सफेद पानी की आयुर्वेदिक दवा Baidyanath. 5 बेस्ट दवा

safed pani ki Ayurvedic dawa.

सफेद पानी की आयुर्वेदिक दवा Baidyanath. महिलाओ मे होने वाली गुप्त प्रॉब्लम यानी सफेद पानी को दूसरे शब्दों ल्यूकोरिया ( लिकोरिया ) भी कहते हैं । जो अक्सर सभी महिलाओं को परेशान करती हैं। यह दुर्गंध युक्त चिपचिपा पानी के जैसा पदार्थ होता है । जो महिला के अंदरूनी भाग से निकलता है। यह समस्या महिला को शारीरिक रूप से दुर्बल बनाती हैं। श्वेत प्रदर कहीं जाने वाले यह बीमारी महिला के योनि से संबंधित होता है।

यह बीमारी महिला के जीवन शैली के आधार पर भी निर्भर करता है। अक्सर जो महिलाएं अधिक नमकीन, खट्टे, चटपटे और चिकनाई युक्त भोजन करती हैं इसके अलावा मांस मदिरा का सेवन करने वाली महिलाओं को यह समस्या अधिक होता है । स्वेत प्रदर दो प्रकार का होता है एक स्वाभाविक योनि स्राव और दूसरा और स्वाभाविक योनि स्त्राव । इसे रोकने के लिए Ayurvedic दवाओं का उपयोग किया जाता है । तो चलिए जानते हैं – सफेद पानी की आयुर्वेदिक दवा Baidyanath के बारे में –

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महिला को सफेद पानी से क्या नुकसान होता है ?

एक्सपर्ट के अनुसार ल्यूकोरिया यानी श्वेत प्रदर महिलाओं मे होने वाली एक आम समस्या है जो उन्हें शारीरिक रूप से कमजोर बनाती हैं। अगर स्वाभाविक रूप से श्वेत प्रदर का निष्पादन होता है तो ऐसे में महिलाओं को किसी तरह की समस्या नहीं होती लेकिन दूसरे इंफेक्शन के माध्यम से होता है । किसी अंदरूनी भाग के डैमेज होने के कारण होता है तो उन महिलाओं के लिए यह एक बहुत बड़ी समस्या है जो उनके भावी जिंदगी में असर डाल सकती हैं। अगर किसी महिला को बहुत दिनों तक यह समस्या हो रही है तो उन्हें डॉक्टर के परामर्श से इसका निदान ढूंढना चाहिए अन्यथा किसी गंभीर बीमारी की शिकार हो सकती हैं।

समय रहते अगर इस प्रॉब्लम से निजात नहीं मिलती हो तो इसका ट्रीटमेंट करना बहुत ही आवश्यक है । अन्यथा महिला में खून की कमी ( एनिमिया ), सर्वाइकल कैंसर का खतरा, चेहरे का पीलापन पड़ना, आंखों में कालापन होना, बालों का झड़ना इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं जो उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में अल्परक्तता के कारण उनका शरीर पीला पड़ने लगता है इसलिए आयरन युक्त आहार भोजन करने की सलाह दी जाती हैं ।

कुछ महिलाओं में श्वेत प्रदर की अधिक मात्रा का रिसाव होने के कारण उनमें मौजूद पोषक तत्व बाहर निकल जाते हैं । ऐसी महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की कमी हो जाती है । तत्पश्चात उन्हें आयरन की गोलियों का सेवन करना पड़ता है। इसके वजह से उनके वैवाहिक जीवन में भी असर पड़ने लगता है।

सफेद पानी की आयुर्वेदिक दवा Baidyanath

यह बीमारी उन महिलाओं के लिए काफी कष्टकारी और चिंताजनक है जो हमेशा से ग्रसित होती हैं। लिकोरिया होने के कारण महिला के आंतरिक अंग में सूजन और संक्रमण भी हो सकता है । इसके अलावा उन्हें कई बीमारियों का होने का भय भी रहता है । यह कोई घातक बीमारी नहीं है लेकिन शारीरिक दुर्बलता के कारण मानसिक तनाव भी उत्पन्न हो सकते हैं।

वैसे यह कोई बीमारी नहीं होता आयुर्वेद में भी इसे कोई वर्गीकृत रूप नहीं दिया गया है । बीमारी की जगह में। श्वेत प्रदर महिलाओं के लिए आयुर्वेदिक में उपचार के तौर पर 1 सपोजिटरी अर्थात शरीर में दवा पहुंचाने के लिए छोटी गोलियां का प्रयोग होता है।

प्रक्षालन अर्थात सफाई और पिछु के रूप में इसका इलाज किया जाता है। गंभीर अवस्था में डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है । अमरीकी चीनी और लोग जैसे जड़ी बूटियों का इस्तेमाल स्वेत प्रदर के इलाज के लिए किया जाता है।

इसके अलावा त्रिफला गुग्गुल, चंदप्रभावटी और गुग्गुल के मिश्रण से किस बीमारी के इलाज में लाभ होता है। इस बीमारी से ग्रसित महिलाओं को पानी से अंतरंग भाग को सफाई करने की सलाह दी जाती है।

ऐसी महिलाओं के लिए यह दिशा निर्देश दी जाती है कि वह अपने सफाई पर ध्यान दें क्योंकि कपड़े पहने और आसानी से पचने वाला भोजन का सेवन करें । इसके अलावा हरी सब्जियां और फल और पौष्टिक भोजन करें।

बैद्यनाथ लिकोगार्ड – सफेद पानी की आयुर्वेदिक दवा Baidyanath.

यह दवा विधारा, अश्वगंधा, मुलेठी इलायची, यशद भस्म इन सब को मिलाकर बनाई गई दवा है। वैसे यह दवा आयुर्वेदिक और मेडिसिन दुकान में बिना पर्ची के भी उपलब्ध हो जाते हैं। यह कितनी मात्रा में ली जाए या मरीज और उसके समस्या पर निर्भर करती है उसी के अनुसार दिशानिर्देश दी जाती है कि कितने खुराक ली जाए।

इसमें मिश्री घटक से फंगस और बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता होती है । वही यह दवा चोट से होने वाली सूजन में लाभप्रद होता है। इनका सेवन सुबह शाम 1 – 1 टेबलेट गुनगुने पानी के साथ अधिकतम यह 2 महीना तक लिया जा सकता है। लेकिन सावधानियां रखें कि जो स्त्री गर्भवती हैं और स्तनपान करा रही हैं उन्हें बिना डॉक्टर के परामर्श से नहीं लेना चाहिए।

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बैद्यनाथ अशोकारिष्ट – सफ़ेद पानी की दवा Syrup.

यह दवाई अशोक वृक्ष की छाल के ज्यादा से ज्यादा मात्रा में मिलाकर बनाया जाता है। इस वृक्ष की पत्ते रामफल के सम्मान फूल नारंगी रंग के होते हैं । अक्सर बसंत ऋतु में खिलते हैं। इसका लैटिन नाम जौने सिया अशोक है। यह वृक्ष आमतौर पर बंगाल में पर्याप्त मात्रा में मौजूद है जिसके छाल से और सभी बनाई जाती है।
या स्वाद में दशहरा सुगंधी और शरीर को हष्ट पुष्ट बनाने और सबसे उपयोगी तो स्त्रियों के रोग निवारण में लाभप्रद होता है।

स्त्रियों के गर्भाशय को भी मजबूत करती है और इसमें होने वाले विभिन्न रोगों का भी निवारण करने की क्षमता है।

15 से 20 ml बराबर पानी के साथ भोजन के बाद डॉक्टरों के निर्देशानुसार इसका सेवन किया जा सकता है इसके सेवन से महिलाओं में से प्रदर की समस्या से छुटकारा होती है।

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लियुकोनिल टेबलेट -बैद्यनाथ में ल्यूकोरिया की दवा –

बैधनाथ में आयुर्वेदिक द्वारा निर्मित है । महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद है । इसमें बहुत सारे ऐसे औषधीय तत्व हैं जिसके मिश्रण से दवाई तैयार की गई है जो बाजार में टैबलेट के रूप में उपलब्ध है । उसके बाद उसका वजन 70 ग्राम है जो दो टेबलेट डॉक्टर के परामर्श से सेवन करें ।

वैसे यहां महिलाओं के गर्भाशय संबंधी समस्याओं से मुक्ति के लिए आयुर्वेदिक रूप में मेडिसिन है या अश्वगंधा विधारा, वाडीलांची, मधुकर आदि के मिश्रण से बनाया गया है । इसमें दर्द निवारक क्षमता भी है जिससे महिलाओं के आंतरिक संबंधित समस्याओं में लाभप्रद होता है।

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सफेद पानी की आयुर्वेदिक दवा व उपाय –

महिलाओं के गर्भाशय संबंधी समस्याओं में जिसमें श्वेत प्रदर की समस्या अधिक रहती है उससे संबंधित आयुर्वेदिक औषधियों की जानकारी दी गई है।

  1. वरतई – इसमें यष्टिमधु मुलेठी को बारीक पीसकर पाउडर बनाए जाते हैं । इसके अलावा शहर नेम के पाउडर, त्रिफला विभूति और विभीतकी का मिश्रण से शहद मिलाकर तैयार की गई गोली रहती है। इसके सेवन की अवधि पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है मासिक धर्म के 8 से 10 दिन के बाद उसका नियमित रूप से सेवन करें।
  2. धूपन – आयुर्वेदिक में इसमें एक प्रक्रिया द्वारा इस्तेमाल की जाती है यानी कि इसके इलाज की प्रक्रिया में होने वाले विश्व में यानी दवा दी जाती है । इसमें ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो औषधीय गुणों से भरपूर है । जौ , तिल और गूगल के साथ घी या मक्खन और दारू हरिद्रा और हरिद्रा से भी तैयार किया जाता है।
  3. पइछू – सूती कपड़े को लंबे धागे से बांधकर बनाया जाता है जो उनके द्वारा होता है । उसमें स्त्री के आंतरिक भाग में लगातार और सभी रिलीज होती है । जिससे लिकोरिया की नियंत्रित करने की क्षमता बरकरार रखी है। इस प्रक्रिया द्वारा स्त्री के अंतिम भाग में औषधि पहुंचाने के लिए 5 से 6 घंटे का समय लगता है। प्रक्रिया जटिल तो है लेकिन बहुत ही कारगर होता है।

ध्यान रखे कि यह गंभीर समस्या तो है नहीं यह आम बीमारी के तौर पर मौजूद है लेकिन अगर यह निरंतर होते रहता है । तो फिर इसका उपचार समय पर होना वाजिब है अन्यथा किसी भी गंभीर समस्या का शिकार  हो सकती है। इसके उपचार के लिए घरेलू उपचार के साथ – साथ आयुर्वेदिक में कई औषधियां है जो इस बीमारी से निजात देने के लिए बहुत ही कारगर है ।