अंडकोष दर्द के घरेलू उपचार  । Testicular pain in hindi.

Testicular pain in hindi.
Testicular pain in hindi. . मानव शरीर में अण्डकोष ( Testicles ) गुप्तांगों का एक हिस्सा है । जो लिंग के नीचे की तरफ़ स्थित होते है । अण्डकोष जिस वृषण भी कहा जाता है । यह हमारे शरीर में शारीरिक संबंध बनाने की गतिविधियों का सचालन करता है यानी कि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का निर्माण करता है । यह पुरुषों के गुप्तांगों का महत्वपूर्ण अंग है ।
पुरुषों के अंडकोष में सूजन की तकलीफ किसी भी उम्र में हो जाती है । इस तरह की सूजन एक या दोनों ओर हो सकती है और उसमें दर्द के साथ बैचैनी भी हो सकती है । अनेक बार इनमें हल्का दर्द होता है तो बहुत बार बहुत तेज दर्द भी हो सकता है । तो चलिए जानते है – अण्डकोष में दर्द व सूजन का घरेलू उपाय । Testicular pain in hindi.

टेस्टिस क्या होता है | What is Testicular pain in hindi.

यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर का कहना है कि अंडकोश की थैली ( Scrotum ) बाहर की ओर लटकी होती है । इसमें टेस्टिस होते हैं और ये एक नली के द्वारा जुड़ी होती है । इस थैली में वीर्य जमा होता है । यह थैली केवल शुक्राणु व सीमन का निर्माण ही नहीं करती, वरन इसी से हार्मोन भी बनते हैं । जिन्हें टेस्टेस्टेरॉन कहते हैं । पुरुषों में इन्ही से मर्दों वाले गुण आते है जैसे – भारी आवाज, दाढ़ी- मूँछ निकलना, मर्दाना आदि ।

अंडकोष में दर्द के कारण | causes of Testicular pain in hindi.

1. ट्रामा या अन्य किसी प्रकार की दुर्घटना होने के कारण –
यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि टेक्टिस के ट्यूमर को ट्रामा कहते हैं । इसमें पैन तो नहीं होता मगर टेक्टिस को प्रभावित करती है । इसमें डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कर बीमारी की जाँच- पड़ताल करते हैं, हार्मोनिक लक्षण से भी इस बीमारी का पता चलता है । इलाज करने के लिए  ऑपरेशन करते हैं ।

2. चोट लगने से अंडकोष में दर्द –

बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि टेक्टिस शरीर का अत्यंत संवेदनशील अंग होता है । यदि इसमें अधिक चोट लग जाए तो पीड़ित की मौके पर ही मौत हो सकती है । इसके  ऊपर थोड़ा सा भी दबाव पड़ने से इसमें दर्द होता है । अधिकांश एथलीट या स्पोर्ट्समैन को चोट लगने का डर अधिक होता है । इसलिए वे लोग हमेशा गार्ड लगाकर खेलते हैं । पुरानी चोट में भी असर रहता है, जिससे यह रह-रहकर दर्द करता है।

3. टेस्टिकल कैंसर के कारण –

अनेक यूरोलॉजिस्ट कहते हैं कि अगर अंडकोष में कोई गाँठ, सूजन या दर्द हो रहा है तो शीघ्र ही विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए । अनेक बार ये दर्द टेस्टिकल कैंसर के कारण भी हो जाता  है ।

4. ए.पी.डी.डी.मिस में सूजन होने से दर्द  –

विशेषज्ञों का मत है कि अंडकोष के पीछे स्थिति नाली जिसे हम अधिवृषण (Epididymis) कहते हैं । उसमें चोट लगने या संक्रमण होने अथवा सेक्स से होने वाले संक्रमण से इसमें जलन होती है । अनेकों बार इस कारण इसमें सूजन आ जाती है और अंडकोष में दर्द होता है । इस प्रकार के लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए ।

5. वैरिकोसील के कारण भी टेस्टिस में दर्द होता है  –

विशेषज्ञों का मत है कि वैरिकोसील के कारण भी अण्डकोषों में दर्द होता  है । टेस्टिस में खून की सप्लाई ऑर्काइटिस (Orchitis) के द्वारा ही होती है । यह नसों के द्वारा खून में चला जाता है । वीन्स में वॉश होते हैं उनके खराब हो जाने से खून सामान्य रूप से प्रवाहित नहीं हो पाता इसके कारण दर्द होने लगता है, इस कारण अंडकोष छोटा भी होता है ।
चलने- फिरने से अंडकोष में दर्द होने लगता है। अनेक बार टेस्टिस की नसें बढ़ जाने से उनमें सूजन आने से सपोर्टर का प्रयोग करते हैं । इससे अंडकोष नहीं बढ़ता है । ऐसी समस्या आने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाई का सेवन करना चाहिए ।

8. हर्निया के कारण टेस्टिस में दर्द । Testicular pain in hindi.

डॉक्टरों कहते हैं कि अनेक बार पेट की आंत कमजोर हो जाने के कारण अंडकोष में प्रेशर पड़ता है । इससे भी टेस्टिस में दर्द होने लगता है । आंत का भार अंडकोष पर रहने के कारण सदा ही दर्द बना रहता है । अधिक भार वाला सामान उठाने से भी टेस्टिस में दर्द होता है । इस प्रकार की समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए ।

9. हाइड्रोसील के कारण टेस्टिस में दर्द  –

यूरोलॉजिस्ट कहते हैं कि टेस्टिस के बाहर की ओर एक पर्त होती है, इसमें पानी भर जाने के कारण टेस्टिस का आकार बढ़ जाने को हाइड्रोसील कहते हैं । इससे अंडकोष में दर्द होता है । कभी-कभी अधिक पानी भरने से अंडकोष फट भी जाता है, जिससे रोगी की मृत्यु भी हो सकती है । टेस्टिस के बढ़ते ही डॉक्टर से मिलना चाहिए ।

10. ऑर्काइटिस (Orchitis) में संक्रमण होने से अंडकोष में दर्द –

यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि ऑर्काइटिस में संक्रमण होने के कारण भी अंडकोष में दर्द होता है ।  टेस्टिस में अनेक पर्त होने के कारण संक्रमण की समस्या नहीं होती । किन्तु कभी-कभी खून के कारण इसमें संक्रमण हो जाने के कारण टेस्टिकल्स में जलन होने लगती है ।
यह बैक्टीरियल या संक्रमण के कारण होता है। इससे दोनों अंडकोष में  जलन हो सकती है  यह समस्या अधिकांश तर 45 वर्ष या उससे अधिक आयु  के लोगों में होती है ।  इस तरह के लक्षण होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए ।

वजन उठाने पर अण्डकोष में दर्द । Testicular pain in hindi.

कभी कभी भारी भरकम वजन उठाने या अचानक खडे में पैर पड़ने या शारीरिक संबंध बनाने की गलत पोजिशन के कारण अण्डकोष में दर्द एवं सूजन होने की संभावना बढ़ जाती है । इसे साधारण भाषा मे नलछिटकना कहा जाता है ।
यह दर्द काफी तकलीफदेह होता है । जिसे उठने बैठने, चलने – फिरने में परेशानी हो सकती हैं । नल छिटकना एक आम समस्या है जो उम्र के किसी भी पड़ाव में हो सकती है । अण्डकोष में सूजन एवं दर्द के लिए पेनकिलर टैबलेट से काफी आराम मिलता है ।

वृषण दर्द के लक्षण । Symptoms of Testicular pain in hindi.

पुरुषों में वृषण यानी अण्डकोष में दर्द के लक्षणों को आसानी से पहचाना जा सकता है जो इस प्रकार है –
◆ कमर के निचले हिस्से में दर्द ।
◆ चलने एवं उठने में दर्द ।
◆ पेशाब या शारीरिक संबंध बनाने में दर्द ।
◆ जिस तरफ के अण्डकोष में सूजन या दर्द होता है उस तरफ से पेट दर्द भी हो सकता है ।
◆ कभी कभी बुखार, सर दर्द भी हो सकता है ।
Home remedies of Testicular pain in hindi.

अंडकोष का छोटा – बड़ा होना । Testicular pain in hindi.

स्त्री और पुरुषों के शरीर में अनेक प्रकार की भिन्नताएं होती है । पुरूषों में प्रजनन और शरीर में ताकत के लिए अंडकोष अति आवश्यक होते है । पुरुषों के गुप्तांग के नीचे लटकी हुई दो बॉल की भाँति होते है, जिसमें प्रजनन और शरीर के विकास के लिए आवश्यक हार्मोन आदि होते हैं ।
कई बार टेस्टिकल्स में तकलीफ होने पर अनेक प्रकार के रोगों का भय उत्पन्न हो जाता है । अनेक पुरुषों में एक टेस्टिकल दूसरे की तुलना में अधिक लटका हुआ होता है । अर्थात उनके अंडकोष के साइज में अंतर होता है । एक थोड़ा बड़ा और भारी और दूसरा उससे छोटा और हल्का होता है ।
किन्तु यह अत्यंत सामान्य सी बात है । ध्यान देने वाली बात यह है की इसमें दर्द नहीं होना चाहिए । यदि एक टेस्टिकल दूसरे से बड़ा है और उसमें दर्द भी है तो शीघ्र ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए ।

कैसे पता करे कि एक टेस्टिकल दूसरे से बड़ा है –

यह आवश्यक नहीं है कि कोई एक  अंडकोष ही भारी हो, इनमें बहुत ही सूक्ष्म अंतर भी हो सकता है । यदि खड़े होने, चलने फिरने या बैठने के दौरान टेस्टिकल में दर्द का अनुभव नही है और अंडकोष पर किसी भी तरह की सूजन या लालिमा नहीं है तो घबराने की आवश्यकता है ।
टेस्टिकल का आकार गोल न होकर अंडाकार होता है। इसमें किसी भी प्रकार का उभार नहीं होता है और यह अत्यंत चिकने होते हैं , किन्तु यदि इनमें कोई उभार या अधिक सॉफ्टनेस अनुभव होती है तो  डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए ।

अण्डकोषों में पानी सुखाने का घरेलू उपाय  –

इस प्रकार के रोग में अण्डकोषों में पानी भर जाने के कारण रोगी के अण्डकोष में सूजन आ जाती है । इस रोग में रोगी के केवल एक ही तरफ के अण्डकोष में पानी भरता है । इसका इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है ।
हाइड्रोसिल की तकलीफ किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, इसे दूर करने के लिए अंडकोष में भरे हुए पानी को निकालना अति आवश्यक है । अंडकोष पर कोई चोट लगना, नसों का सूजना, अधिक वजन उठाना या अधिक शारीरिक सम्बन्ध बनाना जैसे अनेक कारणों से यह बीमारी हो जाती है ।
काटेरी की जड़ को धोकर, सुखाकर उसे महीन पीस लें, इस महीन मिश्रण की 10 ग्राम की मात्रा में 7 ग्राम के करीब काली मिर्च का चूर्ण  मिलाकर इन दोनों के मिश्रण को हल्के गर्म पानी के साथ नियमित रूप से कम से कम 6 से 7 दिनों तक फाकी लें ।

काली मिर्च व जीरा से अण्डकोष दर्द का इलाज

काली मिर्च और लगभग उससे दुगनी मात्रा में जीरा आपस में मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर इस मिश्रण में थोड़ा सा सरसों का तेल या फिर जैतून का तेल मिला लें । इन तीनों के मिश्रण को हल्का गर्म कर इसमें थोडा सा गर्म पानी मिला कर पतला घोल बनाकर इस लेप को बढे हुए अंडकोष पर लगाने से बहुत आराम मिलता है ।
हाड्रोसिल के रोगी को दिन मे दो बार संतरे या अनार के रस का सेवन करने के साथ सलाद में निम्बू का रस मिलाकर खाने भी बहुत लाभ होता है । अंडकोष अत्यधिक नाजुक अंग होता है । यदि इसमें किसी तरह की समस्या हो तो बिना देर किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए । डॉक्टरी सलाह लेने के बाद ही कुछ करना चाहिए ।
अंडकोष में आई सूजन किसी चोट या फिर किसी मेडिकल प्रॉब्लम के कारण भी हो सकती है । ये भी हो सकता है कि अंडकोष में असामान्य विकास के कारण से भी ऐसा हो सकता है ।

अंडकोष में सूजन के घरेलू उपाय  | Home remedies of Testicular pain in hindi.

अंडकोष में सूजन आने पर घरेलू उपाय के रूप में आइस पैक या हीटिंग पैड का प्रयोग भी करते हैं । यह तकलीफ होने पर पूर्ण आराम करने से भी लाभ होता है ।

पूर्ण आराम –

इस प्रकार के रोगी को पूर्ण आराम करने से बड़ी राहत मिलती है, इस रोग में किसी भी प्रकार का व्यायाम करने और भारी चीजों को उठाने से बचना चाहिए । जिससे मसल्स को आवश्यकता से अधिक कार्य न करना पड़े ।

हीटिंग पैड्स –

हीटिंग पैड का प्रयोग करने से या गरम पानी से नहाने से खून के बहाव में सुधार होता है और मसल्स में होने वाले दर्द से राहत मिलती है । रोगी को उस विशेष स्थान पर गर्म सिकाई करने से आराम मिलता है और सूजन भी दूर होती है ।

कोल्ड कंप्रेस  –

रोगी के अंडकोष में आई सूजन से आराम दिलाने में कोल्ड कंप्रेस भी सहायक होता है । किन्तु यह तभी आराम देता है, जब सूजन आने के बाद  24 घंटे के अन्दर ही आइस पैक लगा लिया जाए ।

सिट्ज बाथ  –

रोगी को अंडकोष पर आइस पैक से सिकाई करने के तुरंत बाद सिट्ज बाथ लेने से सूजन कम होने में मदद मिलती है । सिट्ज बाथ के समय व्यक्ति को गरम पानी के टब में बैठना होता है ।

कसे हुए अंडरवियर  –

अंडकोष में सूजन वाले लोगों को कसे हुए अंडरवियर पहनने से बहुत लाभ होता है । इनसे लटकते हुए अण्डकोषों को सपोर्ट मिलने से बहुत आराम मिलता है ।

फिजिकल थेरेपी  । Physical therapy for Testicular pain in hindi.

इस प्रकार के रोगियों को घर में हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करने से आराम मिलता है । ये व्यायाम और स्ट्रेचिंग पेल्विक फ्लोर मसल्स को शक्ति प्रदान करते हैं । इससे दर्द कम हो जाता है किंतु व्यायाम डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए । डॉ. रोगी की दशा देखकर ही बता सकते हैं कि कौन सा व्यायाम करना ठीक रहेगा ।

तौलिया रखना –

यदि अंडकोष में किसी चोट  लगने से या तरल पदार्थ के कारण दर्द या सूजन हैं, तो लेटने के बाद अंडकोष के लेवल को ऊपर करने से आराम मिलता है । इसके लिए तौलिए को मोड़ कर नीचे की ओर रखने से न केवल दर्द दूर होता है अपितु सूजन  भी कम हो जाती है ।

अण्डकोष दर्द कम करने की दवा  । Medicine of Testicular pain in hindi.

डॉक्टर के परामर्श पर ओवर द काउन्टर पेन किलर दवा के सेवन से अंडकोष में होने वाले दर्द से राहत मिलती है । किन्तु सदा ही ये ध्यान रहे कि कोई भी दवा डॉक्टर से पूछे बिना नहीं लेनी चाहिए अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि  हो सकती है ।
सारांश – अंडकोष में सूजन के कारण दर्द भी होने लगता है । गंभीर परिस्थितियों में यह कैंसर की ओर भी संकेत करता है । अतः  समय रहते डॉ. के परामर्श से इसका इलाज करवा लेना चाहिए ।। डॉ.राजेश कुमार जैन ।।

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