दो महीने के शिशु देखभाल कैसे करें | 2 month baby care tips.

2 month baby care tips.

2 month baby care tips. माँ बनना ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है । प्रसव के बाद हमारे समक्ष सबसे बड़ी समस्या होती है कि बच्चे की देखभाल कैसे करे । बच्चा पहले महीने में ज्यादातर चिकित्सक की निगरानी में रहता है । लेकिन फिर हमें स्वयं बच्चे की हर हरकत पर नजर रखनी होती है।

दूसरे महीने से बच्चे में विकास होने लगता है, इसलिए हमें उसके हर मूवमेंट को नोटिस करना चाहिए । आज हम इस लेख में आपको बताएंगे कि 2 महीने के बच्चे की परवरिश कैसे करें । 2 month baby care tips in hindi.

Also read

नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें । Newborn baby care tips.

बच्चों में एनीमिया के लक्षण व बचाव । Anemia in children.

दो महीने के बच्चे को कितना दूध पिलाना चाहिए ?

नन्हे बच्चों के लिए माँ का दूध ही आहार होता है, इसलिए उन्हें दिन में 3 से 4 बार दूध पिलाना चाहिए ।दो महीने के बच्चे को नवजात शिशु की अपेक्षा ज्यादा भूख लगती है । रात को बच्चा आराम से सो जाएं, इसके लिए उन्हें रात को दूध पिलाना चाहिए । पेट भरने से बच्चा आराम से 6 से 7 घण्टे सो जाता है । अलग अलग बच्चे की खुराक अलग अलग होती है । किसी की कम तो किसी की ज्यादा ।

दो महीने के बच्चे का वजन कितना होता है ?

दो महीने के बच्चे विकास कर रहे होते हैं, तो उनकी औसत लम्बाई 23 इंच या 58.4 सेमी होती है । जबकि उनका वजन 5 या साढ़े 5 किलो के आसपास होता है ।

दो महीने के बच्चे को क्या खिलाना चाहिए ?

दो महीने के बच्चे को सारे पोषक तत्व माँ के दूध के जरिये ही मिल जाते है । और उन्हें कुछ खिलाने की जरुरत नही होती है । उन्हें केवल माँ का दूध ही दिया जाता है ।

दो महीने के बच्चे को कौन सा दूध पिलाएं ?

वैसे तो नवजात शिशु के लिए माँ का दूध ही सबसे सर्वोत्तम होता है । लेकिन यदि माँ को दूध नही आ रहा है या कम आ रहा है । तब गाय का दूध भी उपयोग कर सकते हैं ।

दो महीने के बच्चे का वजन कैसे बढ़ाएं ?

दो महीने के बच्चे का वजन पाँच या साढ़े पाँच किलो होता है । अगर आपके बच्चे का वजन कम है तो उसे आपकी ज्यादा दूध की जरूरत है । जिससे उसका वजन बढ़ सके । दो महीने का बच्चा इतना छोटा होता है कि उसे आप वजन बढ़ाने के लिए कुछ खाने भी नही दे सकते । केवल माँ के दूध से ही उनका वजन बढ़ता है । और माँ का दूध पौष्टिक तभी होगा, जब माँ पौष्टिक भोजन करें ।

स्तनपान कराने वाली माँ को क्या खाना चाहिए ?

माँ का दूध ही बच्चे के सम्पूर्ण विकास का कार्य करता है । और इसी से बच्चे की तंत्रिकाएं व इंद्रिया विकास करती है, इसलिए जरूरी है कि माँ ऐसा भोजन करे जिससे माँ के दूध के जरिये पौष्टिकता बच्चे को प्राप्त हो । माँ को क्या खाना चाहिए –
● प्रोटीन युक्त भोजन जैसे चावल, दाल, आलू, सूजी, रोटी और साबुत अनाज ।
● दूध और ब्रेड ।

● हरी पत्तेदार सब्जियां और फल ।
● आयरन, विटामिन डी, विटामिन सी, विटामिन ए और कैल्शियम युक्त पदार्थो का सेवन करना चाहिए ।
● मेवे खाने चाहिए ।
● अंकुरित अनाज खाने चाहिए ।
● अजवायन और अलसी खाने चाहिए ।
● तिल और सोंठ के आयुर्वेदिक लड्डू खाने चाहिए इत्यादि ।

मैं कैसे पता करूँ कि मेरे शिशु को मुझसे पर्याप्त दूध मिल रहा है या नहीं ?

इस बात का ठीक ठीक पता लगा पाना बहुत मुश्किल है, लेकिन यदि आप जानना चाहे तो जब बच्चे का पेट भर जाता है । तब वह दूध पीते समय स्तन से या बोतल से मुँह हटा लेता है । और यदि उसका पेट ना भरा हो । तब अगर आप उसे दूध पीने से छुड़वा देंगी तो वह रोने लगता है या फिर पेट ना भरने से सो नही पाता है ।

क्या दो महीने के बच्चे को पानी पिलाना चाहिए ?

बिलकुल नही, दो महीने के बच्चे को पानी बिलकुल भी नही पिलाना चाहिए । उन्हें सिर्फ और सिर्फ माँ का दूध पिलाना चाहिए । यदि किसी कारण से माँ का दूध उपलब्ध ना हो पाए । तो बच्चे को गाय का दूध पिलाना चाहिए । माँ का दूध और गाय का दूध दोनों ही बच्चे के विकास में सहायक होते हैं । बच्चे को 5-6 महीने के बाद ही पानी पिलाना चाहिए ।

नवजात शिशु की आवश्यकताएं क्या है ? 2 month baby care tips.

नवजात शिशु की प्रमुख तीन ही आवश्यकता होती है, एक दूध, दूसरा भरपूर नींद और तीसरा माँ का स्नेह । इसके अलावा भी कुछ अन्य आवश्यकता होती है जैसे, दवाइयां, मालिश, स्नान, मल मूत्र की साफ सफाई इत्यादि इत्यादि ।

दो महीने के शिशु की देखभाल कैसे करें ? 2 month baby care tips.

रोना – बच्चा जैसे जैसे बढ़ता है, उसकी तंत्रिकाएं भी विकसित होने लगती है । वह माँ को पहचानने लगता है, आसपास के वातावरण को और घर वालों को भी पहचानने लगता है । जब भूख लगती है, तब बच्चा उच्च स्वर में रोने लगता है ।

मानो बता रहा हो कि मुझे भूख लगी है माँ । माँ को पास बुलाने के लिए भी वह रोता है या किसी अनजाने चेहरे को देखकर भी रोता है । ऐसे में बच्चे को शांत कराने के लिए उन्हें सीने से चिपकाकर थपकियां देकर शांत करे जिससे वह सो जाये ।

आभास – बच्चा बढ़ता है, तब उसकी इंद्रिया भी विकसित होने लगती है। माँ को तो वह खुशबु से पहचान जाता है, इसलिए किसी और के पास जाता भी नही है। ऐसे में बच्चे को खेलने के लिए झुनझुना पकड़ा सकते हैं, ताकि वह शांत रहे।

2 महीने के बच्चे को नींद । 2 month baby care tips.

दो महीने के बच्चे को 9 से 12 घण्टे की नींद की जरूरत होती हैं। यदि उसकी नींद पुरी नही होगी तो वह रोने लगेगा और माँ को परेशान करेगा। इसलिए बच्चे को पर्याप्त नींद लेने दे।

स्तनपान – बच्चे को बार बार दूध की जरूरत होती है और वह रोकर बताता है कि उसे भूख लगी है। बढ़ते बच्चे को ज्यादा दूध की जरूरत होती है, इसलिए आप यह सुनिश्चित करे कि उसे सम्पूर्ण खुराक मिल सके, ताकि वह चैन से सो जाये।

लम्बाई और वजन – बच्चे की समय समय पर जाँच करवाते रहे, कि उनकी लम्बाई और वजन कितना है। सामान्य है, या कितना कम है, या कितना ज्यादा है।

टीका – यह एक मुख्य विषय वस्तु है, जिसका ध्यान आपको रखना ही चाहिए। प्रसव के दौरान ही चिकित्सक बता देते हैं कि बेबी को कौन से महीने में कौन से टीके लगेंगे। इसलिए समय पर शिशु को टीका जरूर लगवाए, जिससे वे बीमारियों से दूर रहें। टीके रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं।

दिनचर्या – बच्चे की दिनचर्या के अनुरूप ही अपनी दिनचर्या बना लें। जब बेबी आराम करें तो स्वयं भी आराम कर लें क्योंकि वह जग जायेगा तो आपको समय नही मिलेगा आराम का। और भी जो काम हो उसे बच्चे के सोने के दौरान ही पूर्ण कर लें।

दो महीने के शिशु की देखभाल कैसे करें । 2 month baby care tips.

दो महीने के बच्चे विकास की ओर अग्रसर होते है, इसलिए हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
◆ बच्चे के पास कोई भी धारदार या नुकीले चीज ना रखें।
◆ बच्चे के सोने के दौरान शोर ना करें, नही तो उसकी नींद पूरी नही हो पायेगी।
◆ ज्यादा समय तक बच्चे को भूखा ना रखे। उन्हें तुरंत दूध उपलब्ध करवाए।
◆ बच्चे को कड़े या फिटिंग वाले कपड़े ना पहनाये। आरामदायक कपड़ो का प्रयोग करे।

◆ बच्चे को एसी या कूलर के आगे ना रखे, इससे उन्हें नुकसान पहुंचता है। सर्दी लग जाती है।
● सुबह की धूप बच्चे पर पड़नी चाहिए, जिससे विटामिन डी मिल सके।
◆ सही समय पर चिकित्सक द्वारा दी गयी दवाइयों को बच्चे को खिलाये।
◆ पालतू जानवरों को भी बच्चे के पास ना आने दे, क्योंकि बच्चो की त्वचा बहुत नाजुक होती हैं और उन्हें जल्दी ही इन्फेक्शन या एलर्जी होने लगती है।

◆ बच्चे की हरकतों पर नजर रखें और कोई भी आशंका होने पर चिकित्सक को बताये।
◆ बच्चे की मालिश के समय सावधानी बरतें तथा हल्के व्यायाम भी करवाये।
◆ बच्चे, बच्चे की जगह और बच्चे की उपयोग की सम्पूर्ण वस्तुओं को साफ सुथरा रखे, यानि साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें।

2 month baby care tips for cold.

2 महीने के शिशु को सर्दी और खाँसी | 2 month baby care tips for cold.

नन्हे बच्चो को सर्दी और खाँसी की शिकायत जल्दी होती है। ऐसे में उन्हें शहद चटाने से खाँसी ठीक हो जाती है। मगर बच्चो के मामले में लापरवाही नही करनी चाहिए और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए एवं हरदम बच्चे की मॉनिटरिंग खुद करनी चाहिए।

सर्दी होने पर सरसो के तेल में लहसुन डालकर पका लें फिर ठंडी करके उस तेल से बच्चे की मालिश करने से सर्दी में बच्चे को आराम मिलता है। धूप दिखाने से भी लाभ होता है। इसके अलावा नारियल तेल को गर्म करके उससे बच्चे की छाती पर मालिश करने से भी लाभ मिलता है।

2 महीने के शिशु को इन्फेक्शन | 2 month baby care tips infection.

नन्हे बच्चो में स्किन इन्फेक्शन बहुत जल्दी हो जाता है, जिसके कारण बच्चों को जलन, खुजली हो जाती है। इससे बचने के लिए जरुरी है कि आप सही और साफ सुथरे चीजो का प्रयोग करें। ज्यादा देर गीली नैपी में ना रहने दे, तत्काल बदल लें। डायपर का उपयोग भी ज्यादा ना करे, इससे भी खुजली और रैशेज हो जाते हैं।

दो महीने के बच्चे को कौन से टीके लगते हैं ?

दो महीने के बच्चे को निम्न टीके लगते हैं-
● डिप्थीरिया, टेटनस और कालीखांसी के टीके की पाँच दोस दी जाती हैं, जिसकी पहली खुराक दो महीने में देते हैं।
● हेपेटाइटिस बी के टीके की पहली खुराक भी दो महीने में दी जाती है।
● प्रेक्नार या पीसीओ 13 की चार खुराक में पहली खुराक दो महीने में दी जाती हैं।
● रोटावायरस के तीन खुराक में पहली खुराक दी जाती है।
● इसके अलावा पोलियो की भी टीका की खुराक दी जाती हैं।

इस तरह दो महीने के बच्चे को काफी निगरानी और ध्यान की जरूरत होती हैं । और इसके माँ का स्वस्थ होना भी जरुरी है, ताकि वे अपने शिशु का पुरा ध्यान रख सकें । माँ को चाहिए कि वे भरपूर आहार लें और आराम करें । जिससे शिशु को संभालने में कोई दिक्कत ना हो । बच्चे की परवरिश करना कोई आम बात नही होती । इसे इस हालत में पहुँचकर ही समझा जा सकता है, कि क्या कैसे करना चाहिये । बाकि तो उपरोक्त बातों का ध्यान रख सकती हैं ।। शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ छत्तीसगढ़ ।।