श्वेत रक्त कोशिकाऐं ( डब्ल्यूबीसी ) क्या होता है । WBC in hindi.

WBC in hindi.

WBC in hindi. श्वेत रक्त कोशिकाओं ( WBC ) को ल्यूकोसाइट या श्वेत कणिका भी कहा जाता है । खून का एक सेलुलर घटक जिसमें हीमोग्लोबिन की कमी होती है । इनमें एक नाभिक होता है जो सदा चलायमान रहता है । और संक्रामक एजेंटों को नष्ट करके, अनावश्यक सामग्री और सेलुलर कचरे को अंतर्ग्रहण करके संक्रमण और बीमारी से शरीर की रक्षा करता है ।

श्वेत रक्त कोशिका हमें संक्रमित होने से बचाने के साथ ही चोट लगने पर ठीक होने में हमारी सहायता करने के लिए हमारे शरीर में उपलब्ध प्रतिरक्षा कोशिकाएँ उत्तर दाई होती हैं । विशेषज्ञों के लिए सामान्य ऊतक में और चोट लगने के बाद या संक्रमित होने के मध्य माइक्रोस्कोप के नीचे इस प्रकार की कोशिकाओं को देखना सामान्य है ।

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RBC vs WBC in hindi.

प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में उपलब्ध लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) की भाँति सफेद रक्त कोशिकाएँ  (White Blood Cells) भी होती हैं, उनका महत्व उतना ही होता है जितना कि लाल रक्त कोशिकाओं का होता है । लाल रक्त कोशिकाएँ हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं ।

प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी तरह के संक्रमण से बचाए रखने में इनका अत्यधिक योगदान होता है । किसी भी व्यक्ति के शरीर में इसकी कमी होने पर उस व्यक्ति को अनेकों प्रकार की बीमारियाँ आसानी से घेर लेती हैं, अनेक बार इनकी कमी के कारण नज़ला-जुकाम जैसी सामान्य सी बीमारी से भी जान जाने का खतरा तक हो सकता है ।

WBC क्या होता हैं । WBC full form in hindi.

WBC का पूरा नाम – White Blood Cells है । इसे हिन्दी में सफेद रक्त कोशिका कहते हैं । WBC रक्त में पाया जाने वाला एक ब्लड सेल है, जो दिखने में अमीबा की तरह होता है । इसमें केन्द्रक नहीं पाया जाता है । Wbc का निर्माण भी RBC की भाँति अस्थि-मज्जा में ही होता है । किन्तु कभी-कभी इसका निर्माण यकृत , लिम्फ नोड, और प्लीहा में भी हो जाता है ।

WBC को व्हाइट ब्लड सेल, ल्यूकोसाइट या श्वेत रक्त वाहिका भी कहा जाता है । ये भी खून का एक कोशिकीय घटक है । इसमें एक नाभिक होता है, किन्तु आर.बी.सी.- रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाओं ) की भाँति हीमोग्लोबिन नहीं होता । यह वाइरस, बैक्टीरिया, रोगाणु आदि जैसे संक्रामकों को समाप्त करने के लिए एंटीबॉडी का निर्माण करता है ।

Wbc की संख्या | Normal WBC count by age.

प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में उपलब्ध ये कोशिकाएँ प्रत्येक क्षण हजारों की संख्या में जन्म भी लेती हैं और नष्ट भी होती रहती है । प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति के प्रतिघन मिलीलीटर रक्त में ये कोशिकायें 5000 से 11,000 तक की संख्या में होती हैं ।

ये प्रत्येक व्यक्ति में उनके स्वास्थ्य के अनुसार भिन्न – भिन्न हो सकती हैं । कैंसर, एड्स और हेपेटाइटिस आदि रोगों में सफेद रक्त कोशिकाओं की अलग -अलग संख्या हो सकती है । अच्छे आहार और विटामिन की दवाओं की सहायता से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या को आसानी से बढ़ाया जा सकता है ।

WBC के प्रमुख कार्य | wbc se kya hota hai.

किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में स़फेद रक्त कोशिकाओं ( WBC ) की संख्या 5,000 से 11,000 प्रति माइक्रोलीटर होती हैं । ये कोशिकाएं बाहरी संक्रमण से हमारे शरीर की रक्षा करने के साथ ही ये एंटीबॉडी के उत्पादन को सुविधाजनक बनाने तथा संक्रामक एजेंटों और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में भी सहयोग करती हैं ।

यद्यपि अनेक कारणों से इन कोशिकाओं की संख्या में घटती- बढ़ती रहती है । किन्तु जब संक्रमण से बचाव करने वाली स़फेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा में कमी आने लगती है तो शरीर में अनेक गंभीर बीमारियों का संक्रमण बढ़ने लगता है ।

श्वेत रक्त कोशिकाएँ अस्थि – मज्जा में उत्पन्न होती हैं और रक्त और लसीका ऊतक में जमा होते हैं । इन्हें मुख्य रूप से दो समूहों में विभाजित किया गया है – Granulocytes और एग्रानुलोसाइट्स (गैर-ग्रैन्यूलोसाइट्स या गैर-दानेदार) जैसा कि इनके नाम से स्पष्ट होता है, Granulocytes के कोशिका, कोशिका द्रव्य में ग्रैन्यूल होते हैं जो अनेक परतों वाले नाभिक होते हैं ।

श्वेत रक्त कोशिकाओं के प्रकार | Type of WBC in hindi.

श्वेत रक्त कोशिकाओं को ल्यूकोसाइट्स के नाम से भी जाता जाता है तथा प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में ये कोशिकाएँ निम्न पाँच प्रकार की होती हैं –

1. बेसोफिल – बेसोफिल रक्त कोशिकाएँ रक्त प्रवाह में रसायनों का स्राव करके शरीर को संक्रमण से बचाने के साथ ही एलर्जी से लड़ने में भी हमारी सहायता करती हैं ।

2. लिम्फोसाइट – ये कोशिकाएँ हमारे शरीर में ऐसे एंटीबॉडी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं । जो आंतों के कीड़े जैसे बड़े परजीवी, बैक्टीरिया, वायरस आदि को नष्ट कर शरीर की रक्षा करती हैं ।

3. मोनोसाइट – इस प्रकार की रक्त कोशिकाएँ शरीर में प्रवेश करने वाले रोगाणुओं या जीवाणुओं पर हमला करने और उन्हें नष्ट करने में हमारी सहायता करती हैं ।

4. न्यूट्रोफिल – इस प्रकार की श्वेत रक्त कोशिकाएँ बैक्टीरिया और कवक को नष्ट करके रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करती हैं ।

5. एओसिनोफिल – इस प्रकार की रक्त कोशिकाएँ परजीवी और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में हमारी सहायता करती हैं ।

श्वेत रक्त कोशिकाओं की कमी से होने वाला खतरा | wbc kam hone se kya hota hai.

किसी भी व्यक्ति में श्वेत रक्त कोशिकाओं की कमी होने पर ल्युकोपिनीया (leucopenia) नाम की बीमारी हो जाती हैं । इसके कारण शरीर में रोग प्रति रोधक क्षमता कम हो जाती है ।

WBC कम होने पर इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है । रक्त में प्लेटरेट्स की हो सकती है । अनीमिया, स्किन इन्फेक्शन, थकान व कमजोरी, लीफ नोट्स एवं बार बार बुखार आने के लक्षण दिखाई देते है । ऐसी स्थिति में किसी भी रोग का प्राणघाती हो जाना संभव है । समय पर ट्रीटमेंट न लेने पर कई गम्भीर रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है ।

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Wbc बढ़ने से होने वाली हानि एवं अन्य असंतुलन | side effects of High wbc in hindi.

सफेद रक्त कोशिकाएं रक्त के महत्वपूर्ण घटक हैं । उनकी भूमिका रोगी संक्रमण से लड़ने की है, और वे हमारे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं । उच्च सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या यह संकेत दे सकती है कि प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण को नष्ट करने के लिए काम कर रही है ।

हमारे शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाएँ चारों ओर बनती हैं । प्रायः सभी रक्त कोशिकाओं की, प्रतिरक्षा प्रणाली में नियमित रूप से कार्य करने के लिए महत्वपूर्ण हैं । हमारे शरीर के अस्थि- मज्जा लगातार सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करता हैं । वे रक्त और लसीका प्रणालियों के अंदर तब तक जमा रहते हैं । जब तक कि वे शरीर में किसी प्रकार इन्फेक्शन या बीमारी से लड़ने के लिए आवश्यक न हों ।

हमारे शरीर की आवश्यकता के अनुसार, मोनोसाइट्स अन्य अंगों, जैसे प्लीहा, यकृत, फेफड़े और अस्थि- मज्जा में घूमते रहते हैं । वे एक कोशिका में बदल जाते हैं, जिसे मैक्रोफेज कहा जाता है। मैक्रोफेज अनेक कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है, जिनमें मुख्य मृत या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को हटाना, कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सशक्त कर विनियमित करना शामिल है ।

High wbc in hindi.

सफेद रक्त कोशिकाओं में होने वाली वृद्धि को ल्यूकोसाइटोसिस के रूप में जाना जाता है, जो मुख्य रूप से निम्न लिखित स्थितियों में महत्वपूर्ण होती है –

• कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स सहित दवाएँ ।
• अस्थि मज्जा या प्रतिरक्षा विकार ।
• सूजन, चोट, संक्रमण, प्रतिरक्दमन ।
• कैंसर से सम्बंधित जैसे कि तीव्र या पुरानी लिम्फोसाइटिक लेकिमिया ।
• श्रम
• गर्भावस्था
• भावनात्मक तनाव
• धूम्रपान
• एलर्जी व अत्यधिक व्यायाम ।

कुछ साँस संबंधी बीमारियाँ, जैसे कि काली खाँसी या यक्ष्मा सफेद रक्त कोशिकाओं के स्तर में वृद्धि का कारण बन सकती हैं । अनेक मामलों में, सभी श्वेत रक्त कोशिकाएँ प्रभावित होती हैं । यद्यपि कुछ लोगों को एक विशेष प्रकार का रोग हो जाता है जिसमें केवल एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिकाएँ प्रभावित होती हैं।

WBC की संख्या घटने का कारण |causes of low WBC in hindi.

यदि हमारे शरीर में स़फेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बेहद कम हो जाती है, तो ल्यूकोपेनिया नामक समस्या हो जाती है । इसमें शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है और एड्स, कैंसर व हेपेटाइटिस जैसे अनेक गंभीर रोगों के होने का ख़तरा बढ़ जाता है ।

सी एम एल बीमारी – सी एम एल. खून की बीमारी है, जिसे कैंसर कहा जाता है । कैंसर समय पर इलाज कराने पर पूरी तरह से ठीक हो सकता है । कालाजार की भाँति इसमें भी स्पीलीन बढ़ जाता है । शरीर में आर.बी.सी. की कमी हो जाती है । श्वेत रक्त कोशिकाओं के कणों की संख्या बढ़ जाती है । जिसके कारण एनीमिया हो जाता है ।

डायरिया की समस्या हो जाती है । श्वेत रक्त कोशिकाओं की सामान्य संख्या चार हजार से 11 हजार होती है । मगर इस बीमारी से इसकी संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है । प्रायः चालीस वर्ष की उम्र के बाद यह बीमारी प्रारंभ होती है । सीबीसी जाँच व क्लिनिकल जाँच से इस बीमारी की पहचान की जा सकती है और समय रहते इनका ट्रीटमेंट किया जा सकता है ।

श्वेत रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने के उपाय । Prevention Tips for Low WBC in hindi.

1. विटामिन ए, सी और ई – कोई भी व्यक्ति विटामिन ए, सी और ई से न केवल व्हाइट ब्लड सेल्स को सही तरीके से काम करने में सहायता पाता है, अपितु इनकी संख्या की भी वृद्धि करता है । इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और हम रोग ग्रस्त होने से बचे रहते हैं । बादाम, गाजर, संतरा, टमाटर, मिर्च, स्क्वैश और जैतून के तेल, आदि कासेवन करना लाभदायक होता है ।

2. दही – प्रतिदिन दही का सेवन करने से श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ने के साथ ही प्रतिरोध क्षमता में भी वृद्धि होती है । यह एंटीबायोटिक की तरह काम करता और रोगों से लड़ने में सहयोग करता है ।

3. ग्रीन टी – ग्रीन टी में उपलब्ध विटामिन सी, पॉलीफिनॉल के साथ-साथ अन्य एंटी ऑक्सीडेंट शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट करके इम्यून सिस्टम को बल प्रदान करते हैं और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि करते हैं ।

WBC badhane ke upay  लहसुन –

लहसुन में उपलब्ध एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, एंटीइंफ्लेमेट्री और एंटीवायरल गुण श्वेत रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहयोग करते हैं और हमारे इम्यून सिस्टम को सशक्त कर बीमारियों से लड़ने में मददगार होते हैं ।

5. जिंक – शरीर में जिंक की कमी के कारण ही सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी आती है, तथा जिंक युक्त आहार का सेवन श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाने में सहयोगी होता है । इसलिए जितना अधिक हो सके, अपने आहार में जिंक का प्रयोग करना चाहिए ।

WBC badhane ke upay.  हरी पत्तेदार सब्जियाँ –

हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन व खनिज भरपूर मात्रा रहने की वजह से आहार में सब्जियां अत्यंत आवश्यक होती हैं । इनसे लौह तत्व, विटामिन-ए, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन-सी, कैल्शियम और फाइबर अच्छी मात्रा में मिलता है । इनमें शक्तिशाली एंटीओक्सीडेनट्स होते हैं जो सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाते हैं जिससे बॉडी में कैंसर बनाने वाले फ्री रेडिकल्स नहीं बढ़ पाते ।

7. कीवी – कीवी में शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट्स के साथ पोटैशियम, विटामिन सी और ई प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं । ये सभी पोषक तत्व रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स़फेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।

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परहेज –

गुटका, तंबाकू, शराब, सिगरेट जैसी नशे की चीजें स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होती हैं । अतः किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके सेवन से सफेद रक्त कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं और अनेक प्रकार की बीमारियां शरीर को घेरने लगती हैं ।। डॉ.राजेश कुमार जैन ।।