अस्थमा ( दमा ) के कारण, लक्षण व इलाज । Symptoms of asthama in hindi.

Symptoms of asthama in hindi.


 Asthama in hindi. ( दमा ) यानि श्वसन मार्ग में सूजन होना । अस्थमा में व्यक्ति के श्वसनमार्गी का में संकीर्ण सूजन हो जाती हैं । जिससे अतिरिक्त बलगम का निर्माण होता है और सांस लेने में तकलीफ होती हैं । इसके कारण व्यक्ति को शारीरिक क्रिया कर पाना मुश्किल हो जाता है।

एक शोध के अनुसार भारत में asthama मरीज़ों की संख्या काफी ज्यादा है । आमतौर पर यह प्रॉब्लम बुजुर्गों में पाई जाती है । लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकती है । जब भी मौसम में बदलाव होता है तब Asthama attack के चांस बढ़ जाते है । तो आइए जानते है symptoms of Asthama in hindi.  –

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अस्थमा का अर्थ | What is Asthama in hindi. ?

अस्थमा को दमा भी कहते हैं। श्वासन मार्ग में सूजन आकर सांस लेने में तकलीफ निर्माण करता है । मांसपेशियां कस जाती है । वायु मार्ग में बलगम भर जाता है। जिससे इंसान को घरघराहत, खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। सांस लेते समय इंसान के मुंह से सिटी या फुसफुसाहट की आवाज सुनाई देती है ।

अगर Asthama का रोगी किसी एक वस्तु या पदार्थों के संपर्क में आता है । जिससे उसे एलर्जी हो या वह संवेदनशील हो तो सांस लेने में उसे तकलीफ शुरू हो जाती हैं ।
Asthama श्वसन मार्गिका में सूजन होने से पैदा होता है श्वसन मार्गिका का काम फेफड़ों से हवा को अंदर लेना और बाहर छोड़ना होता है। परंतु अस्थमा के कारण इस मार्ग में सूजन आती है । यह मार्ग सिकुड़ जाता है। जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है ।

किसी व्यक्ति के लिए Asthama एक मामूली बीमारी है, तो किसी व्यक्ति के लिए बड़ी समस्या बन जाती है । जो उनके दैनिक जीवन की गतिविधियों में बाधा लाती है। वैसे अस्थमा का कोई इलाज नहीं है । पर इसके लक्षणों को जानकर उसे नियंत्रित कर सकते हैं । अस्थमा के लक्षण बदलते मौसम के साथ बदलते रहते हैं। इसलिए डॉक्टर के संपर्क में रहकर हम इसका इलाज कर सकते हैं।

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अस्थमा के लक्षण | Symptoms of asthama in hindi.


Asthama के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं अस्थमा से पीड़ित हर कोई लक्षणों को अनुभव नहीं करता आपको किस प्रकार का अस्थमा है यह उसके लक्षणों पर ही निर्भर करता है । तो चलिए जानते symptoms of asthama के बारे में –

◆ सांस लेने में तकलीफ होती है ।
◆ सीने में घरघराहट के कारण सांस लेने में परेशानी होती है। सीने में दर्द होता है। सांस लेते वक्त या छोड़ते वक्त एक सीटी जैसी आवाज निकलती है।
◆ मौसम बदलने पर सर्दी खांसी का होना ।
◆ श्वसन मार्ग में संसर्ग होना ।
◆ अस्थमा आने से पहले कुछ हमें वह संकेत देता है ।

Symptoms of asthama in adults. बुजुर्गों में अस्थमा के लक्षण –


◆ जैसे बार-बार सांस लेने में कठिनाई होना । आप बार-बार इन इनहेलर का इस्तेमाल करने लगते हैं या उसकी जरूरत अस्थमा पीड़ित को महसूस होती हैं। बार-बार इन इनहेलर का इस्तेमाल करके भी राहत नहीं मिलती ।
◆ शारीरिक क्रियाएं यानी हाल-चाल अधिक नहीं कर पाते । एक जगह बैठे रहने पर सांस लेने में परेशानी होती है । थकान महसूस होती है ।

◆ बात करने में कठिनाइयां हो जाती है।
◆ अगर Asthama पीड़ित व्यक्ति किसी धुए से धूल मिट्टी से या किसी सुगंधित स्प्रे के संपर्क में आ गया तो उसे अस्थमा का अटैक आने की चांस अधिक होते हैं । उन्हें सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाती हैं ।

◆ अगर किसी के घर में बिल्ली या कुत्ते जैसे जानवर हैं, तो उनकी जो फर होती हैं । उनके संपर्क में आने से भी उन्हें अस्थमा होने के चांस दिखाई देते हैं सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाती हैं। हमें अस्थमा के लक्षणों का जानना है और symptoms of asthma को पहनाचान कर तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

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अस्थमा होने के कारण । Cause of asthama in hindi.


अस्थमा सभी को नहीं होता । कुछ कुछ लोगों को ही अस्थमा होता है । पर्यावरण या वातावरण में बदल होने से भी होता है । कभी एलर्जी के कारण भी हो सकता है तो चलिए जानते Asthama kr karan –
◆ अनुवांशिकता के कारण यानी अनुवांशिकता यानी माता पिता या भाई भाई बहन को अस्थमा हो तो अस्थमा होने के चांस अधिक होते हैं ।

◆ वायरल संक्रमण बचपन में जिसको जल्दी से संक्रमण पकड़ लेता है उसकी इम्यूनिटी पावर कम हो जाती है । जिसके कारण उसे अस्थमा होने के चांस अधिक होते हैं उनकी बचपन में ही इम्यूनिटी कम हो जाती है।
◆ अस्थमा को ट्रिगर करने के कुछ कारण, हर इंसान के शरीर में अलग होते हैं ।

Asthama kr karan in hindi.

◆ वातावरण के बीच मंडराते वायु का यानी धूल कण, तिलचट्टे या कचरे के संपर्क में आने से अस्थमा होने का धोखा बढ़ जाता है ।

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◆ श्वसन मार्ग संक्रमित होना। श्वसन मार्ग संक्रमित हो जाने से खांसी सर्दी हो जाना।
◆ वातावरण में बदलाव आ जाने से अस्थमा पीड़ित को खांसी सर्दी हो जाती है । ठंडी हवा के संपर्क में आने से अस्थमा बढ़ जाता है ।

◆ वायु प्रदूषण जिसमें धूम्रपान करने वालों या कचरा एवं अन्य चीजों के जलने या वाहनों के धुएं के संपर्क में आने से । अधिक तनाव होने की वजह से ।
◆ प्रिजर्वेटिव खाद्य पदार्थ या पेय जल से अस्थमा ट्रिगर हो सकता है । उदाहरण झिंगा, प्रोस्टेट आलू , बीयर या शराब आदि को अधिक लेने से अस्थमा ट्रिगर हो सकता है ।

◆ गैस्ट्रो सोफेजियाल रिफ्लेक्स बीमारी की वजह से भी अस्थमा ट्रिगर हो जाता है ।
◆ कुछ दवा की एलर्जी की वजह से अस्थमा का ट्रिगर होता है जैसे बीटा ब्लॉकर्स, एस्पिरिन, इबुप्रोफेन और नेप्रोक्सन ऐसी दवा के इस्तेमाल करने पर अस्थमा ट्रिगर हो जाता है।


अस्थमा के प्रकार । Type of asthama in hindi.


अस्थमा के प्रकार तो कई है । पर अस्थमा को दो प्रकार में बांटा गया है। 1. एलर्जी अस्थमा और 2. नॉन एलर्जी अस्थमा।


एलर्जी अस्थमा | Allergy Asthma in hindi.

जिसके नाम से ही हमें पता चलता है कि अस्थमा किसी प्रकार की एलर्जी के संपर्क में आने के कारण होता है । यदि किसी सुगंधित स्प्रे या धूल मिट्टी के संपर्क में आने से या हमें किसी चीज की एलर्जी है, तो हमारी सांस फूलने लगती हैं ।

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नॉन एलर्जी अस्थमा | Non Allergy Asthma in hindi.

इस अस्थमा में मरीज को एलर्जी नहीं होती । परंतु वातावरण के बदलाव के कारण, तनाव के कारण या अधिक ठंडी या खांसी सर्दी जैसी बीमारी । हवा में प्रदूषण या कुछ दवा के कारण अस्थमा हो जाता है। नॉन एलर्जी अस्थमा में ऑक्यूपेशनल अस्थमा, पेरिनियल अस्थमा, सीजनल अस्थमा आदी प्रकार आते हैं ।


सीजनल अस्थमा

यह किसी मौसम के आने पर उस ऋतु के अनुसार बढ़ता है । सीजनल अस्थमा साल भर नहीं होता वह ऋतु के बदलने पर ही उभरता है । ऑक्यूपेशनल अस्थमा से में जो व्यक्ति कारखानों में काम करता है या कारखानों के धुए में काम करता है उन्हें होता है । उदाहरण कपास काटने वाले लोग।

अस्थमा का निदान कैसे किया जाता हैं । Asthama ka ilaj –


Asthama का निदान तीन विभागों में किया जाता है ।

1. रोगी की मेडिकल हिस्ट्री – जिसमें डॉक्टर यह जाना लेते है की घर उनके परिवार में किसी को अस्थमा हुआ है या नहीं ।

2. फिजिकल टेस्ट – इसमें डॉक्टर आत्मा पीड़ित की शारिरिक परीक्षण करता है ।

3. स्वास्थ्य परीक्षण – इसमें डॉक्टर श्वास परीक्षण करता है ।

इन तीनों चीजों का परीक्षण कर डॉक्टर अस्थमा का स्वरूप कैसा है यह बताता है उस व्यक्ति में अस्थमा की शुरुआत है, अस्थमा अनियमित हैं या गंभीर स्वरूप का है यह डॉक्टर उस व्यक्ति की स्थिति या लक्षण को देखकर तय करता है और दवा देना शुरू करता है इस तरह अस्थमा का निदान किया जाता है ।

Asthama ka ilaj


अस्थमा से बचने के लिए कुछ सुझाव | symptoms of Asthama in hindi.


अस्थमा का कोई इलाज नहीं है। पर नियमित जांच पड़ताल और डॉक्टर के साथ मिलकर हम इसके लक्षणों और अस्थमा के अटैक को रोक सकते हैं । या कम कर सकते हैं । symptoms of asthama.


अस्थमा एक्शन प्लान का पालन करें – अस्थमा एक्शन प्लान यानि हमें अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह से अपना दैनिक रूटीन बनाना है । उस दैनिक रूटीन के अनुसार अपने रोजाना जीवन के व्यवहार करने हैं । और उसका पालन करना है ।


अस्थमा में नियमित जांच या इलाज करना जरूरी है । अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की दिए गए सलाह का पालन करना है । डाक्टर ने दिए नियमों का पालन करो जिससे अस्थमा नियंत्रण में ला सकते हैं ।


इनफ्लुएंजा और निमोनिया का टीका करण

आपको अगर बार बार खांसी सर्दी होती है। जिससे गले में घरघराआहट या सूजन या सांस लेने में परेशानी होती है । तो निमोनिया या इनफ्लुएंजा का टीका लगवा लेना चाहिए जिससे सर्दी खांसी से आने वाला अस्थमा का ट्रिगर हम रोक सकते हैं ।


● अस्थमा के ट्रिगर को पहचाने या लक्षण ( symptoms of Asthama ) को पहचाने वातावरण में बदलाव के कारण, अधिक ठंड के कारण या वायु प्रदूषण के कारण अगर आपको अस्थमा का दौरा पड़ जाता है । उसे परेशानी होती है। वातावरण में होने वाले बदलाव को पहचान कर अस्थमा के उपाय पहले से ही करें, तो अस्थमा को ट्रिगर होने से बचा सकते हैं ।

अस्थमा से कैसे बचें । Asthama se kaise bache.


● सांस लेने की गतिविधियों पर ध्यान रखें खांसी गले में घबराहट या सांस लेने में तकलीफ होती है । इनमें से कोई भी संकेत अगर आपको मिलता है , तो उसे पहचान पर अस्थमा होने से रोक सकते हैं ।


● अस्थमा के दौरे को पहचानिए कौन सी परेशानी से अस्थमा होता है । यह जान लीजिए और उस लक्षणों को जानकर डॉक्टर से सलाह मशवरा कर क्या इलाज कर बचने की कोशिश करें तो अस्थमा का ट्रिगर होने से बच सकते हैं ।

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● दवाइयां समर पर समय पर ले दवा लेते दवा लेने से अगर अस्थमा ठिक हो रहा है । तो उसे नियमित रूप से लेना चाहिए। डॉक्टर को बिना पूछे कोई भी दवा बंद नहीं करनी चाहिए । डॉक्टर के पास जब जब जाएंगे तो दवा का पेपर लेकर जाएं । ताकि डॉक्टर को पता चले आप कौन सी दवा खाते हैं । या कौन सी दवा बंद करनी है । आपको कौन सी दवा सूट हो रही है । अपने आप अपनी बुद्धि से कोई भी दवा बंद मत कीजिए ।


● इनहेलर का प्रयोग कीजिए अगर आपको बार-बार इनहेलर का प्रयोग करना पड़ रहा है, तो आप ठीक नहीं है। आपको डॉक्टर के पास जाकर दवा लेनी चाहिए बार-बार इनहेलर का प्रयोग करना अच्छा नहीं है।


● बारीश, सर्दी, धूल भरी जगह जाने से बचना चाहिए एवं घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाए ।
● ताजा पेंट, सुगंधित स्प्रे या कीटकनाशक स्प्रे से बचे।
● धूम्रपान वाले व्यक्ति से बचे ।
● अपनी आहार शैली में बदल कीजिए ।

अस्थमा के घरेलू उपाय | Home remedies of asthama in hindi.


Asthama से बचने के लिए घर पर ही हमें कुछ नियमों का पालन करना चाहिए । घर में धुआं ना करें । घर में अगर पालतू प्राणी हो तो उनके गिरने वाले छोटे छोटे बालों से बचे। घर में धूल मिट्टी बैठने ना दें । साफ सफाई करते वक्त मुंह को अच्छे से ढंग दे ।या अन्य किसी से साफ सफाई करवा ले। आयुर्वेदा में भी कुछ घरेलू अस्थमा के लिए उपचार पद्धति बताई है।


सरसों का तेल से अस्थमा का इलाज । 

सरसों के तेल में 3/ 4 कपूर का चुराकर डालें ।सरसों के तेल को फिर गर्म कर ले। गुनगुने सरसों के तेल के इस मिश्रण को जब तक अस्थमा ठीक नहीं होता तब तक अपने सीने पर रगड़ कर मलते रहना है । धीरे धीरे अस्थमा से राहत मिल जाती है।


नीलगिरी का तेल से अस्थमा का इलाज ।

नीलगिरी का तेल सर्दी खांसी में राहत दिलाता है । वैसे ही यह अस्थमा में भी काम आता है । नीलगिरी का तेल श्वसन मार्गिका को खुली करता है । एक कटोरे में गर्म पानी लेकर उसमें चार या पांच बूंदे नीलगिरी तेल के डाले और सिर पर एक कपड़ा ओढ़े ओर अच्छे से भाप ले । जिससे श्वसन के मार्ग में आने वाली बाधाएं खुल जाएगी और अस्थमा से राहत मिलेगी ।


अदरक से अस्थमा का इलाज । Adrak se asthama ka ilaaj.

अदरक सभी के घर में होता है । सर्दी खांसी होने पर अदरक का जूस निकालकर उसमें थोड़ी हल्दी और शहद मिलाकर मिश्रण बनाकर पीने से या चांट लेने से खांसी सर्दी जल्दी से ठीक हो जाती है । ऐसे ही अस्थमा से बचने के लिए अदरक , अमरूद, अनार का सम प्रमाण लेकर औषधि बना ले । इसे रोजाना दिन में दो से तीन बार सेवन करने से अस्थमा से राहत मिल जाएगी ।


कॉफी से अस्थमा का इलाज । coffee se asthama ka ilaaj.

कॉफी में मौजूद कैफिन अस्थमा के लिए महत्वपूर्ण काम करता है । यह नाक से श्वसन मार्ग को साफ करता है ।जिससे सांस लेने में आसानी होती है।


लहसुन से अस्थमा का इलाज । Lahsun se asthama ka ilaj.

30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां डाल कर, उसको अच्छे से उबाल कर लीजिए। ठंडे होने पर इस मिश्रण को हर रोज पीना है । लहसुन लाभदायक है । वैसे ही हल्दी और दूध मिक्स करके पीने पर भी लाभ मिलता है। हमारा पिछला लेख पढ़ें – लहसुन खाने के फायदे


अस्थमा पीड़ित के लिए आहार |Diet of Asthma in hindi.


जब हम अस्थमा के लिए आयुर्वेद के अनुसार घरेलू उपचार देखते हैं । तो हमें आहार पर भी ध्यान देना चाहिए । हमारे आहार में रोजाना हरी सब्जियों का भी सेवन करना चाहिए। हमें हफ्ते में एक बार गाजर का रस पीना चाहिए। शहद का भी सेवन करना चाहिए । आहार में लहसुन, अदरक, हल्दी, काली मिर्च को शामिल करना चाहिए। खाना खाने के बाद गुनगुने पानी का सेवन भी करना चाहिए।

अस्थमा पीड़ित के लिए खाने में परहेज | Asthama ke parhej –


क्या नही खाना चाहिए ।
अस्थमा पीड़ित को मछली, मांस, तैलीय पदार्थ, अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए ।

अस्थमा पीड़ित को फ्रिज का ठंडा पानी, दही का सेवन भी नहीं करना चाहिए ।

कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों का सेवन ना करें तो अच्छा है ।

समय पर खाना चाहिए और समय पर सोना चाहिए।


अस्थमा पीड़ित की जीवन शैली | symptoms of Asthama in hindi. –


अस्थमा पीड़ित को नियमित व्यायाम करना चाहिए । उसे प्राणायाम, सूर्य नमस्कार योगा की प्रकार करना चाहिए । ठंडे या नमी युक्त वातावरण में ज्यादा देर तक नहीं रुकना है । गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए । अगर सांस लेने में तकलीफ होती है, तो अधिक व्यायाम ना करें तो अच्छा है । अपने जीवन शैली को सुनियोजित रखने के लिए अस्थमा से बचने के लिए अस्थमा एक्शन प्लान बनाना चाहिए और उसका पालन भी करना चाहिए । तो हम अपने जीवन को बड़ी आसानी से सुंदर तरीके से हंसते हुए जी सकते हैं ।

आयुर्वेद के अनुसार Asthama का उपचार करते समय अस्थमा पीड़ित को अपनी आहार शैली में बदल करना पड़ता है । उन्हें अपने खान-पान पर नियंत्रण रखना पड़ता है । कुछ आदतों को बदलना पड़ता है । कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है । आयुर्वेद की दवाओं को सही समय पर खाना पड़ता है । तथा कुछ उन्होंने बताई हुई चीजों को परहेज भी करना पड़ता है । तभी इसका असर दिखाई पड़ता है ।


अस्थमा उपचार के बाद के दिशा निर्देश क्या है ? Symptoms of Asthama in hindi.


अस्थमा एक लाइलाज बीमारी है । इससे बचने के लिए उपचार के दौरान उस व्यक्ति को ही अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की जरूरत है । उसे अगर वातावरण के बदल से अस्थमा ट्रीगर होता है । तो उस बदलाव से पहले अपने आप को सुरक्षित रखना है ।

अगर उसे खांसी सर्दी से अस्थमा ट्रिगर होता है तो पहले ही इनफ्लुएंजा वैक्सीन लेकर अपने आप को अस्थमा होने से रोकना है। उसे धूम्रपान करना छोड़ना है । अगर कोई महिला है, तो धूम्रपान करने वालों से दूर रहना है । धूल मिट्टी के संपर्क से बचना है । अगर अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव कर उस पर अमल किया जाए तो यकीनन अस्थमा पीड़ित अस्थमा से दूर रह सकते हैं |

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