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हेपेटाइटिस क्या है क्यों होता है ? hepatitis in hindi.

Hepatitis in hindi.

Hepatitis in hindi.  आज भाग दौड़ भरी जिंदगी में हर कोई व्यक्ति किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त हैं । दूषित खान पान और अव्यवस्थित जीवन शैली तथा पर्यावरण प्रदूषण के कारण नई नई बीमारियां सामने आ रही है । जो बहुत ही घातक और जानलेवा साबित हो रही हैं । हेपेटाइटिस भी उनमे से एक है । WHO ने 2030 तक इसे खत्म करने का लक्ष्य रखा गया । इस रोग के प्रति जनजागरूपता के लिए प्रति वर्ष 28 जुलाई के दिन World hepatitis day मनाया जाता है ।

हेपेटाइटिस एक बहुत ही घातक रोग है । इनका मुख्य कारण दूषित भोजन, पानी है । यह बीमारी 5 प्रकार की होती है । हालांकि इनका टीका भी प्रभावी है इसलिए छोटे बच्चों के टीकाकरण की सूची में शामिल है । मगर हमें इनके संक्रमण, लक्षणों और बचावो के बारे में जानकारी होनी चाहिए। जिससे हम लंबे समय तक स्वास्थ्य लाभ ले सके। आज हम एक ऐसी घातक और जानलेवा बीमारी हेपेटाइटिस के बारे में विस्तार से जानकारी बताने जा रहे है । जो इस प्रकार है –

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हेपेटाइटस क्या है ? What is hepatitis.

वायरस बहुत ही सूक्ष्म होता है। जो हर प्रकार की परत को भेदने में सक्षम होता है । जितनी भी वायरस जनित बीमारियां हैं वे सभी घातक होने के साथ-साथ लाइलाज भी रही हैं। जैसे कोरोना, टाइफाइड, मलेरिया, हेपिटाइट्स । इन वायरसो के साथ मनुष्य को समझौता करके जीवन जीने की आदत सी डालनी पड़ती है। इसी प्रकार की वायरस से उत्पन्न बीमारी है, हेपेटाइटिस ।

हेपेटाइटिस एक बहुत ही घातक और जानलेवा बीमारी है । जो यकृत में सूजन आने से होती है। इससे यकृत का आकार बढ़ जाता है। उसमें तेज जलन होने लगती है । यकृत यदि पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाय तो यह कैंसर का कारण भी बन जाता है । जो बहुत ही खतरनाक है। यह बीमारी मुख्यतः यकृत ( Liver ) से सम्बंधित है।

यह मनुष्यों सहित बन्दर प्रजाति के जानवरों के लिवर पर आक्रमण करती है । यह हेपेटाइटस सीरम नाम के वायरस से फैलती है । एशिया और अफ्रीका महाद्वीप में तो यह महामारी का रूप ग्रहण कर चुकी है। इसके वायरस 5 प्रकार के वेरियंट्स में मिलते हैं ।1hav, 2 hbv, 3 hcv, 4 hdv, 5 hev आदि ।

हेपेटाइटिस के प्रकार | Type of hepatitis.

हेपेटाइटिस मुख्यतः लीवर का रोग है। जिसमें लीवर क्षतिग्रस्त हो जाता है। उसमें सूजन आ जाती है । लिवर में संक्रमण बढ़ जाता है । तब यह हेपेटाइटिस के नाम से जाना जाता है । इसके संक्रमण की स्थिति के आधार पर निम्न 5 प्रकार हो सकते हैं –

हेपिटाइटिस ‘ए’- hav वायरस | hepatitis – A in hindi.

यह एक प्रकार का वायरस है। जिसका संक्रमण कम गंभीर होता है । यह हेपेटाइटिस का प्रारंभिक चरण होता है । इसका संक्रमण कम समय के लिए रहता है। यह कुछ समय बाद स्वत: ही ठीक हो जाता है । यह बीमारी संक्रमित भोजन या दूषित पेय पदार्थों के पीने से फैलती है। इसमें खानपान संबंधी स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।

हेपेटाइटिस ‘बी’ – hbv वायरस | hepatitis – B in hindi.

यह वायरस गंभीर लक्षणों वाला होता है । इसका संक्रमण अधिक दिनों तक टिका रहता है । इससे लिवर में बहुत क्षति होती है । इसका संक्रमण लिवर सिरोसिस नामक बीमारी को जन्म देता है । जो एक प्रकार का कैंसर होता है। इसके संक्रमण का लोगों को पता भी नहीं चलता। क्योंकि यह सामान्य लक्षण नहीं दिखाता है।

जब तक रोगी को पता चलता है, तब तक लिवर 90% खराब हो गया होता है। इसका अंतिम इलाज लिवर प्रत्यारोपण होता है। लेकिन इसे कुछ हद तक दवाओं और टीकाकरण के माध्यम से कम किया जा सकता है। 2017 में बनी विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक हेपेटाइटिस बी से संबंधित चार करोड़ लोग हैं । यह दो प्रकार का होता है ।
(A ) तीव्र हेपेटाइटिस – यह संक्रमण तीव्र गति से बढ़ता है । यह 1 से 4 महीने के अंदर अपने लक्षण दिखाना शुरू कर देता है। इसे फूलमिनेंट संक्रमण भी कहते हैं।

(B) क्रॉनिक हेपिटाइटिस – यह 6 माह से अधिक समय तक रहता है। यह पुराना संक्रमण होता है। इसका इलाज संभव नहीं है । अंतिम इलाज के रूप में यकृत का प्रत्यारोपण ही किया जाता है।

हेपेटाइटिस ‘सी’ – hcv वायरस | hepatitis – C in hindi.

यह संक्रमण भी हेपेटाइटिस बी की तरह ही घातक और खतरनाक होता है। इसका संक्रमण भी दीर्घकालिक बना रहता है । यह छुपकर चुप चाप यकृत पर वार करता है। सामान्य तौर पर इसके लक्षण सामने नहीं आते हैं। भारत में इससे संक्रमित लोगों की संख्या लगभग 1.2 करोड़ लोग हैं। यह हस्तांतरित होने वाला रोग है।

हेपेटाइटिस सी के लक्षण । Hepatitis c symptoms in hindi.

हेपेटाइटिस सी के लक्षण रोगी के सम्पर्क में आने के 15 से 20 दिन में दिखाई देने लगते है । हालांकि इनके लक्षण हल्के फुल्के दिखाई देते है । जैसे – फ्लू, पीलिया आदि ।
● जॉइंट पैन
● मांशपेशियों में दर्द एवं थकान
● फीवर
● भूख की कमी
● मतली होना
● स्किम पर खुजली
● आंखों में पीलापन एवं डार्क कलर में पेशाब आना आदि ।

हेपेटाइटिस ‘डी’ hdv वायरस | hepatitis – D in hindi.

यह हेपेटाइटिस का ही एक प्रकार है, जो उन रोगियों में होता है । जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी के शिकार होते हैं । हेपेटाइटिस डी वायरस के संक्रमण में आने से उनके संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। जिसे जिसे हेपेटाइटिस डी के नाम से जाना जाता है।

हेपेटाइटिस ‘इ’- hev वायरस | hepatitis E in hindi.

हेपेटाइटिस ए और इ का संक्रमण कम खतरनाक होता है। यह रोग ज्यादातर स्वयं ही सही हो जाता है। लिवर में एक ऐसी क्षमता होती है। जो वह स्वयं ही रिकवर होता रहता है । इससे ग्रस्त व्यक्ति को भूख कम लगती है। पाचन तंत्र खराब हो जाता है । यह सामान्य उपचार करने से व अपने खान-पान और रहन-सहन में बदलाव करने से अपने आप ठीक हो जाता है।

हेपेटाइटिस के लक्षण क्या है ? hepatitis symptoms in hindi.

हेपेटाइटिस एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। कई बार इसके लक्षण भी दिखाई नहीं देते हैं ।लेकिन फिर भी इसके निम्नलिखित लक्षण दिखाई पड़ते हैं।

1. रोगी को बार बार बुखार आने लगता है।
2. रोगी अपने दैनिक कामकाज में हमेशा थकान महसूस करने लगता है।
3. रोगी के मूत्र का रंग पीला और गहरा हो जाता है।
4. त्वचा का रंग सफेद हो जाता है। कभी-कभी उसमें सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं।
5. रोगी को खुलकर भूख नहीं लगती है।
6. रोगी का हमेशा पेट खराब रहता है । वह खुलकर शोच नहीं जाता है।
7. उसका जी हमेशा मितला हुआ रहता है । कई बार उल्टियां भी हो जाती हैं।

हेपेटाइटिस को जांचने के टेस्ट कौन-कौन से हैं ? hepatitis test in hindi.

हेपेटाइटिस रोग को जानने के लिए उसके निम्नलिखित टेस्ट करवाए जाते हैं । इन जांचो के माध्यम से डॉक्टर यह अंदाजा लगाते हैं कि संक्रमण का खतरा कितना ज्यादा है ? और कितना कम है ? के अनुसार हेपेटाइटिस का ट्रीटमेंट किया जाता है।

1. बी सर्फेस एंटीजन टेस्ट
2. बी कोर एंटीजन टेस्ट
3. हेपेटाइटिस बी सरफेस एंटीबॉडी टेस्ट
4. लिवर बायोप्सी टेस्ट
5. सोनोग्राफी जांच आदि ।

हेपेटाइटिस होने के कारण | causes of hepatitis.

हेपेटाइटिस की बीमारी निम्नलिखित असावधानियां बरतने से हो सकती है । अतः जितना हो सके सावधानियां बरतें। हेपेटाइटिस के कारण इस प्रकार है –
1. शराब का अधिक मात्रा में सेवन करने से हेपेटाइटिस होने की संभावना रहती है । क्योंकि एल्कोहल यकृत को नुकसान पहुंचाता है।
2. किसी अंग के प्रत्यारोपण की सर्जरी से भी हेपेटाइटिस होने की संभावना रहती है।

3. संक्रमित रेजर के इस्तेमाल से भी हेपेटाइटिस का संक्रमण हो सकता है।
4. संक्रमित इंजेक्शन की सुईं से भी हेपेटाइटिस का संक्रमण हो सकता है।
5. दवाओं के साइड इफेक्ट से भी यकृत में संक्रमण जन्म ले सकता है।

6. असुरक्षित यौन संबंध बनाने से भी संक्रमण का खतरा रहता है। क्योंकि संक्रमित स्त्री के साथ संबंध बनाने से वायरस हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है।

7. हेपेटाइटिस संक्रमित रक्त चढ़ाने से भी वायरस रक्त के साथ प्रवेश कर सकता है । और हेपे टाइटस जैसी गंभीर बीमारी को आमंत्रित कर सकता है।
8. संक्रमित मां से होने वाले बच्चे में भी हेपेटाइटिस होने का खतरा होता है।

हेपेटाइटिस का टीका | hepatitis vaccines in hindi.

हेपेटाइटिस का टीका पूर्ण रूप से प्रभावी है । यह टीका सरकारी अस्पतालो में निःशुल्क लगाया जाता है । मगर निजी अस्पताल में शुल्क के साथ लगाया जाता है । जो 50 रुपये से लेकर 500 तक लग सकती हैं ।

टीके का नाम – हेपेटाइटिस “बी” वैक्सीन
हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लेने की उम्र, समय व मात्रा-
उम्र मात्रा समय इस प्रकार है –
उम्र – 0 से 10 वर्ष के बच्चे 5ml

अवधि – 1 से 6 माह बाद
उम्र – 11 से 15 वर्ष 10mcg

अवधि – 4 से 6 माह बाद ।
उम्र – 16 से अधिक उम्र 10 mcg

अवधि – 1 से 6 माह बाद
डायलिसिस रोगियों को 40 mcg 1 से 6 माह बाद ।

हेपेटाइटिस’ बी’ के उपचार में सहायक दवाइयां | hepatitis B treatment in hindi.

सामान्य हेपेटाइटिस रोग में दवाइयों की आवश्यकता सामान्यत: नहीं होती है। लेकिन इसका संक्रमण अधिक बढ़ जाने पर कुछ दवाओं के उपयोग से इसके खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है जो इस प्रकार हैं –
1. Antiviral drugs
2. antivir -1mg tablet
3. antivir-5mg tablet
4. epivir
5. hepsera
6. viread
7. Interferon alpha -inj.

हेपेटाइटिस’ का टीका कौन लगवा सकता है ?

1. वे सभी बच्चे टीके लगवाने के पात्र होते हैं। जिनकी उम्र 18 वर्ष हो गई हो और उन्हें पहले टीका नहीं लगाया गया हो।
2. जिन रोगियों को डायलिसिस की प्रक्रिया से बार-बार गुजरना पड़ रहा हो उन्हें ठीक है की आवश्यकता होती है।

3. जिन रोगियों ने किसी अंग का प्रत्यारोपण करवाया हो । उन्हें टीका लगवाना चाहिए।
4. ऐसे रोगी जिन्हें बार-बार खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती हो।
5. जो लोग नशे के आदी होते हैं। इसके लिए उन्हें बार-बार इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। उन्हें भी वेक्सीन लगनी चाहिए।

6. वे स्वास्थ्य कार्यकर्ता जो अक्सर ऐसे रोगियों के संपर्क में रहते हैं उन्हें भी टीकाकरण की आवश्यकता पड़ती है।
7. सेक्स वर्कर्स के लिए इसकी आवश्यकता होती है।
8. कैंसर रोगियों के लिए भी टीकाकरण आवश्यक होता है।
9. जिन बच्चों का जन्म हेपेटाइटिस बी संक्रमित माताओं से हुआ हो उन्हें भी टीके की आवश्यकता पड़ती है।

हेपेटाइटिस से बचाव । hepatitis prevention in hindi.

हेपेटाइटिस एक ऐसा घातक रोग है जो संक्रमण के कारण फैलता है । मगर यह हवा, पानी एवं अन्य तरीकों नहीं बल्कि संक्रमणित व्यक्ति के रक्त लेने, उपयोग में ली गई इंजेक्शन से फैलता है । इसी प्रकार स्तनपान भी फैलने का कारण है तो चलिए जानते बचाव के बारे में –

● यौन संबंध स्थापित करने से पहले कंडोम का इस्तेमाल करें ।
● संक्रमणित व्यक्ति का रक्त न चढ़ाए ।
● किसी दूसरे की कंघी, टूथपेस्ट एवं सुई का इस्तेमाल करने से परहेज़ करे ।

● संतुलित आहार एवं शुद्ध जल का उपयोग करें ।
● टैटू बनवाने एवं कान में छेद करने में सुरक्षित उपकरणों का प्रयोग करे ।
● धूम्रपान एवं मदिरापान से दूर रहे ।

निष्कर्ष – हेपेटाइटिस बीमारी संक्रमण से फैलती है । दूषित खान पान से इसका संक्रमण बढ़ता है। इसके लिए व्यक्ति को अपने सहन सहन अपने खाने-पीने की वस्तुओं की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ताकि इस भयंकर बीमारी के संक्रमण से बच सकें । हम स्वस्थ रहकर अपने जीवन का आनंद ले सकें। समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच भी कराते रहें और इंटरनेट आदि पर Hepatitis के महत्वपूर्ण लेखों का भी अध्ययन करते रहे । ताकि हमें ऐसे खतरनाक रोगों के बारे में जानकारी मिल सके।। रामकुमार प्रजापति अलवर, राजस्थान ।।

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