बवासीर के कारण लक्षण व उपाय | piles treatment at home.

Piles treatment at home.

Piles treatment at home.  कहने में बहुत छोटा सा शब्द है परन्तु बेहद खतरनाक बीमारी छिपी है इस शब्द में। साधारण शब्दों में हम कह सकते है कि व्यक्ति के मल त्याग के स्थान पर जब कोई अवरोध या रूकावट उत्पन्न हो जाती है वही “पाइल्स” कहलाती है। पीड़ादायक इस बीमारी अर्श या मस्से के नाम से भी जाना जाता है । अंग्रेजी में इसे hemorrhoid ( बवासीर ) कहते है । व्यक्ति को मल त्यागने के दौरान काफी दर्द होता है। कभी-कभी मल के लिए ज़ोर लगाने पर रक्त भी निकलता है।

ऐसा भी देखा गया है कि किसी किसी को मल के साथ रक्त भी बहता रहता है। यही सब बातें पाइल्स में शामिल हो जाती हैं। बवासीर का मुख्य कारण हमारा खान पान एवं जीवन शैली है । लेकिन थोड़ी सी सावधानी रखकर इसे बचा जा सकता है । तो चलिए जानते है – बवासीर के कारण लक्षण और उपाय | piles treatment at home –

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Table of Contents

What is Piles ? पाइल्स क्या है –

एक बहुत सामान्य शब्द आप सभी ने लोगों को कहते सुना होगा की उसे बवासीर हो गई है। उसके मल निकासी के मार्ग में काफी अधिक सूजन आ गई है, जिस कारण उसके मल त्यागने में कठिनाई आ रही है। मल के साथ रक्त भी आ रहा है। यही पाइल्स है। अधिकतर 50 या 55 वर्ष के बाद यह बीमारी अपने पैर जमाना शुरू करती है।

Type of piles – बवासीर के प्रकार –

Piles मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है । खूनी बवासीर एवं बादी बवासीर । लेकिन Plies या फिर सामान्य शब्द बवासीर को हम कई रूपों में जान सकते है –

रक्त बवासीर / THROMBOSED HEMORRHOIDS.


जैसा कि इसके नाम ही से पता चल रहा है कि रक्त यानि खूनी वबासीर। जब कोई भी व्यक्ति मल त्याग करता है उस समय उसके मल के साथ खून भी आता है ।

यह बवासीर व्यक्ति में काफी कमज़ोरी ला सकती है क्योकिं इसमें रक्त निरन्तर मल के साथ बहता रहता है। इसका कारण है कि इसमें खून के थक्के जमने लगते हैं यही थक्के अंदर व बाहरी हिस्से को प्रभावित कर खूनी बवासीर में बदल जाते हैं। बहुत खतरनाक रोग है यह ।

प्रोलेप्सड बवासीर/ PROLAPSED HEMORRHOIFS –

सबसे पहले जानते है कि प्रोलेप्सड क्या होता है ? आप सभी जानते हैं कि हमारा शरीर हज़ारो, लाखों मांसपेशियों से जुड़ा हुआ है जो हम सबको एक दूसरे से जकड़कर व पकड़कर रखती हैं। यदि एक भी मांसपेशी ढीली हो गई समझो शरीर का सारा system बिगड़ जायेगा ।

मूत्र नली, महिलाओं का गर्भाश्य, और आंत को कुछ मांस पेशियों द्वारा जोड़ कर व पकड़कर रखा जाता है जब यही मांसपेशियां क्षतिग्रस्त या फिर कमज़ोर हो जाती हैं या फिर हम यह भी कह सकते हैं कि पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों में ढीलापन आ जाने से वे कमज़ोर हो जाती हैं और नीचे को लटक जाती हैं। तो यही प्रोलैप्स होना होता है या कहलाया जाता है।

अब बात करते हैं प्रोलेप्सड बवासीर की। जब हमारे मल द्वार के अंदरुनी हिस्से में सूजन आ जाती है और मल करते समय ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ नीचे को आ रहा है या लटक रहा है। यही स्थिति प्रोलेप्सड बवासीर कही जाती है। यह एक गांठ की तरह से लगती है और गुदा के मुँह पर स्थित होती है। हाथ से छूने पर गाँठ अलग ही महसूस की जा सकती है।

अंदरुनी बवासीर/ INTERNAL HEMORRHOIDS –

कहते हैं अंदरुनी बवासीर अधिक खतरनाक नहीं होती। यह समय पर अपने आप ठीक भी हो जाती हैं। वास्तव में अंदरुनी बवासीर गुदा में काफी अंदर तक गहराई में जाकर विकसित होती है। इसे छूने व देखने पर पता भी नहीं चल पाता कि इस प्रकार की कोई बीमारी व्यक्ति में है भी या नहीं ।

बाहृय स्तर की या बाहरी बवासीर/ EXTERNAL HEMORRHOIDS –

जैसा कि इसके नाम ही से पता चल रहा है कि बाहरी हिस्से में होने वाली बवासीर ,यह मलाशय के ठीक ऊपर मुँह पर उत्पन्न होती है । हम यह भी कह सकते हैं कि जहाँ से हम मल त्याग करते हैं वहीं इसका जन्म होता है। इससे भी कोई गंभीर समस्या उत्पन्न नहीं होती परन्तु यदि मल त्यागने में किसी प्रकार की कठिनाई हो रही हो या फिर दर्द हो तो चिकित्सक के पास अवश्य जाना चाहिए ।

Symptoms of piles – पाइल्स के लक्षण –

  1. सबसे common symptoms है मल त्यागते समय हल्का सा दर्द महसूस होना।
  2. कभी कभी मल त्यागते समय खून भी मल के साथ निकलता है।
  3. गुदा में निरन्तर खुजली या खारिश का होना।
  4. मल करते समय भयंकर पीड़ा अनुभव होना ऐसा लगना मानो कोई चीज़ अटक रही है।
  5. गुदा से सफेद रंग का चिपचिपा पदार्थ निकलना।
  6. गुदा पर सूजन आ जाना या मस्सों का बन जाना। ये मस्से व्यक्ति के बैठने पर भी उसे चुभते रहते हैं।

Causes of piles – पाइल्स के कारण –

मल त्याग करते समय नसों में खिचांव उत्पन्न हो जाता है जिस कारण वहाँ सूजन आ जाती है। यह सूजन कुछ वजहें हैं जिस कारण आती हैं :-

  1. टायलेट मे काफी समय तक बैठे रहना ।
  2. ज़ोर या दवाब देकर मल का त्याग करने से भी यह बीमारी उत्पन्न हो जाती है।
  3. कभी कभी लंबे समय तक दस्त होने से भी यह बीमारी पैदा हो जाती है । जिनको मल सख्त आता है और दो- दो दिन तक नहीं आ पाता उनको तो यह बीमारी हो ही जाती है।

कुछ अन्य कारण –

  1. आयु को तो बढ़ना ही है । कहते हैं शरीर जब बूढ़ा होने लगता है तो कमज़ोरी भी आनी शुरू है जाती है। जो ऊतक जवानी में हमें बीमारियों से बचाते हैं वही उम्र बढ़ने के साथ साथ कमज़ोर भी होने शुरू हो जाते हैं। इस कारण भी बवासीर विकसित होकर गुदा पर उभर आती है।
  2. मोटा शरीर भी इस समस्या को उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी है। जब शरीर के अंदर पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ेगा तो जा़हिर सी बात है कि गुदा पर भी दबाव पड़ना शुरू हो जायेगा और बवासीर जन्म ले लेगी।
  3. जब स्त्री गर्भवती होती है तब उसके पेट के अंदर का दबाव बढ़ने लगता है। जैसे जैसे पेट का आकार बढ़ता है वैसे वैसे ही गुदा की नसों में भी खिंचाव पैदा होकर उनमें सूजन आ जाती है। यही सूजन खुजली का रूप ले लेती है और बवासीर बन जाती है।
  4.  एनल सेक्स भी बवासीर को बढ़ाने में पूर्ण रूप से सहायक है। जब व्यक्ति गुदा से सेक्स करेगा तो वहाँ की मासंपेशियों में काफी खिंचाव आ जायेगा। और सूजन आने व उस जगह का फैलने के कारण बवासीर हो जायेगी।
  5. कभी कभी अधिक बोझ उठाने से भी बवासीर हो जाती है। इसके अतिरिक्त घंटो घंटो लगातार खड़े रहना या बैठना भी बवासीर को पैदा करता है।
  6. कब्ज़ तो इसके लिए पहले स्थान पर उत्तरदायी है।
  7. कुछ महिलाओं या पुरूषों के पारिवारिक इतिहास को देखा जाए तो बवासीर की बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी होती देखी गई है। आनुवंशिक वजहों से भी गुदा की दीवारें कमज़ोर हो जाती हैं और यह बीमारी उत्पन्न हो जाता ती है।

Piles treatment at home – पाइल्स का घरेलू इलाज –

पाइल्स या बवासीर से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है अपने खान पान पर ध्यान देना। यदि मनुष्य फाइबर युक्त भोजन खायेगा जैसे चोकर मिले आटे की रोटी, अंकुरित दाले, फाइबर वाले फल तो इनके सेवन से उसका मल नर्म व मुलायम आयेगा और उसे अधिक देर तक मल त्याग के लिए बैठना भी नहीं पड़ेगा। कुछ बातों पर ध्यान देने से piles सै काफी हद तक बचा जा सकता है। –

पानी अधिक से अधिक पीयें – Piles treatment at home drink enough water of day.

पानी जितना भी हो अधिक से अधिक पीना चाहिए। पानी पीने का तरीका भी मैं यहाँ बता रहे है ।

अ) पानी अधिक ठंडा न पीए ।
आ) पानी हमेशा normal temperature पर ही पीएँ ।
इ) पानी कभी भी खड़े होकर गट -गट करके नहीं पीना चाहिए ।
ई) पानी आराम से कुर्सी या बेड पर बैठकर ही पीना चाहिए।
उ) पानी बीच – बीच में एक अंतराल यानि कि थोड़ी थोड़ी देर में पीना चाहिए इससे किडनी पर भी असर नहीं पड़ता और पानी पूरे शरीर में आराम से पहुँच जाता है।

टॉयलेट में लंबे समय तक नहीं बैठे – Piles treatment at home don’t sit on toilet.

यदि व्यक्ति को मल त्यागने में अधिक समय लग रहा है और उसे ऐसा अनुभव हो रहा है कि मल आने वाला है परन्तु आ नहीं पा रहा तो तुरंत स्वयं को स्वच्छ करके टॉयलेट सीट से उठ जाना चाहिए। याद रहे कि अगर कोई भी टॉयलेट सीट पर अधिक देर तक बैठता है तो गुदा के आसपास की रक्त पेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और रक्त नलियों में उतरकर गुदा मार्ग में आ सकता है।

टॉयलेट में कभी भी अपना मोबाइल या समाचारपत्र नहीं ले जाना चाहिए। इससे व्यक्ति समाचारपत्र पढ़ने या फिर फोन पर बात करने में व्यस्त हो जाता है और उसे पता ही नहीं चलता कि उसे टॉयलेट में बैठे कितना समय बीत चुका है।

समय पर मल त्यागने की आदत बनाए – piles treatment at home.

अकसर यह देखा गया है कि कुछ लोग काम में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि अगर काम करने के दौरान उन्हें मल त्यागने की इच्छा होती है तो वह नज़र अंदाज़ कर देते हैं। ऐसा करने से मल अंदर आँतों में पड़ा सूख जाता है और जब उसे बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है तो बहुत सख्त मल निकलता है। उसके साथ रक्त की कुछ बूंदे भी आ जाती हैं।

Exercise / व्यायाम करे | Piles treatment at home.

यदि मनुष्य दिन भर बैठा ही रहेगा। इससे शरीर में आलस बना रहेगा और भोजन भी पच नहीं पायेगा। ऐसे में सभी को व्यायाम या एकसरसाइज करने की आदत डालनी चाहिए। अगर कोई व्यायाम या फिर एकसरसाइज पहली बार कर रहा है तो सावधानी पूर्वक हाथों व पैरों को हिलाना डुलाना चाहिए।

इससे लचक आने की संभावना कम रहती है। शुरू में कम एकसरसाइज करनी चाहिए फिर धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए। इससे शरीर थकेगा नहीं और कहीं मोच आदि भी नहीं आयेगी। जब शरीर गतिमान अवस्था में रहेगा तो मल त्याग सरलता से हो जायेगा ।

piles treatment at home.
piles treatment at home

Home remedies of plies – पाइल्स का घरेलू उपाय –

हमारे घर ही से हम बवासीर के इलाज की शुरुआत कर सकते हैं। जी हाँ दोस्तों ….

  1. फाइबर युक्त फलों जैसे अंजीर, पपीता, केला, ब्लैक बेरी, जामुन, सेब आदि का सेवन करना चाहिए।
  2. सभी को अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करनी चाहिए।
  3. प्याज, अदरक और लहसुन कब्ज़ की बीमारी को दूर करने में काफी कारगर पाए गये हैं।
  4. साबुत अनाज, सभी दालें समय समय पर बदलकर खाते रहना चाहिए।
  5. कभी कभी हमने देखा है कि परिवार के किसी सदस्य को कब्ज़ की शिकायत हो जाती है ऐसे में उसे कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर रोटी के साथ खिलानी चाहिए। यदि वह यह नहीं खा सकता तो पका पपीता खाने को देना चाहिए। पेट एक दम साफ हो जायेगा।
  6. सूखे मेवे अखरोट, किशमिश, बादाम, काजू भी थोड़ी थोड़ी मात्रा में लेना चाहिए इससे शरीर में लौह तत्व की पूर्ति होती है।
  7. अगर पेट भूलने या एसीडिटी की समस्या आ गई हो तो नीबूं के रस की चार पाँच बूंदे गुनगुने पानी में डालकर पीनी चाहिए।
  8. गैस की समस्या से बचने के लिए लहसुन की एक छोटी कली हल्के गुनगुने पानी के साथ सुबह खाली पेट लेना चाहिए।
  9. पानी अधिक से अधिक पीएं।
    याद रहे कोई भी घरेलू ईलाज करने से पूर्व एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए।

क्षार सूत्र से बवासीर का इलाज कैसे करें – Kshar sutra se bawaseer ka ilaj kaise kare –

Kshar sutr बवासीर का रामबाण इलाज के रूप में जाना जाता है । यह piles को जड़ से खत्म में काफी हद तक कारगर साबित होता है तो सबसे पहले जानते हैं कि क्षार सूत्र क्या है ? जैसा कि इसके नाम ही से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा की एक प्रक्रिया है जो बवासीर, भगन्दर, फिशर व मल मार्ग से सम्बंधित किसी भी प्रकार के रोग का ईलाज करने की एक कारगर पद्धति है।


क्षार सूत्र से बवासीर का ईलाज – piles treatment at home by Kshar sutra

इसके अंतर्गत एक धागे को उपयोग में लाया जाता है जो उपचारित धागा कहलाता है।7 इससे ईलाज करने में 21 दिनों का समय लगता है। इसमें थुहर का दूध, अपामार्ग क्षार, हल्दी आदि औषधियों को उपयोग में लाया जाता है। यह एक बेहद कारगर ईलाज है इसके बाद दौबारा कभी पाइल्स हो ही नहीं सकता।


इस ईलाज के दौरान एक तरह का लेप तैयार किया जाता है जो तीन मुख्य औषधियों स्नुही क्षीर के 11 लेप, अपामार्ग क्षार के 7 लेप, हरिद्रा चूर्ण के 3 लेप द्वारा तैयार किया जाता है या पूर्ण समझा जाता है। इन सभी को एक दृण सर्जिकल सूत्र में , 21 बार लेप करके एक महीने में तैयार किया जाता है। इस ईलाज में रोगी को अस्पताल में रहने की कोई विशेष ज़रूरत नहीं होती ।

Kshar sutra se piles ka ilaaj.

कुछ खा़स बातों का ध्यान रखना पड़ता है। प्रतिदिन के सभी कार्य रोगी सावधानी के साथ कर सकता है। जैसा कि आपको पता है कि यह एक विशेष प्रकार की चिकित्सा पद्धति है । इस बीमारी से सम्बंधित रोगियों को क्षार सूत्र में एक बार बांधा जाता है उसके बाद मस्से गिरने तक रोगी को अस्पताल जाना पड़ता है वह भी जब, तब इसकी आवश्यकता हो या फिर चिकित्सक ने समय दिया हो कि इस दिन रोगी को आना ही है।


एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली यह है कि प्रत्येक सप्ताह रोगी का क्षार सूत्र बदला जाता है। और पुराने के स्थान पर नया डाला जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यह सभी चिकित्सा पद्वतियों में सबसे सफल व उत्तम ईलाज है बवासीर को जड़ से समाप्त करने का।


अब बात करते हैं कि रोगी इस प्रक्रिया के बाद कितने समय तक ठीक हो जाता है तो इसमें यानि कि बवासीर व फिशर में रोगी की गुदा लगभग 10 से 15 दिनों में ठीक हो जाती है। भगन्दर का समय ऐसे बता पाना संभव नहीं है क्योकिं भगन्दर भी कई प्रकार के होते हैं और यह निर्भर करता है कि रोगी की स्थिति, हालत, व मनोदशा कैसी है। बहुत से रोगी बड़े से बड़ा दर्द भी सहन कर लेते हैं और कुछ एक सुई से भी डर जाते हैं।

क्षार सूत्र के बाद भोजन – kshar sutra diet in hindi

1. Piles रोगी को तला भुना भोजन, तेल, घी, खटाई से दूर रहना चाहिए। मैदा व मैदे से बनी चीज़े कोशिश करें कि दूर ही रहें।
2. शाकाहारी भोजन का सेवन करें और मांस मछली शराब आदि से दूर रहें।
3. खाने मेंं पत्तेदार हरी सब्जियों को खाएं।


4. मल त्याग के समय अधिक ज़ोर ना लगाएं और अधिक देर तक बैठें भी नहीं।
5. कपालभाति योग, वजरासन आदि योगासन करें। कुछ समय के लिए दो पहिया वाहन का उपयोग ना करें और निरन्तर बैठे ना रहें। पैदल चलने की आदत डालें। जो चिकित्सक ने बताया है वही नियम मानें।। शाहाना परवीन मुज़फ्फरनगर यू० पी० ।

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