहना चाहिए। जिससे उसके बचाव, लक्षण, उपचार आदि के संबंध में आवश्यक जानकारी मिल सके ।

अस्वीकरण – इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य शैक्षणिक है । मिलते जुलते लक्षणों के बारे में भृमित होने बजाय डॉक्टर से सम्पर्क करें ।। रामकुमार प्रजापति, अलवर, राजस्थान ।।

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