बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज । Bawasir ka ilaaj.

Bawasir ka ilaaj in hindi.
Bawasir ka ilaaj.

बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज   । खराब जीवन शैली एवं खानपान के कारण हमारे में बीमारियां दीमक की तरह चिपक जाती है । जो मानव शरीर को धीरे धीरे खोखला कर देती है । Bawasir भी उनमें से एक है । जिसे piles भी कहा जाता है । लगातार कई घण्टो तक एक स्थान पर बैठे रहना, लगातार कब्ज की शिकायत रहना, अधिक मसालेदार भोज्य पदार्थों का सेवन करना जैसे कई कारणों से Piles की प्रॉब्लम होती है ।

डॉक्टर्स के अनुसार यह एक आम बीमारी है जिसे हर तीसरा व्यक्ति पीड़ित हैं । वैसे तो यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है मगर 45 के बाद के लोगो मे अधिक देखी गई है । पाइल्स एक कष्टकारी एवं पीड़ादायक बीमारी है । स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है । इनका इलाज सर्जरी के द्वारा किया जाता है मगर घरेलू या Ayurvedic उपाय भी राहतकारी हो सकते है तो चलिए जानते है – बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज । Bawasir ka ilaaj –

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बवासीर क्या है । Bawasir kya hota hai.

बबासीर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें रोगी के एनस के अंदर और बाहरी हिस्से में सूजन आ जाती है, जिसके कारण एनस के आंतरिक या बाहरी हिस्से में खाल जमा होकर मस्से जैसी बन जाती है । मल त्याग करते समय जोर लगाने से ये मस्से गुदा से बाहर आ जाते हैं और मल के दबाव और टकराव से छिल जाने के कारण इन में असहनीय दर्द होता है और इन से खून बहने लगता है ।

कभी-कभी मलद्वार से बाहर लटक जाते हैं जो कि आपातकालीन स्थिति उत्पन्न कर देते हैं। खून के थक्के जमने से भी इनमें अत्यंत दर्द होता है। बबासीर को अर्श या पाइल्स के नाम से भी जाना जाता है। यह अत्यंत गंभीर कब्ज होने के कारण होता है, जो कि एक अत्यंत कठिन और जटिल बीमारी होती है । यह रोग यदि लंबा खिंच जाए तो रोगी एनीमिक हो जाता है एवं उसे अनेक प्रकार के रोग घेर लेते हैं । शरीर के अन्य अंगों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है । यह एक आम बीमारी है जो स्त्री और पुरुषों में सामान्यतः पाई जाती है ।

बबासीर होने के कारण | Bawasir ke karan.

1. काफी समय तक कठोर कब्ज बने रहना ।
2. वंशानुगत कारणों से भी बवासीर हो जाता है ।
3. स्त्रियों में प्रसव के दौरान बबासीर होने का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि उनके एनस क्षेत्र पर अधिक दबाव पड़ता है ।
4. शौच के समय अधिक जोर लगाने से भी बवासीर हो जाता है ।
5. ज्यादा समय तक हृदय और लीवर से संबंधित बीमारी होने पर बवासीर का खतरा बढ़ जाता है ।
6. गुर्दे के चारों ओर स्थित रक्त वाहिकाओं में सूजन तब होती है जब निचले मलाशय में दबाव बढ़ जाता है ।

इसके अन्य कारण हैं –
1. आहार में फाइबर की कमी ।
2. अत्यधिक संसाधित भोजन की खपत ।
3. काफी गंभीर डायरिया ।
4. आवश्यकता से अधिक भार उठाना
5. शौच के समय तनाव ।
6. मोटे और अधिक वजन वाले व्यक्तियों को बवासीर की शिकायत अधिक होती है ।
7. आलसी जीवन शैली अपनाने के कारण भी बवासीर हो जाता है ।
8. धूम्रपान, शराब और मांस भक्षण करने से भी बवासीर हो जाता है ।

बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज । Purani Bawasir ka ilaaj.

1. रेशेदार सब्जियां, ताजे फल खाने और खूब पानी पीना चाहिए। नियमित व्यायाम करना चाहिए । मल त्याग करते समय अधिक जोर नहीं लगाना चाहिए और पखाने में ज्यादा देर तक नहीं बैठना चाहिए ।

2. अधिकांशतः आहार में परिवर्तन करने से बवासीर ठीक हो जाती है ।
3. शौचालय साफ होना चाहिए । यदि कोई बवासीर का मरीज पहले गया हो और उसके बाद उसी शौचालय को किसी अन्य व्यक्ति के प्रयोग करने से बीमारी लगने की संभावना बढ़ जाती है ।

4. बवासीर को जीवन शैली में परिवर्तन के द्वारा निम्न प्रकार ठीक किया जा सकता है –
1 – आहार – अत्यधिक तनाव के कारण कब्ज हो जाता है । जिससे बवासीर बढ़ने की संभावना होती है । अतः आहार में परिवर्तन करने से मल को नियमित और नरम रखने में मदद मिलती है । इसमें अधिकतर फाइबर खाना चोकर युक्त आटा, फलों और सब्जियों का सेवन करने से, 5 -6 लीटर पानी प्रतिदिन पीना चाहिए और कॉफीन के प्रयोग से बचें ।

2. भोजन में अधिक से अधिक तरल पदार्थों का उपयोग करे जैसे दही, छाछ आदि । जिसे कब्ज की समस्या न के बराबर होगी । कब्ज न होने से मल त्याग में कोई दिक्कत नहीं होगी ।

Purani Bawasir ka ilaaj.

बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज ।

आयुर्वेद में बवासीर का इलाज ( Bawasir ka ilaaj ) पंचकर्म पद्धति से इलाज किया जाता है जैसे नस्य, वमन एवं शोधन आदि । इन पद्धतियों में मरीज़ को औषधियों का सेवन करवाया जाता है । इसके अलावा क्षार सूत्र पद्धति से भी बवासीर का इलाज किया जाता है । ( इनके लिए हमारा पूर्व लेख बवासीर का कारण लक्षण व उपाय ) पढ़ सकते है । जर्नल ऑफ़ फार्मेसी एंड टेक्नोलॉजी पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार – बबासीर के इलाज के लिए कुछ जड़ी बूटियाँ भी हैं जो काफी फायदेमंद होती हैं । तो चलिए जानते है बवासीर के इलाज के बारे में –

1. कम वजन वाले व्यक्तियों को बवासीर होने की संभावना अधिक वजन वाले व्यक्तियों की अपेक्षा कम होती है, अतः वजन को नियंत्रित रखने का प्रयास करें ।
2. व्यायाम – नियमित व्यायाम करने से सभी प्रकार की बीमारियों में लाभ मिलता है, अतः प्रत्येक व्यक्ति को नियमित व्यायाम अवश्य करना चाहिए।
3. बिना केमिकल वाला एलोवेरा का जूस पीने से और एलोवेरा जैल बवासीर के मस्सों पर नियमित रूप से लगाने से पूर्ण आराम मिलता है ।

4. अमरूद प्रातः काल खाली पेट 250 ग्राम पके अमरूद खाने से कब्ज दूर होता है । यह प्रयोग दिन में दो बार करना चाहिए, इससे बबासीर के रोगियों को लाभ मिलता है।

तिल के बीज से बवासीर का रामबाण इलाज 

– इसका वैज्ञानिक नाम सेसमम इंडिकम है । यह खूनी बवासीर में अत्यंत उपयोगी होता है। इसे पीसकर मक्खन के साथ प्रयोग किया जाता है। 60 ग्राम बीज अच्छी तरह चबाकर खाने से भी बवासीर के रोगियों को लाभ मिलता है । तिल का तेल बवासीर के मस्सों पर लगाने से आराम मिलता है ।

6. जामुन – इसका वैज्ञानिक नाम साय जीजम जी क्यूमिनी है । इसके फल को दो-तीन माह तक नमक के साथ खाने से खूनी बवासीर समूल नष्ट हो जाता है । इसके फल को शहद के साथ खाने से भी लाभ मिलता है ।

7. नीम – नीम का तेल दिन में दो-तीन बार बवासीर के मस्सों पर लगाने से खुजली कम हो जाती है रोगी को बड़ा आराम मिलता है।

8. एलोवेरा – एलोवेरा का रस एक कप प्रति दिन 3 बार पीने से खुजली और सूजन को कम करने में मदद मिलती है ।

9. त्रिफला चूर्ण – त्रिफला का चूर्ण पेट की बीमारियों के लिए अमृत समान है। रात्रि में सोने से पूर्व तीन चम्मच चूर्ण पानी के साथ लेना हितकारी है । इससे न केवल बबासीर की बीमारी दूर होती है अपितु नेत्र ज्योति भी बढ़ती है ।

10. नारियल के तेल में थोड़ी सी पिसी हल्दी मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से कुछ दिन में आराम मिल जाता है ।

दही से बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज । Dahi se Bawasir ka ilaaj.

नारियल की जटाओं को जलाकर उसकी राख लगभग 5 ग्राम आधी कटोरी दही में मिलाकर सुबह और दिन में नियमित रूप से सेवन करने से बबासीर के रोगी को आराम मिलता है । यह मिश्रण लेने से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद रोगी को कुछ नहीं खाना चाहिए तभी यह दवा कारगर सिद्ध होता है।

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बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज –

1. सेब का सिरका – अपने कषाय गुणों के कारण रक्त वाहिनी संकुचित करने में मदद करता है । खूनी बवासीर में एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका डालकर दिन में दो बार पीने से और सिरके को रुई पर लगाकर गुदा में रखने से खुजली और जलन में राहत मिलती है ।

2. जैतून का तेल – जैतून के तेल में सूजन ठीक करने का गुण होता है । यह रक्त वाहिकाओं में आई सूजन को कम करता है ।

3. बादाम का तेल – शुद्ध बादाम का तेल रुई में भीगा कर बवासीर के मस्सों पर लगाने से लाभ मिलता है । इससे बवासीर के मस्सों की सूजन और जलन कम हो जाती है ।

4. नारियल का तेल – नारियल के तेल में हल्दी का पाउडर मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से भी आराम मिलता है।

5. अंजीर – एक गिलास पानी में तीन अंजीर भिगोकर सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से और ऊपर से पानी पी लेने से आराम मिलता है ।

6 . नींबू के रस में अदरक और शहद मिलाकर पीने से बबासीर के रोगियों को लाभ होता है ।

7. मट्ठा और अजवाइन – मट्ठा बबासीर में अमृत समान है। एक गिलास मट्ठे में एक चौथाई चम्मच अजवाइन का चूर्ण और आधा चम्मच काला नमक मिलाकर दोपहर के खाने के साथ सेवन करने से बवासीर में आराम होता है ।

8. पपीता – रात को भोजन में पपीता खाने से मल त्याग करने में आसानी होती है ।
9. पक्का केला पके केले को उबालकर दिन में 2 बार सेवन करने से इसके रोगियों को बहुत लाभ मिलता है ।

10. बाथटब में गर्म पानी डालकर 15 – 20 इसमें मिनट बैठने से बवासीर के दर्द और जलन में आराम मिलता है ।

पाइल्स के परहेज । Bawasir ke liye Parhej.

Bawasir ke ilaaj के लिए कुछ परहेज रखने की आवश्यकता होती हैं जैसे तला- भुना मिर्च मसाले युक्त खाना और जंक फूड का प्रयोग बिल्कुल न करें । बबासीर में अधिक खून बहने के कारण शरीर में खून की कमी हो सकती है । लंबे समय तक बीमार रहने और इलाज न करवाने के कारण कोलोरेक्टल कैंसर का भी कारण बन सकती है । इसलिए इसका तुरंत ही इलाज करवाना चाहिए ।

सर्जरी के बाद भी यह रोग अनेक बार हो जाता है, अतः घरेलू उपचार और बेहतर जीवनशैली अपनानी चाहिए । इससे इसके दोबारा होने की संभावनाएं क्षीण हो जाती है ।

बवासीर के लक्षण | Bawasir ke lakshan.

1. गुदा द्वार के बाहर मांस की गांठें जमा हो जाती हैं, जिन से खून बहने लगता है
2. मल त्याग करते हुए गुदाद्वार में बहुत दर्द होता है ।
3. मल निकलने के बाद श्लेष्म निर्वहन ( म्यूकस डिसचार्ज ) होता है ।
4. गुदाद्वार के आस पास घाव भी होने लगते हैं ।

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बवासीर की जांच | Piles test in hindi.

प्रोटो लॉजिस्ट या जनरल सर्जन से विचार-विमर्श कर लगभग 99 ℅ बबासीर का पता चल ही जाता है । लेकिन कुछ परिस्थितियों में यदि रोगी की आयु 50 वर्ष से अधिक है और उसका वजन घटता जा रहा हो, मल त्याग का नियम बदल रहा हो, तो ऐसी स्थितियों में कालोनो स्कोपी की जाती है ।

मलद्वार के पास मवाद आने पर MRI की आवश्यकता पड़ती है । एक शोध के अनुसार लगभग 50% भारतीयों को बबासीर की बीमारी होती है, जो अधिकांशतः दवा खाने और परहेज करने से दूर हो जाती है । केवल 10% मामलों में ही सर्जिकल ऑपरेशन की आवश्यकता होती है ।

बावासीर मस्से को जड़ से खत्म करने का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज ।

बवासीर उस समय पीड़ादायक होता है जब मस्से हो जाते हैं । यही कारण है कि इसे आम भाषा में मस्से की बीमारी भी कहा जाता है । गुदा के अंदर मस्से होने पर बहुत दर्द होता है । इन मस्सों के सूखने पर आराम मिलता है तो चलिए जानते है बवासीर के मस्से को जड़ से खत्म करने के उपाय | Bawasir ka ilaaj –

◆ हल्दी को सेहुड के दूध में मिलाकर बून्द बूंद मस्से पर लगाने से जल्दी सूखता है ।
◆ गाय का देसी घी व शहद मिलाकर मस्से पर लगाने से जल्दी झड़ जाते हैं ।

◆ नीम के पत्तो को देशी घी में भूनकर थोड़ा कपूर का मिश्रण करके प्रतिदिन गुदाद्वार पर बांधने या लगाने से मस्से सूखकर जल्दी झड़ जाएंगे ।

◆ 40 ग्राम अफीम व 20 ग्राम नीलाथोथा को 40g सरसों के तेल में पकाकर ठंडे होने के बाद प्रतिदिन मस्से पर लगाने से राहत मिलती है । इसी प्रकार आक व सहजन के पत्तो का महरम बनाकर मस्से पर लगाने से राहत मिलती है ।

बवासीर के मस्से को हटाने की क्रीम | Bawasir ke masse ko hatane ki cream.

जब गुदा के भीतर मस्से हो जाते है तो मल त्याग के दौरान असहनीय दर्द होता है । इन पर खुजली व जलन भी होती है । इन प्रॉब्लम से निजात पाने के लिए कुछ ऐसी क्रीम है जिंनका उपयोग चिकित्सा सलाह से कर सकते है । इन Piles cream के नाम इस प्रकार से है –

1. Piles Cure Cream
2. Recticare Anorectal Cream
3. Shield Rectal Ointment
4. Equate Hemorrhoid Cream
5. Tronolane Hemorrhoid Cream आदि इन क्रीम को नियमित रूप से सुबह शाम लगाने से न केवल दर्द, जलन व खुजली से राहत मिलती है और मस्से भी जल्दी सूख जाते है ।। डॉ. राजेश कुमार जैन, श्रीनगर गढ़वाल उत्तराखंड ।।

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