अफीम युक्त आयुर्वेदिक दवा के नाम एव उनका उपयोग 

opium yukt ayurvedic dawa.

अफीम युक्त आयुर्वेदिक दवा के नाम एव उनका उपयोग
अफीम एक नशीला पदार्थ है । जो एक पौधे से प्राप्त होता है । इसे बिना किसी से सेवन किया जाता है । मगर इनका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की दवाओं मे किया जाता हैं । जिससे वह दवा प्रभावशाली बन जाती हैं । और वह अशक्ति, अनिंद्रा जैसे प्रॉब्लम के राहत कारी बन जाती हैं ।

सदियों पुरानी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति मे विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी बुटियों के साथ साथ अफीम का भी मिश्रण किया जाता हैं । ताकि यह दवा प्रभावशाली हो । ऐसी बहुत सारी दवा उपलब्ध हैं जिनका उपयोग डॉक्टर की सलाह से कर सकते हैं । यदि आप अफीम की लत के शिकार है तो यह दवा आपके लिए लाभकारी हो सकती है ।

आज के लेख मे कुछ ऐसी ही दवाओं की सूची बताने जा रहे है जिसमे अफीम जैसे नशीली पदार्थ का मिश्रण है । तो चलिए जानते हैं – अफीम युक्त आयुर्वेदिक दवाओं के नाम –

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अफीम के फायदे नुकसान –

अफीम (Opium) एक प्रकार का नशीला पदार्थ है । इनका सेवन करना जितना फायदेमंद है उतना ही नुकसानदायक है । क्योकि इनकी लत लग जाती हैं । हालांकि यह शारीरिक फायदे देती हैं लेकिन आर्थिक रूप से नुकसान देती हैं । इसी इनसे निर्मित दवाओं मे यह गुण समा जाते हैं । यदि आप डॉक्टर की सलाह से सेवन करते हैं तो उपयोगी साबित हो सकता है तो चलिए जानते हैं – नुकसान के बारे में –

  • निर्माण संबंधी समस्याएं – अफीम युक्त दवाओं का नियमित सेवन करना शरीर में निर्माणित होने वाले रासायनिक पदार्थों के लिए एक आवश्यकता बन सकता है। यह समस्याएं हो सकती हैं जैसे कि मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमिटर्स की अवशोषण, जो व्यक्ति के मूड, अनुभाव, श्वास-प्रवृत्ति और दर्द को नियंत्रित करते हैं।
  • नेत्र समस्याएं – अफीम युक्त दवाओं की लंबी अवधि का उपयोग करने से नेत्रों में संक्रमण हो सकता है जिसके कारण नेत्रों को क्षर की संभावना होती है।
  • लत लगने की समस्या – अफीम युक्त दवाओं का सेवन करने से आपको लत लगने की संभावना रहती हैं । जिससे आप हमेशा के लिए अफीम जैसे नशीले पदार्थो के आदी हो सकते हैं ।
  • अन्य दुष्प्रभाव – सेवन करने के पश्चात अफीम युक्त दवाओं के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जैसे कि उन्माद, अशक्ति, नींद या अनिश्चितता की वृद्धि, चक्कर आना, पेट में सूजन, मुंह अत्यधिक सूखना, त्वचा के क्षेत्र में लालिमा या खुजली आदि।

इन सभी कारणों से अफीम युक्त आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करने से पहले एक चिकित्सक से परामर्श करें और सम्मति ले लें ।

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अफीम युक्त आयुर्वेदिक दवा के नाम –

दवा को बेहतर बनाने के लिए हर प्राकृतिक जड़ी बुटियों का मिश्रण करता है । उनमे से अफीम भी एक है । जिनका सेवन अनुशासित खुराक में करना फायदेमंद होता है ।

  • अगस्ति सुतराज रस – यह दर्द नाश्क दवाओं मे से एक है । इसमे जड़ी बुटियों के साथ साथ नशीले पदार्थ जैसे भांग, अफीम, धतुरा आदि मुख्य रूप से मिश्रण किया गया हैं ।
  • कर्पुर रस – इस दवा का उपयोग दस्त, बुखार, जलन, चककर आना व कमजोरी के लिए किया जाता है । इसमे अफीम, जायफल, नागरमोथा, हिंगुल व इंद्र जो आदि का मिश्रण किया जाता हैं ।
  • कामिनी विद्रावण रस – इस दवा का उपयोग पुरुषो के गुप्त रोग जैसे वीर्य का पतलापन, धात रोग, नपुंसकता, भूख नहीं लग्ना आदि के लिए किया जाता हैं । इसमे हिंगुल, लौंग, जावित्री, पीपल, लाल चंदन के साथ शुद्ध अफीम का मिश्रण किया जाता हैं ।
  • जातिफलादी वटी (मधुमेह) – इस दवा का उपयोग भूख न लगना, प्यास लगने की प्रॉब्लम, बार बार पेशाब की प्रॉब्लम के साथ मधुमेह के लिए लाभकारी है । इस दवा मे जावित्री, जातिफल, जायफल, लौंग, केसर, धतूरे के बीज़, शिलाजीत के साथ अफीम का भी इस्तेमाल किया जाता है ।
  • निद्रोदय रस – यह दवा अनिंद्रा के लिए उपयोगी है । इसमे धाय के फुल, आवला, भांग व सहित अफीम का मिश्रण किया जाता हैं ।
  • महावातराज रस – यह दवा हिचकी, मधुमेह, खांसी, कफ जैसे रोगो के लिए लाभकारी है । जिसमे गंधक, पारा, लौह भस्म, दालचीनी, लौंग, जायफल, इलायची, कालिमिर्च सहित अफीम की मात्रा मिलाई जाती हैं ।
  • वीर्य स्तंभन वटी – यह दवा प्रजनन रोग जैसे धात रोग, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष आदि के लिए कारगर है । इसमे जायफल, लौंग, जावित्री, भीमसेनी कपुर, केसर सहित अफीम की मात्र दी जाती है । इनके अलावा अहिफेनासव नामक दवा मे भी अफीम का मिश्रण किया जाता हैं ।

अफीम युक्त आयुर्वेदिक दवा की सूची –

दवाओं मे अफीम का मिश्रण सामान्य प्रक्रिया है क्योकि इनके अभाव मे कुछ दवा प्रभावशाली नहीं होती है । जैसे नींद की कमी, शारीरिक शक्ति कम होना, प्रजनन संबंधित प्रॉब्लम आदि । कुछ दवाओं की सूची इस प्रकार है –

  • सुखद्मा पान क्वाथ – इसे 2 ग्राम गमीज, 1 ग्राम मिश्री के साथ 1 कप गर्म पानी में मिलाकर कीजिए।
  • यौवनाम्रित रसायन – यह आप 1 चम्मच दिन में दो बार गर्म दूध के साथ प्राप्त कर सकते हैं।
  • मोटी पठानी रसायन – इसे आप दिन में दो बार 1 चम्मच गर्म दूध के साथ ले सकते हैं।
  • मैंथोनीन टॉनिक – इसे आप रोजाना 10-15 बूंदें गर्म दूध के साथ ले सकते हैं।
  • भांग – इसे सुबह और शाम को 1-2 गोलियों की मात्रा में सेवन करें। यह शरीर को शांत करने और तनाव को कम करने में मदद करता है।
  • चंद्रभागा – इसे सुबह और शाम को 1-2 गोलियों की मात्रा में सेवन करें। यह शरीर को ठंडा और स्तिमानित रखने में मदद करता है।
  • मधुमेहर हर – इसे सुबह और शाम को 1-2 गोलियों की मात्रा में सेवन करें। यह शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • निर्मीसीहारि क्वाथ – इसे सुबह और शाम को 1-2 चम्मच की मात्रा के साथ गर्म पानी में मिलाकर सेवन करें। यह पाचन और अपच को सुधारने में मदद करता है।
  • कटुपार्णी – इसे सुबह और शाम को 1-2 गोलियों की मात्रा में सेवन करें। यह पाचन प्रणाली को सुधारने और अपच को कम करने में मदद करता है।

कृपया ध्यान दें कि अफीम युक्त दवाएं जातिवाद और विवादित हो सकती हैं और इनका नियमित या अवैध सेवन आपकी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, इन्हें केवल यदि एक आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या वैद्यक के मार्गदर्शन में उपयोग करें।

अफीम मिश्रित दवा का नाम – अफीम से बनने वाली दवाइयां –

आयुर्वेद की सार सहिंता जैसे आदि ग्रंथो मे 44 से अधिक अफीम मिलाने वाली औषधियों का वर्णन मिलता है । उन मे से कुछ मुख्य अफीम युक्त आयुर्वेदिक दवाओं के नाम हैं –

  • सरस्वती अरिश्ट (Saraswati Arishta)
  • अश्वगंधा रिष्ट (Ashwagandha Arishta)
  • ब्रह्मी रिष्ट (Brahmi Arishta)
  • संत्रिष्यादि चूर्ण (Shatavari Churna)
  • मेद्यासः चूर्ण (Medhyasaha Churna)
  • सोफीश दवाई (Sophis Medicamenta)
  • मुचुकुन्न दवा (Mucuna Medicamenta)
  • तालपर्णि रस (Talparni Ras)
  • मुकुलिता दवा (Mukulita Medicamenta)
  • त्रिफला घृत (Triphala Ghrit)

अंतिम शब्द – यह सभी दवायें मेददायक हो सकती हैं, लेकिन आपको सबसे पहले अपने चिकित्सक या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए, जो आपकी व्यक्तिगत स्थिति को देखने के बाद सही दवा और खुराक की सिफारिश कर सकते हैं।

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