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पंचकर्म पद्धति के फायदे एवं नुकसान। Panchakarma in hindi.

Panchakarma in Hindi.

Panchakarma in Hindi. वर्तमान में किसी भी बीमारी की चिकित्सा के लिए जहाँ लोग अंग्रेजी दवाईयों पर ही भरोसा करते हैं, वही बहुत से लोग ऐसे भी है, जो आयुर्वेदिक चिकित्सा पर ही यकीन करते हैं। यह चिकित्सा पद्धति पुरी तरह से प्राकृतिक वनस्पतियों या औषधियों को मिलाकर बिना किसी रसायन के बनायी जाती है।

यह चिकित्सा पद्धति हमारे ऋषि मुनियों द्वारा निर्मित प्राचीन चिकित्सा पद्धति है और इन चिकित्सा को करवाते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान भी रखा जाता हैं। आयुर्वेद में वर्णित अनेक प्रकार की चिकित्सा पद्धति अपनायी जाती है, जिसमें से एक चिकित्सा पद्धति “पंचकर्म” भी है। आइये आज इस लेख में इसी विषय पर बताते है – Panchakarma in hindi.

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पंचकर्म क्या है ? Panchakarma chikitsa paddhati kya hai.

पंचकर्म आयुर्वेद की ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जिसमें पाँच प्रकार की चिकित्सा को मिलाकर एक ही चिकित्सा बनायी गयी है। इस चिकित्सा में शरीर का आंतरिक शोधन किया जाता है, जिससे शरीर के सारे विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं एवं रोगी स्वतः ठीक हो जाता है। जब मनुष्य को कोई बीमारी घेर लेती है, तो उसके शरीर में बीमारी से उत्पन्न अनेक प्रकार की बुराईयां या दोष रह जाती है, इन्ही बुराइयों या दोषों को पाँच प्रकार की चिकित्सा द्वारा शरीर शोधन की प्रक्रिया पंचकर्म कहलाती है।

पतंजलि में पंचकर्म कैसे होता है ? Patnjali Panchakarma kaise hota hai.

बाबा रामदेव द्वारा निर्मित पतंजलि आयुर्वेदिक संस्थान में पंचकर्म की क्रिया पाँच प्रक्रियाओं में पूर्ण की जाती है। बमन, विरेचन, वस्ति, नस्य एवं रक्तमोक्षण विधि द्वारा रोगों को जड़ से खत्म किया जाता है, जिससे रोगी के शरीर की सारी अशुद्धियां बाहर निकल जाते हैं और रोगी स्वतः ठीक हो जाता है। इन पाँच प्रक्रियाओं को आगे बताते हैं।

पंचकर्म के कितने प्रकार होते हैं ? Panchakarma ke prakar.

आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज पंचकर्म पद्धति यानी 5 प्रकार की विधि से किया जाता है । ये विधियां काफी मुश्किल होती है । यही कारण है गम्भीर रोगी के लिए यह उपयोगी नहीं होती है । पंचकर्म अर्थात पाँच प्रकार के कर्मो के द्वारा बीमारियों को दूर भगाने की चिकित्सा की जाती है। यह पाँच कर्म निम्न है –

बमन पंचकर्म थेरेपी । Baman therapy of Panchakarma in hindi.

इस कर्म में बमन के जरिये दोषों को बाहर निकाला जाता है। शरीर के ऊपरी भाग के दोषों को दूर करने के लिए मुख द्वारा उल्टी कराकर दोषों का निराकरण किया जाता है। यह प्रक्रिया कफ दोष की प्रधान चिकित्सा मानी जाती है। इसमें श्वास रोग, पांडु रोग, कांस, प्रमेह या मुख के रोग का उपचार प्रमुख हैं। इस प्रक्रिया का उपयोग गर्भवती स्त्री, भूखा व्यक्ति एवं कोमल प्रकृति वाले व्यक्ति पर नही किया जाता है।

विरेचन पंचकर्म थेरेपी | Vivechan therapy of Panchakarma in hindi.

इस क्रिया में शरीर के अंदर स्थित दोषों को गुदामार्ग या मलमार्ग द्वारा निकालने की प्रक्रिया, विरेचन कहलाती है। यह पित्त रोग की प्रधान चिकित्सा पद्धति है। इसमें अग्निदग्ध, शूल, भगंदर, अर्श, गुल्म और रक्त पित्त जैसे रोग ठीक होते हैं। इस प्रक्रिया का उपयोग किसी नए ज्वर से पीड़ित व्यक्ति, रात्रि में जागने वाला व्यक्ति पर नही करना चाहिए।

वस्ति पंचकर्म थेरेपी । Vasti therapy Panchakarma in Hindi.

यह क्रिया दो तरीको से सम्पन्न होती हैं, आस्थापन वस्ति एवं अनुवासन वस्ति। गुदा मार्ग, मूत्रमार्ग, अपत्य मार्ग या घाव के मुख मार्ग द्वारा औषधि को द्रव अवस्था में शरीर के अंदर पहुंचाने की क्रिया वस्ति कहलाती है।

मूत्र मार्ग या अपत्य मार्ग द्वारा दी गयी औषधि उत्तर वस्ति कहलाती है, जबकि घाव के मुख से दी गयी औषधि व्रण वस्ति कहलाती है। आस्थापन वस्ति में काढ़े का उपयोग किया जाता है, जबकि अनुवासन वस्ति में सिद्ध स्नेह प्रयुक्त की जाती है।

वस्ति वात्त रोगों की प्रधान चिकित्सा विधि है। अंग सुप्ति, शुक्र क्षय, जोड़ो के रोग या योनि शूल इससे ठीक होते हैं। भोजन किये बिना अनुवासन वस्ति और भोजन के बाद आस्थापन वस्ति का उपयोग निषिद्ध माना जाता है।

नस्य पंचकर्म थेरेपी | Nasya therapy of Panchakarma in hindi.

इस प्रक्रिया में नाक के जरिये औषधि शरीर के अंदर पहुंचाई जाती है, इसलिए इसे नस्य कहते हैं। यह गले और सिर से सम्बंधित बीमारी की उत्तम चिकित्सा मानी जाती हैं। इस चिकित्सा का उपयोग मनोविकार से पीड़ित व्यक्ति, अतिनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति या सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति पर नही किया जाता है।

रक्तमोक्षण पंचकर्म थेरेपी | Raktamokshan therapy of Panchakarma in hindi.

यह पंचकर्म की अंतिम चिकित्सा पद्धति है, इसमें शस्त्र चिकित्सा द्वारा नस भेदन करके शरीर के दूषित रक्त को शरीर के बाहर निकाला जाता है, जिससे शरीर का रक्त शुद्ध हो जाता है, इसलिए इसे रक्तमोक्षण कहते है। उपरोक्त पंच कर्मो द्वारा आयुर्वेद में की गयी चिकित्सा ही पंचकर्म कहलाती हैं।

पंचकर्म करवाने के पहले क्या करना चाहिए ?

पंचकर्म चिकित्सा पद्धति लेने के पूर्व मरीज को आयलेशन एवं फॉर्मेटेशन का उपयोग करना चाहिए ताकि विषैले पदार्थों को आसानी से बाहर निकाला जा सकें। आयलेशन क्रिया में मरीज के पूरे शरीर पर तेल लगाया जाता है, जिससे शरीर नर्म मुलायम हो जाता है। इसके बाद फॉर्मेटेशन क्रिया में पसीने द्वारा शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकाल दिया जाता हैं।

पंचकर्म कितने दिनों का होता है ?

पंचकर्म की प्रक्रिया तीन परिस्थितियों कफ, वात्त एवं पित्त में की जाती है। अलग अलग बीमारियों के हिसाब से मरीज को अलग अलग दिनो तक भर्ती रहना पड़ सकता है। वात्त से निर्मित रोगों में पंचकर्म 80 दिनों तक किया जाता है ।

पित्त से निर्मित रोगों के लिए पंचकर्म 40 दिनों तक किया जाता है, जबकि कफ से निर्मित रोगों के लिए पंचकर्म 20 दिनों तक किया जाता है। मरीज को अस्पताल में भर्ती करके पंचकर्म की क्रिया द्वारा इलाज किया जाता है। इसके लिए मरीज को बीमारी के अनुसार कभी 15 दिन, कभी एक महीने या कभी डेढ़ महीने हॉस्पिटल में भर्ती रहना पड़ता है।

पंचकर्म पर कितना खर्च होता है ?

पंचकर्म की चिकित्सा क्रिया में प्रति व्यक्ति 8-10 हजार खर्च हो सकता है। आजकल बहुत से ऐसे हॉस्पिटल है, जो पंचकर्म के नाम पर। 70 से 80 हजार तक वसूल लेते हैं, जिससे गरीब लोग यह इलाज करवा ही नही पाते हैं।

पंचकर्म की असली कीमत ज्यादा से ज्यादा 15 हजार हो सकती है, पर उससे ज्यादा नही है। बहुत सी ऐसी संस्थाएं भी है, जो न्यूनतम कीमत पर भी पंचकर्म करती हैं, लेकिन इसके लिए मरीज को अपनी पुरी जानकारी देनी पड़ती हैं।

Panchakarma ke fayde.

पंचकर्म के फायदे क्या है ? Panchakarma ke fayde.

पंचकर्म करवाने के निम्न फायदे हैं –
● इससे स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
● यह बढ़ती उम्र को रोकता है।
● यह शरीर के सभी विषैले तत्वों को बाहर निकल देता है।
● यह शरीर और दिमाग को आराम पहुँचाता है।
● इससे शरीर पुरी तरह शुद्ध हो जाता है।
● यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
● इससे पाचन तंत्र मजबूत बनता है।
● यह शरीर के ऊतकों को मजबूत बनाता है।
● पंचकर्म वजन कम करने में भी सहायक है।

पंचकर्म के नुकसान क्या है ? Panchakarma ke nuksan.

पंचकर्म करवाने के नुकसान उन्हें उठाने पड़ते हैं, जो पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के लिए योग्य नही होते हैं और फिर भी पंचकर्म चिकित्सा करवा लेते हैं, तब उन्हें फायदे के स्थान पर बहुत सी नुकसान उठाने पड़ते है। उनका शरीर अयोग्य होने के कारण इस चिकित्सा को सहन नहीं कर पाता है, और मरीज को अन्य शारीरिक समस्याएं होने लगती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किस तरह के लोगों को यह चिकित्सा नही करवानी चाहिए –

● हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत वाले लोगो को यह चिकित्सा नही करवानी चाहिए।
● स्तनपान करवाने वाली माताओं को भी पंचकर्म नही करवाना चाहिए।
● हार्ट पेशेंट को पंचकर्म नही करवाना चाहिए।
● किसी संक्रमित रोग से ग्रस्त व्यक्ति को पंचकर्म नही करवाना चाहिए।
● कमजोर हदय वाले को पंचकर्म नही करवाना चाहिए।
● गर्भवती महिलाओं को पंचकर्म नही करवाना चाहिए।
● अधिक मोटापा से ग्रस्त व्यक्ति को भी पंचकर्म नही करवाना चाहिए।
● एड्स से ग्रसित व्यक्ति को भी पंचकर्म नही करवाना चाहिए।
● फेफड़ो के कैंसर के मरीज को पंचकर्म नही करवाना चाहिए।
● मासिक धर्म के दौरान भी पंचकर्म नही करवाना चाहिए

पंचकर्म करवाते समय क्या सावधानियां रखनी चाहिए ?

पंचकर्म करवाने के दौरान हमें कुछ बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है, जैसे –
● इस दौरान मरीज को दिन में नही सोना चाहिए।
● ज्यादा तनाव नही लेना चाहिए और ना ही ज्यादा व्यायाम करना चाहिए।
● इस दौरान गर्म पानी पीना चाहिए, गर्म पानी से नहाना चाहिए एवं गर्म पानी का ही उपयोग अन्य कार्य हेतू करना चाहिए।
● देर रात तक नहीं जगना चाहिए।
● देर से पचने वाली चीजों का सेवन नही करना चाहिए।
● पंचकर्म करवाने वाले मरीज को अधिक तापमान में नही रहना चाहिए।
● पंचकर्म के दौरान ब्रम्हचर्य का पालन करना चाहिए।

पंचकर्म केंद्र near me

आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति से सभी रोगों का इलाज किया जाता है । इनकी सुविधा बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल में होती है । जैसे छत्तीसगढ़ में भी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है। रायपुर, बेमेतरा एवं बिलासपुर में पंचकर्म चिकित्सा विधि को अपनाया जाता है। मध्यप्रदेश के चित्रकूट धाम में एक प्रशिद्ध अस्पताल है, जहाँ पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
शांत, सुरम्य वातावरण में बसे इस हॉस्पिटल का नाम आयुष ग्राम चिकित्सालय है। यहाँ हर प्रकार के रोगों की चिकित्सा पंचकर्म द्वारा की जाती हैं, किन्तु यह बहुत ही महंगा हॉस्पिटल है।

देश के टॉप 10 पंचकर्म चिकित्सा केंद्र । Top 10 Panchkrama chikitsalay.

★ हरिविहार हेरिटेज होमस्टेड और आयुर्वेदिक रिजॉर्ट पंचकर्म रिट्रीट कालीकट, केरल।
★ सीजीएच अर्थ आयुर्वेद पंचकर्म रिट्रीट, पलक्कड़, केरल।
★ शतयु आयुर्वेद पंचकर्म रिट्रीट, देवनहल्ली, बेंगलुरु।।
★ कृष्णेदु आयुर्वेद पंचकर्म रिट्रीट, चिंगोली, केरल।
★ सोमाथिरम आयुर्वेद ग्राम पंचकर्म रिट्रीट, कोवलम, केरल।
★ डॉ, फ्रेंकलिन पंचकर्म संस्थान और आयुर्वेद केंद्र, पंचकर्म रिट्रीट, कोट्टूकल, केरल।
★ सोक्य, डॉ, मथाई का अंतर्राष्ट्रीय समग्र पंचकर्म केंद्र, व्हाइटफील्ड, बेंगलुरु।
★ आयुर्वेद ग्राम हेरिटेज वेलनेस सेंटर पंचकर्म रिट्रीट, व्हाइटफील्ड, बेंगलुरु।
★ त्रावनकोन हेरिटेज आयुर्वेद रिजॉर्ट पंचकर्म रिट्रीट, कोट्टूकल केरल।
★ कैराली आयुर्वेद हीलिंग विलेज पंचकर्म रिट्रीट, पलक्कड़, केरल।

★ मोतीलाल कुचेरिया, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, काठमांडू (नेपाल)
★ प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग स्वास्थ्य केंद्र लोक सेवक मंडल, लाजपत भवन, लाजपत नगर (नई दिल्ली)
★ एसडीएम कॉलेज ऑफ आयुर्वेद, हासन, कर्नाटक।
★ उत्तर पूर्वी आयुर्वेद एवं होम्योपैथी चिकित्सालय, शिलांग, मेघालय।
★ अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली।
★ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ योग न्यूरोपैथी, चंदन नगर(नागपुर)
★ प्राकृतिक चिकित्सालय, बापू नगर, जयपुर (राजस्थान)
★ राम योग प्राकृतिक चिकित्सालय, जी, टी,रॉड, अम्बाला नगर(हरियाणा)
★ ऋषि आश्रम प्राकृतिक चिकित्सालय, लुधियाना(पंजाब)
★ योग साधना केंद्र, साकेत, मेरठ( उत्तरप्रदेश)
★ आरोग्य मंदिर, गोरखपुर(उत्तरप्रदेश)
★ प्राकृतिक चिकित्सालय, पो, रानीपतरा जिला पूर्णिया (बिहार) इनके अलावा और भी बहुत से पंचकर्म संस्थान है। यदि आपको पंचकर्म करवाना हो तो आप अपने मोबाइल गूगल से सर्च करके पता लगा सकते हैं, कि आपके पास का सबसे अच्छा और सस्ता पंचकर्म केंद्र कौन सा है।

पंचकर्म चिकित्सा पद्धति में नियमो का पालन करना अति आवश्यक होता है, समय पर हर कार्य करना एवं सात्विक आचार विचार को अपनाना अत्यंत आवश्यक है, तभी रोग ठीक हो पायेगा। यह चिकित्सा पद्धति रोग को जड़ से नष्ट करने में सक्षम है। पंचकर्म करवाने के लिए जरूरी है कि आप सम्बंधित संस्थान से पूर्ण जानकारी एकत्र कर लें, फिर पंचकर्म करवाने जाये ।। शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ छत्तीसगढ़ ।।

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