साइटिका के कारण, लक्षण एवं इलाज | sciatic nerve pain relief in hindi

sciatic nerve pain relief in hindi.

sciatic nerve pain in hindi. साइटिक हमारे शरीर की बड़ी तंत्रिका है जो रीढ़ की हड्डी से लेकर इनकी शाखा दोनो पैरो के घुटनों तक जाती है । इन शाखाओं में किसी प्रकार खिंचाव या तनाव उत्पन्न होने पर दर्द होता है । यह दर्द एक पैर में या पैरो में हो सकता है । अगर किसी महिला या पुरूष की उन नसों में सूजन आ जाए जो कमर के हिस्से से जुड़ी हैं और इसके साथ ही कटिस्नायुशूल पैरों में बहुत अधिक दर्द होने लगे तब इसी को हम साइटिका/ Sciatica कहेगें।


साइटिका का दर्द काफी तेज होता है । कभी कभी पैर सुन हो जाता है । उठने बैठने की तकलीफ के साथ साथ सन्नाटे जैसा तेज दर्द का सामना करना पड़ता है । नियमित रूप से योग – व्यायाम करने के साथ साथ योग्य चिकित्सक से ट्रीटमेंट लेकर बचा जा सकता है । साइटिका का दर्द पैर में होता है । आमतौर पर 40 वर्ष की उम्र के बाद के लोगों में अधिक पाया जाता है । तो चलिए जानते है | sciatic nerve pain के बारे में –

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साइटिका या कटिस्नायुशूल दर्द क्या है ? What sciatic nerve pain.


आमतौर पर यह दर्द समय के साथ बिगड़ सकता है और दुर्बल करने वाला भी हो सकता है। यह दर्द लंबे समय तक भी रह सकता है और कुछ मुद्राओं व्यायामों और दवाओं से राहत मिल सकती है।


साइटिका क्या है । What is sciatica –


Sciatica is a severe pain in the nerve in your legs or the lower part of your back. यानी साइटिका एक ऐसा गम्भीर दर्द है जो पैर में होता है । बहुत तेज पीठ दर्द भी हो सकता है ।

कटिस्नायुशूल रेडिकुलोपैथी है –
रेडिकुलोपैथी रीढ़ की हड्डी की जड़ (मूलों) के संपीड़न के कारण होने वाले दर्द को संदर्भित करता है। कटिस्नायुशूल तब होता है जब L4 से S3 तक की एक या अधिक तंत्रिका जड़ें हर्नियेटेड डिस्क, स्टेनोसिस या अध: पतन जैसी स्थितियों के कारण चिड़चिड़ी या संकुचित होती हैं। कटिस्नायुशूल तंत्रिका जड़ से रेडिकुलर दर्द आमतौर पर जांघ, पिंडलियों और पैर में समस्या के वास्तविक स्रोत से दूर होता महसूस होता है।

साइटिका के लक्षण – sciatica symptoms

कमर के निचले हिस्से में दर्द – साइटिका का मुख्य लक्षण जो हम अक्सर नज़र अंदाज़ कर देते हैं वह है कमर के निचले हिस्से में दर्द का होना सायटिका ( sciatic nerve pain ) हो सकता है।

पैर के दर्द का बढना – उठते बैठते समय पैर का दर्द बढ़ जाना भी इसका एक लक्षण है।

कूल्हे में दर्द होना – कूल्हे में हल्का या तेज़ दर्द होना भी सायटिका का लक्षण माना जा सकता है।
 
पैर के नीचे जलन या मरोड़ होना – अगर कभी किसी सामान्य व्यक्ति के पैर के नीचे जलन या मरोड़ महसूस होती है तो तुरंत डाक्टर को दिखाए हो सकता है कि यह भी सायटिका का लक्षण हो।

◆ पैरों का सुन्न होना – पैरों का सुन्न हो जाना भी साइटिका का एक लक्षण है।

चलने में तकलीफ़ होना – चलने में बेहद तकलीफ़ होती है। इसे नज़रअंदाज़ करना नुक़सानदेह साबित हो सकता है।

दर्द की प्रकृति व कुछ अन्य लक्षण – sciatic nerve pain.


अन्य प्रकार के दर्द के कुछ उदाहरण जिन्हें महसूस किया जा सकता है उनमें शामिल हैं:

  1. बिजली के झटके की तरह, शूटिंग दर्द धड़कते या धड़कने वाला दर्द, लगातार सुस्त दर्द, बेचैनी जो आती और जाती है | शायद ही कभी, कटिस्नायुशूल दोनों पैरों को एक साथ प्रभावित कर सकता है। दाएं और बाएं पैर के बीच बारी-बारी से दर्द होना ( sciatic nerve pain ) संभव है।
  2. कटिस्नायुशूल तंत्रिका और इसकी शाखाओं के पथ के साथ कटिस्नायुशूल दर्द होता है। आमतौर पर, जांघ और/या पैर का पिछला और बाहरी हिस्सा प्रभावित होता है। अन्य संभावित क्षेत्र जो कटिस्नायुशूल दर्द से प्रभावित हो सकते हैं वे हैं:
  3. कमर का निचला हिस्सा, जांघ या पैर के सामने, पैर का ऊपरी और बाहरी भाग, पैर का सोल, पहले और दूसरे पैर की उंगलियों के बीच का भाग कटिस्नायुशूल में, पैर दर्द आमतौर पर पीठ दर्द से अधिक गंभीर होता है।

स्नायविक लक्षण जो साइटिका दर्द ( sciatic nerve pain ) के साथ हो सकते हैं –


जब कटिस्नायुशूल तंत्रिका संकुचित होती है, तो दर्द के साथ एक या अधिक तंत्रिका संबंधी लक्षण हो सकते हैं।
सहवर्ती लक्षणों के कुछ उदाहरणों में शामिल हैं –

जांघ की मांसपेशियों में कमजोरी – जब जांघ की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं, तो जांघों को एक साथ लाने का प्रयास करते समय कमजोरी महसूस हो सकती है।


पैर और पैर की मांसपेशियों में कमजोरी – जब पैर की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं, तो घुटने को मोड़ने का प्रयास करते समय या पैर और/या पैर की उंगलियों को ऊपर और/या नीचे की ओर इशारा करते समय कमजोरी हो सकती है। इन मुद्दों के परिणामस्वरूप पैर गिर सकता है – चलते समय पैर के सामने के हिस्से को उठाने में कठिनाई। बैठने की स्थिति से उठने या टिपटो पर चलने का प्रयास करने में भी कठिनाई हो सकती है।

फुट ड्रॉप लक्षण, स्टेपपेज चाल और सुन्न होना – संवेदना का कम होना तब हो सकता है जब तंत्रिका आवेग कटिस्नायुशूल तंत्रिका से गुजरने में सक्षम नहीं होते हैं। स्तब्ध हो जाना से प्रभावित आम क्षेत्रों में पिंडलियों और/या एड़ी, एकमात्र, और/या पैर के ऊपर की तरफ होते हैं।

पेरेस्टेसिया, अनुचित तंत्रिका चालन के कारण त्वचा पर एक असामान्य सनसनी महसूस हुई। इस सनसनी में झुनझुनी, जकड़न, पिन – और – सुई, और/या जांघ और/या पैर के पीछे रेंगने की भावना शामिल हो सकती है | न्यूरोलॉजिकल लक्षणों के परिणामस्वरूप प्रभावित पैर का कार्य कम हो सकता है और यह तब अधिक सामान्य होता है जब कटिस्नायुशूल तंत्रिका संकुचित होती है।

साइटिका का दर्द ( sciatic nerve pain ) गम्भीर होता है या दर्द में अचानक वृद्धि होती है –


आंत्र और/या मूत्राशय पर नियंत्रण की कमी होती है, कटिस्नायुशूल दर्द बुखार, मतली और/या वजन घटाने के साथ होता है | ये लक्षण गंभीर अंतर्निहित स्थितियों जैसे कॉडा इक्विना सिंड्रोम, संक्रमण, या स्पाइनल ट्यूमर का संकेत दे सकते हैं।
आमतौर पर, सटीक निदान के लिए कुशल चिकित्सक से परामर्श करना सबसे अच्छा होता है, क्योंकि कई प्रकार की समस्याएं सियाटिक तंत्रिका को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे लक्षण हो सकते हैं। उपचार जो केवल लक्षणों से राहत देने वाले दृष्टिकोण के बजाय कटिस्नायुशूल के लक्षणों के अंतर्निहित कारण को लक्षित करते हैं, दीर्घकालिक दर्द समाधान के लिए सबसे प्रभावी होंगे।

सायटिका दर्द के कारण – cause of sciatica.

सायटिका नस का दबना – सायटिका दर्द ( sciatic nerve pain ) का प्रमुख कारण सायटिका नस का दबना है। जिसके लिए डॉक्टर की सहायता पड़ती है।

वजन का अधिक होना – साइटिका का खतरा उन लोगों में बहुत अधिक हो जाता है जिनका वजन अधिक होता है। लोगों को अपना वजन कम करने की कोशिश करनी चाहिए इससे उन्हें सायटिका के दर्द की समस्या नहीं होगी।

एक जगह पर काफी देर तक बैठना – यदि कोई व्यक्ति या महिला एक ही स्थान पर काफी देर तक बैठते है, तो उन्हें सायटिका दर्द हो सकता है।

बैठने की गलत मुद्रा – बैठने की गलत मुद्रा की वजह सायटिका का दर्द की प्रॉब्लम हो सकती है ।

डायबिटीज से पीड़ित होना – जो डायबिटीज से पीड़ित हैं उन्हें भी साइटिका का दर्द हो सकता है।

दर्द की अवधि अधिक होना – यदि दर्द की अवधि 8 सप्ताह से कम है, तो इसे तीव्र साइटिका कहा जाता है। 8 सप्ताह से अधिक की दर्द अवधि को क्रोनिक कटिस्नायुशूल के रूप में कहा जाता है ।

साइटिका का इलाज – sciatic nerve pain relief in hindi.

साइटिका का फिजिओथेरेपी से इलाज संभव है, आप कुशल चिकित्सक से मिलें, इलाज करायें | कीवा न्यूरो केयर, सीटीएमडी, एन्टी पेन आयल का प्रयोग कर सकते हैं | इनके अलावा sciatic nerve pain का इलाज इस प्रकार है –


अल्ट्रासाउंड / Ultrasound – इसके तहत परिसंचरण की प्रक्रिया में धीरे धीरे में सुधार करके मांसपेशियों में गर्मास देकर कठोर मांसपेशियों को sciatic nerve pain relief दिया जाता है ।


ट्रांसक्यूटेशनल इलेक्ट्रिकल तंत्रिका उत्तेजना ( TENS ) – इस प्रक्रिया द्वारा कुछ केसेस में इलेक्ट्रिकल द्वारा नियंत्रित मात्रा का उपयोग करते हुए तीव्रता और मांसपेशी स्पैस्म कम होने के चांसेस रहते हैं।


Nerve Gliding Activities – इस प्रकार की प्रक्रिया में एक्सकरसाइज द्वारा आपके तंत्रिकाओ में बदलाव करके उन्हे ग्लाइड करते हैं। ये नर्व ग्लाइडिंग साइटिक नर्व को आसानी से आगे बढ़ने में सहयोगी होते है जब आप जोड़ों को सीधा एवं उन्हें झुकाते हैं।


◆ रीढ़ की हड्डी स्थिरीकरण एवं मुद्रा सुधार – इस प्रॉसेस के अंतर्गत कोर मांसपेशियों पर ध्यान केंद्रित करके आपके पेट की मांसपेशियों और निचले हिस्से जो उचित मुद्रा सुधार के लिए जरूरी हैं। जिसे sciatic nerve pain से आराम मिलेगा ।

साइटिका के लिए योग – sciatica excise


साइटिका एक ऐसा दर्द है जो एक पैर में होता है । sciatic nerve pain जो तनाव व सूजन की वजह से दर्द होता है । इस समस्या निजात पाने के लिए योग या एक्सकरसाइज का सहारा ले सकते है । तो चलिए जानते है एक्सकरसाइज के बारे –

भुजंगासन

भुजंगासन एक ऐसा आसन है जो शरीर के ऊपरी भाग को सांप जैसे लिपटाया जाता है । यह आसन थायराइड, पेट की चर्बी को कम करने के साथ साथ sciatic nerve pain के लिए भी फायदेमंद है ।
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेटकर दोनो पैरो के बीच की दूरी कम रखे । अब सांस लेते हुए शरीर के ऊपर तक ले जाए । ध्यान रखें कि कमर में ज्यादा तनाव न हो ओर क्षमतानुसार इस मुद्रा को बनाए रखें ।

अपानासन योग

इस आसन को पवनमुक्तासन भी कहा जा सकता है । यह साइटिका दर्द के साथ होने वाली सुन्न की प्रॉब्लम से निजात मिल सकती है । यह आसन एसिडिटी के साथ साथ साइटिका ( sciatic nerve pain ) के लिए बहुत ही लाभदायक है । यह आसन ब्लड प्रेशर के लिए भी उपयोगी है ।


इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट कर दोनो पैरो को ऊपर उठाकर घुटनों को छाती पर ले आए । अगले स्टेप में ठोडी को घुटनों से सिर उठाकर टच करे । इसके पश्चात घुटनों को मोड़कर बाहों को घेर ले । कुछ देर यथा स्थिति में बने हुए रहे बाद सांस छोड़ते हुए पैरो को सीधा करे ।

अधोमुख श्वान आसन

यह आसन भी sciatic nerve pain relif के लिए बहुत उपयोगी है । इस आसन को करने के लिए सबसे पहले दोनो हाथों व घुटनों के बल लेटकर बॉडी के पिछले हिस्से को ऊपर उठाएं । अगले स्टेप में हथेलियों पर रहकर पैरो को सीधा कर लीजिए । यह प्रक्रिया 3 से 5 मिनट तक दोहराए ।

शलभासन योग

इस आसन को सबसे बड़ा फायदा यह है कि कब्ज प्रॉब्लम से निजात दिलाने के साथ साथ कंधों को भी स्ट्रांग करता है । इतना ही नहीं साइटिका sciatic nerve pain relif के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी है । इसे पीठ दर्द से राहत मिलती है । दमा रोग के साथ साथ weight loss के लिए भी उपयोगी है ।


इस आसन को करने के लिए सबसे पहले उल्टे लेट कर गहरी श्वास लेते हुए अपने दोनो पैरों को ऊपर उठाकर हाथों की मुट्ठी बनकर जंधो के नीचे रखे । अब पैरो को सीधा रखते हुए गहरी सांस ले फिर धीरे धीरे छोड़ते हुए पैरो को नीचा करें । इस अभ्यास को 5 से 7 मिनट तक दोहराए ।

तो मित्रो आज का टॉपिक sciatic nerve pain आपको जरूर अच्छा लगा होगा । मगर यहां दी गई जानकारी केवल शिक्षाप्रद है । योग्य चिकित्सा सलाह लेना अनिवार्य समझे ।

डॉ सत्यम भास्कर, मेडिट्रस्ट हेल्थकेयर के डायरेक्टर ।

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