टाइफाइड के लक्षण । Typhoid fever symptoms in hindi.

iTyphoid fever symptoms in hindi.
Typhoid fever symptoms in hindi. टाइफाइड एक गंभीर संक्रामक बीमारी है । यह संक्रमण साल्मोनेला एन्टेरिका सेरोटाइप टाइफी नामक बैक्टीरिया से होता है । यह साल्मोनेला पैराटाइफी ( Salmonella typhi ) बैक्टीरियम से भी फैलता है । यह बैक्टीरिया पानी और भोजन के माध्यम से शरीर के भीतर प्रवेश करता है ।

Typhoid यह एक संक्रमण रोग है इसके लक्षण ( Typhoid fever symptoms in hindi. ) नजर आने पर तुरंत चिकित्सक के पास जाना चाहिए ताकि परिवार में कोई अन्य व्यक्ति को इंफेक्शन न हो । देरी होने पर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है । टाइफाइड के शुरुआत में तेज बुखार आना पेट में दर्द होना आदत से आना शरीर का टूटना आदि इसके मुख्य लक्षण है । तो चलिए जानते है टाइफाइड के लक्षण । Typhoid fever symptoms in hindi.

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टाइफाइड क्या है ? Typhoid meaning in hindi.

टाइफॉइड एक प्रकार का गैस्ट्रोइंटेस्टिनल इंफेक्शन ( Gastrointestinal infection) है । जो एस. टाइफी ( Salmonella typhi ) के कारण होता है। एस. टाइफी बैक्टीरिया दूषित पानी या भोजन के जरिए आंतों में प्रवेश करता है । वहां लगभग एक से तीन सप्ताह तक रहने के बाद आंतों की दीवार ( Intestinal wall ) के जरिए रक्तप्रवाह में फैल जाता है। टाइफॉइड बैक्टीरिया रक्त के माध्यम से अन्य ऊतकों (Tissues) और अंगों (Organs) में फैलकर कोशिकाओं में इस प्रकार से छिप जाता है कि प्रतिरक्षा कोशिकाएं पता नहीं लगा सकती है ।

Salmonella typhi बैक्टीरिया फैलने का मुख्य कारण प्रदूषित पानी पीना  व संक्रमित और सुबह का शाम को, शाम का सुबह अर्थात बासी भोजन का सेवन करना टाइफाइड होने की मुख्य वजह है। अपच, कफ, गैस बनना तीनों दोषों के प्रकोप से टाइफाइड होता है। टाइफाइड एक संक्रामक रोग है। यही कारण किसी एक सदस्य को टाइफाइड होने पर अन्य घर सदस्यों से भी टाइफाइड होने का खतरा रहता है।

मौसम में परिवर्तन के कारण बुखार बहुत परेशान करता हैं। टाइफाइड में तेज बुखार आता है। जो सेलमोनेला टाइफाई बैक्टीरिया द्वारा फैलता है। यह बैक्टीरिया खाने या पानी के माध्यम से मनुष्य के शरीर में पहुंचता है। एक दूसरे का झूठा भोजन करने से इसका वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है।

टाइफाइड होने के कारण | Typhoid causes in hindi.

टाइफाइड बुखार साल्मोनेला टाईफी बैक्टीरिया से संक्रमित भोजन या पानी के सेवन से होता है, या टाइफाइड ग्रस्त व्यक्ति के निकटतम सम्पर्क से टाइफाइड की संभावना बन जाती है। किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ खाने-पीने से भी होता है।

वहीं दूषित खाद्य पदार्थ से भी ये संक्रमण हो जाता है। हमारे शरीर में पहुँचकर टाइफाइड के बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है। शरीर टूटने लगता है। बुखार का आना अलस्य का बढ़ना अर्थात टाइफाइड का आगमन।

टायफाइड के लक्षण | Typhoid fever symptoms in hindi.

टाइफाइड एक प्रकार का इंफेक्शन है जिनकी शुरुआत बुखार से होती है । जिसे ज्वर टाइफाइड कहा जाता है। इनके प्रमुख लक्षण इस प्रकार है – Typhoid fever symptoms in hindi.

• ज्वर या बुखार ( 104℃ तक )
• संक्रमण बढ़ने के साथ साथ भूख कम हो जाती है।
• शरीर का टूटना, दर्द होना, सिर दर्द होना।
• ठण्ड के साथ हल्का बुखार ( fever ) फिर तेज बुखार का आना ।
• सुस्ती एवं आलस्य का अनुभव होना।
• कमजोरी या थकान महसूस होना।
• खांसी या गले में खराश रहना ।
• सीने में दर्द एवं जलन ।
• छाती के नीचे वाले हिस्से में लाल रंग के चकते आदि । लक्षण नजर आने पर तत्काल डॉक्टर से सम्पर्क करें ।

बच्चों में टायफाइड के लक्षण । Typhoid fever symptoms in kids.

टाइफाइड जैसी संक्रमणित बीमारी बच्चों में जल्दी पनपती है क्योंकि बच्चे खानपान एवं साफ सफाई का ठीक से ध्यान नहीं रखते हैं । या यूं कहें कि इन सब चीजों के बारे में उनकी समझ कम होती है । जैसे झूठा खाना पीना आदि । इस वजह से बच्चे टाइफाइड के शिकार हो जाते है और इनके लक्षण इस प्रकार है – Typhoid fever symptoms in kids.

बुखार – बुखार टाइफाइड का आम लक्षण है यह Typhoid fever हल्के बुखार से तेज बुखार होता है। जो लगभग 24 घण्टे तक उतरने का नाम ही नहीं लेता है ।

पेट दर्द एवं दस्त होना – टायफाइड के शिकार होने पर बच्चों के पेट मे दर्द होने के साथ साथ दस्त भी लगती है ।

थकान – Typhoid fever आने पर बच्चों / बड़ो में थकान एवं कमजोरी सी महसूस होती है । स्किन पर गुलाबी रंग के चकते नजर आते है विशेष रूप से छाती के नीचे वाले हिस्से में ।

भूख कम लगना – टाइफाइड के दौरान बच्चों को भूख कम लगती है । साथ ही साथ गले में खराश भी रह सकती है ।

अन्य लक्षणों में वजन का घटना, सिर दर्द, उल्टी आदि लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें ।

Typhoid fever treatment in Hindi.

टाइफाइड का इलाज | Typhoid treatment in hindi.

टायफॉइड के लक्षण या बुखार ( Typhoid fever symptoms) नजर आने के बाद आवश्यक दवाओं के साथ साथ कुछ टेस्ट किये जाते है ताकि टाइफाइड की पुष्टि हो इन टेस्ट में ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, बोर्न मेरो आदि मुख्य है ।

टाइफाइड का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं जैसे सिप्रोफ्लैक्सिन (ciproflaxin), सेफ्ट्रिएक्जोन (ceftriaxone) आदि । इनके अलावा एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin) भी विकल्प है । हालांकि यह एंटीबायोटिक दवा गर्भावस्था में नहीं दी जाती है । वही एम्पीसिलीन, क्लोरैम्फेनिकॉल, ट्राइमेथोप्रिम एवं सल्फामेथोक्साज़ोल जैसी एंटीबायोटिक दवाएं भी मुख्य हैं।

वही डाइटरी सप्लीमेंट्स लेने वाले मरीजों को ओरल रीहाइड्रेशन थेरेपी दी जाती है । जिससे दस्त के कारण होने वाले फ्लूइड नुकसान का संतुलन बनाया जा सके । इसी प्रकार अधिक उल्टी वाले मरीजों को कुछ न खाने – पीने के कारण संक्रमण से बचाने के लिए मरीज़ को हाइड्रेटेड रखने के लिए IV आधारित फ्लुइड्स एवं मेडिसिन इंजेक्ट की जाती हैं।

टाइफाइड होने पर समय पर इलाज न लेने या अधिक प्रभावित होने पर आंतो का क्षतिग्रस्त यानी छेद होने पर आंतों की सर्जरी द्वारा इलाज किया जाता है ।
टाइफाइड वेक्सीन भी एक बेहतरीन विकल्प है । यह टीके 2 प्रकार के होते है पहला निष्क्रिय एवं दूसरा सक्रिय ( live ) इसके अलावा ओरल वैक्सीन भी उपलब्ध है जो बच्चों को दिया जाता है ।

टाइफाइड के नुकसान । Typhoid Se Nuksan.

टाइफाइड जैसे संक्रामक रोग मरीज़ को कमजोर करने के साथ साथ लापरवाही करने पर भारी क्षति कर सकते है । हालांकि इनका मुख्य प्रभावित अंग पाचन तंत्र यानी आंते है । टाइफाइड के मुख्य नुकसान या जोखिम इस प्रकार से है ।

● आंते क्षतिग्रस्त यानी छेद होना ।
● टाइफाइड से फेफड़ों को नुकसान होता है ।
● टाइफाइड लिवर को प्रभावित करता है ।
● टाइफाइड से वजन कम होने के साथ साथ शारिरिक कमजोरी आती है जिसे रिकवर होने में समय लगता है ।

यदि टाइफाइड के दौरान खानपान की लापरवाही एंड अन्य सावधानियों का पालन नहीं किया जाता है तो इनके जोखिम बढ़ सकते है । इतना ही नहीं इनके प्रभाव लम्बे समय तक परेशान कर सकते है । इसलिए आवश्यक है समय समय पर डॉक्टरी परामर्श लेना अनिवार्य समझे ।

टाइफाइड में क्या नहीं खाना चाहिए । Typhoid Me Kya Nahi Khana Hai.

रहन सहन का बदलाव, खान पीन का तरीका बदल जाता है । हम चलते फिरते ठेलों से खुले खाद्य पदार्थ खरीद कर खा लेते हैं। ये हमारे लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं। खाने पीने के तरीकों में बदलाव अत्यंत आवश्यक है। जैसे –

• प्याज, लहसुन तेज मसाले वाले खाद्य पदार्थों से दूर रहें।
• फास्ट फूडस में सॉस, सिरका का अधिक प्रयोग होता है इनसे दूर रहें।
• भारी भोजन का सेवन नहीं करें जिससे आपके शरीर में गैस नामक बीमारी का जन्म न हो।
•  फाइबर युक्त भोजन जैसे गेंहू, चावल आदि अपनी डाइट में शामिल करें।
• मक्खन, घी, पेस्ट्री, तले हुए आहार, मिठाईयाँ सभी को बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।
• रेडीमेट भोजन का त्याग करें।
• पेट भरकर कुछ भी न खायें।
• ध्यान रखें कि ऐसा खाद्य पदार्थ न खाये जो देर से पचता हो।
•  टाइफाइड में एलकोहल, तंबाकू, गुटखा, चाय, कॉफी का सेवन निषेद्ध है ।

टाइफाइड के बचाव । Typhoid se kaise bache.

टाइफाइड जैसे संक्रमणित बीमारी से बचने के लिए कुछ सावधानियां रखने की आवश्यकता होती है । जो इस प्रकार है –
• अपने हाथ पैरों को नीम साबुन या डिटोल साबुन से धोए।
• अपने आस पास के स्थान को स्वच्छ रखें।
• आरोह अथवा एक्वागार्ड का जल पीने के काम में लें या पानी को उबाल कर ठंडा करके पीएंं।
• अचार  का सेवन न करें।
• सात्विक एवं शुद्ध गरम भोजन का सेवन‌ करें।
• संक्रमित रोगी से अधिक मेल मिलाप न करें। पर्याप्त दूरी बनाएं।
• संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बर्तन तथा दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुओं को अलग रखना ।
• रोगी के साथ भोजन नहीं करें।
• परिवार जन से दूरी बना कर रखें।
• बाजरे का दलिया, गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करें।
• टाइफाइड के लिए टीकाकरण करवा लें।

टाइफाइड से बचने के घरेलू उपाय | Typhoid home remedies in hindi.

घरेलू नुक्से टाइफाइड में बहुत ही उपयोगी होते हैं हमारे बड़े बुजुर्गों ने इस पर बहुत ही गहन अनुभव के आधार पर घरेलू नुक्सा को बनाया है जो अधिकार है लोग उनका उपयोग करते हैं और लाभ प्राप्त होता है। जैसे –

• तुलसी मरवा के पत्तों का रस निकालकर की सेवन करने से टाइफाइड में आराम मिलता है।
• मरवा के फूलों को चलते हुए कंधे पर डालने से उसकी धोनी का सेवन करने से टाइफाइड में लाभ मिलता है।
• खूब कला को मुनक्के के अंदर रख के तवे पर हल्का सा गर्म करें और उसको दिन में तीन टाइम खाने से टाइफाइड में आराम मिलता है
• टाइफाइड में फलों का रस का सेवन करने से डिहाइड्रेशन जैसी समस्या का निदान होता है डिहाइड्रेशन के कारण टाइफाइड जैसी बीमारी पनपती है
• सेब, टमाटर, अदरक का जूस बनाकर पीने से बुखार में आराम मिलता है
• पीने के पानी को उबालते समय २/३ लोंग डालकर उबालने से रोगी को आराम मिलता है। उपचार को एक हफ्ते लगातार करें।

• टाइफाइड में पीड़ित को यदि बुखार तेजी से आता है, यह कई दिनों तक बना रहता है, रोगी के शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए ठण्डे पानी की पट्टियां रोगी के माथे, पैर और हाथों पर रखने से ज्वर हलका हो जाता है।

• गुन गुने पानी के साथ शहद का सेवन रोगी के लिए लाभकारी होता है।
डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है। बिना चिकित्सक के परामर्श के कोई भी दवाई नहीं लेनी चाहिए जैसा डॉक्टर आपको सलाह दे उसके अनुसार नियम पूर्वक हमें अपनी दवा का सेवन करना चाहिए अन्यथा छोटा सा संक्रमण एक बड़ी बीमारी बन सकती है क्योंकि इसमें आते भी इफेक्टिव होती है तेज बुखार आता है शरीर के अंग प्रभावित होते हैं।

टाइफाइड को जड़ से खत्म करने का इलाज । Typhoid fever symptoms.

टाइफाइड को जड़ से खत्म करने के लिए कुछ उपाय किये जाते है । ये उपाय आपके घर में उपस्थित है बस सही इस्तेमाल से Typhoid fever symptoms से निजात मिल सकती है तो चलिए जानते है –

तुलसी – टाइफाइड होने तुलसी के रस में सूरजमुखी का रस मिलाकर दिन में 3 से 4 बार पीने पर लाभ होता है । तुलसी की पत्तियों का रस भी फायदेमंद होता है ।

लहसुन – लहसुन एंटी बायोटिक, एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते है । इतना ही नहीं इनकी तासीर भी गर्म होती । लहसुन की 5 – 7 कली को घी में फ्राई करके इसमे सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से लाभ होगा ।

सेब का रस – सेब भी पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं जो न केवल टाइफाइड से निजात दिलाने के लिए उपयोगी है बल्कि कमजोरी से दूर करता है । इनके लिए सेब के जूस में अदरक मिलाकर पीने से लाभ होगा ।

इनके अलावा आप लौंग को पानी में उबाल कर पीने से Typhoid fever symptoms से राहत मिलती है । वही शहद भी टाइफाइड के लिए बहुत उपयोगी है ।

टाइफाइड में नहाना चाहिए या नहीं ? Typhoid fever symptoms.

टाइफाइड रोगियों को नहाना चाहिए या नहीं यह एक अहम सवाल सभी मरीज़ों के मन होता है । लेकिन आपको बता दें कि जब भी Typhoid fever आता है तो बॉडी का टेम्परेचर बढ़ जाता है । जिसे पसीने से शरीर चिपचिपा हो जाता है ऐसे में नहाना गलत होगा । या यूं कहें कि नुकसानदायक हो सकता है ।

टायफॉइड बुखार के दौरान कपड़े को पानी से भिंगोकर शरीर पोछ सकते है । बुखार उतरने के बाद नहाना उचित रहेगा ।

आम धारणा है कि टाइफाइड में स्नान नहीं करना चाहिए। स्नान करने से टाइफाइड बिगड़ जाता है। लेकिन डॉक्टर्स की सलाह से टाइफाइड में स्नान करते रहना चाहिए। जिससे शरीर में आलस्य ना आए। स्फूर्ति बनी रहे ।

ठंडे पानी से नहीं करके गुनगुने पानी से स्नान कर लेना चाहिए। यदि आपके शरीर में ताकत नहीं है तो गीले कपड़े से शरीर को पोंछकर स्वच्छ कर देना चाहिए। जिससे हमारे शरीर से आलस्य दूर हो, मन प्रसन्न रहें ।। आभा मिश्रा कोटा ।।

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