रेप के बाद डीएनए टेस्ट कितने दिन में होना चाहिए ?

Rape ke baad DNA test kitne din me hota h.

रेप के बाद डीएनए टेस्ट कितने दिन में होना चाहिए ?आज कल की बदलती मानसिकता में भोग की नीति ने रेप जैसे मामलो को बढ़ावा दिया है । जिससे महिला के साथ दुष्कर्म के केसेस या यूँ कहे की अवैध संबंधो को बढ़ावा दिया है । यही मामले जब कानूनी दाव पेच मे चले जाते है तो DNA Test ( अनुवंशिकी परीक्षण ) करवाने की स्थिति उपन्न होती हैं । अब सवाल यह है की Rape के बाद DNA Test कितने दिन में होना चाहिए ?

दूसरी तरफ यह भी सवाल अहम है कि सेक्स के बाद डीएनए टेस्ट कितने दिन में होना चाहिए ? ये दोनो ही सवाल काफी अहम है । इनका जबाब हम आगे देने जा रहे है । इतना ही नहीं डी एन ए से जुड़ी समस्त जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे है तो चलिए जानते हैं – डीएनए टेस्ट क्या होता हैं –

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डीएनए टेस्ट होता होता है ?

DNA टेस्ट विज्ञान की एक देन है। जिसके के द्वारा यह देखा जाता है कि जीवो की असली पहचान क्या है ? अर्थात उसकी जन्मकुंडली देखी जाती हैं। डीएनए शरीर में इंस्ट्रक्शन मैन्युअल की तरह होता है । शरीर में जैसा डीएनए टेस्ट बताएगा वैसा ही रहता है। जैसे आंखों का रंग क्या होना चाहिए ? मसल्स कितने स्ट्रांग होंगे ? लंबाई कितनी होगी ? सीना कितने इंच का होगा इत्यादि।

माता-पिता से अक्सर बच्चे मिलते हैं। यह डीएनए टेस्ट के माध्यम से ही पता चलता है क्योंकि इसमें दोनों के जींस एक जैसे होते हैं। आम भाषा में यह समझ ले कि शरीर में प्रोटीन का एक स्ट्रक्चर होता है जो यूनिक होता है । जिसका मेल सिर्फ अपने रिश्तेदार और बच्चे से मेल खाता है । यह रिपोर्ट असल में डीएनए के जरिए से ही प्राप्त हो सकती हैं ।

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रेप के बाद डीएनए टेस्ट कितने दिन में होना चाहिए ?

रेप एक ऐसी दुर्घटना है कि जिसमे महिला के साथ उनकी मर्जी के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाया जाता है । जिससे उनके स्त्री धन की क्षति होती हैं । कभी कभी तो गर्भ ठहरने की संभावना बन सकती हैं । विवादित मामला होने की स्थिति मे या अपराधी को पकड़ने के लिए DNA टेस्ट किया जाता हैं ।

एक्सपर्ट का मानना है कि सटीक रिजल्ट पाने के लिए सेक्स या रेप के 12 से 48 घंटो ( 2 दिनों ) के दौरान DNA Test करवाना उचित होता हैं । क्योकि इस अवधि के बाद परिणाम की सार्थकता कम हो सकती हैं । यौन दुष्कर्म या रेपिस्ट व्यक्ति को पकड़ने या अपराध साबित करने के लिए 3 से 5 दिन के भीतर DNA टेस्ट करना चाहिए । इसी मुँह में डाले जाने पर 24 घंटे तक किया जाता हैं ।

रेप के बाद डीएनए टेस्ट कितने दिन मे हो सकता हैं ?

इस मामले में मुंबई उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यह कि किसी भी मामले में DNA Test का निर्णायक साक्षी नहीं माना जा सकता यह एक संतुष्टि के लिए ही है। ऐसे केस में बहुत सारे ऐसे मामले आए जिसका झूठ और सच का पता लगाना दोनों ही उसे मुश्किल था इसलिए ऐसे में इस केस में डीएनए टेस्ट पूरी तरह परफेक्ट नहीं है।

बच्चे के अनुवशिकी परीक्षण में कभी-कभी नेगेटिव भी रिपोर्ट आ जाती है। इसी के साथ अगर कोई घटना हो गया हो जैसे रेप केस में तो इसमें अपराधी का DNA टेस्ट के बाद उसकी जांच सहित रिपोर्ट नहीं दे सके जिसके कारण फैसला भी सही नहीं हो सका । नेगेटिव रिपोर्ट में विश्लेषण के दौरान चीन में कोई चीन से परिवर्तन नहीं पाया गया इसका अर्थ यह है कि आनुवंशिकी स्थिति या जोखिम की पहचान नहीं हो पाई जिसके कारण यह रिपोर्ट सही नहीं रहा ।

रेप के बाद डीएनए टेस्ट कैसे किया जाता हैं ?

Rape के बाद DNA टेस्ट न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आरोपी के कुछ सेम्पल इकट्ठे किए जाते हैं । एव महिला के गुप्तांगो से भी सेम्पल लिए जाते हैं । इन दोनो सेम्पलस का लेब मे जाँचा जाता हैं । महिला के गुप्तांगो मे पाया जाने वाला वीर्य अपराधी का तो नहीं है ? यदि हा तो शत प्रतिशत वही व्यक्ति अपराधी है ।

इसी प्रकार अपराधिक मामले में अपराधी का अपराध साबित करने के लिए जैविक DNA Test बहुत ही कारगर होता है। अपराधी के लार, बाल, नाखून, वीर्य, खून आदि के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि अपराधी क्या वहां मौजूद था या नहीं ।

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डीएनए टेस्ट से क्या क्या पता चलता है।

सामान्य भाषा में यह कहा जाता है कि शरीर की पूरे राज डीएनए टेस्ट में निहित होता है । अर्थात डीएनए टेस्ट के बारे में सिर्फ यह आकलन करना की बॉडी के सभी पार्ट की जानकारी होती है। इतना ही तक सीमित नहीं है इसके माध्यम से बहुत सारे राज और रहस्य को भी सुगमता पूर्वक जाना जा सकता है।

  • डीएनए टेस्टिंग के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चे के माता-पिता में जो जैविक बीमारी है क्या उनके बच्चों तक तो नहीं पहुंच गई।
  • इस टेस्ट के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है की उसे किसी तरह की बीमारी होने के चांस ज्यादा है या नहीं।
  • मनुष्य ही नहीं पालतू और दुधारी नस्लों के जानवरों में यह टेस्ट या बताता है की कितना यह प्योर है।
  • अनुवशिकी परीक्षण के माध्यम से यह भी पता लगाना आसान है कि इसके खून से सगे संबंधी या रिश्तेदार है या नहीं।

डीएनए टेस्ट घर पर कैसे करें ?

यह टेस्ट सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह से व्यक्ति करा सकते हैं। सरकारी मामलों में कहें तो आपराधिक मामलों में यह सरकारी आदेश पर होता है लेकिन प्राइवेट डीएनए टेस्ट घर बैठे टेस्टिंग कराया जा सकता है।

  • मुंह से लार अर्थात रुई के द्वारा गाल के भीतर के स्वाद को अच्छी तरह रगड़ कर डिब्बे में बंद किया जाता है।
  • अपने घर में किसके द्वारा सैंपल इकट्ठा करके कर्मचारियों को बुलाकर दिया जाता है।
  • एक प्रिंट की धोती है जो हाथ में सुयोग टू भोकर उस के माध्यम से खून निकाला जाता है और उसे टेस्टिंग किट में पैक करके भेज दिया जाता है।
  • अगर किसी बच्चे में जैविक बीमारी के बारे में पता करना हो तो ब्लड सैंपल कलेक्ट किये जाते है । साथ ही बोन मैरो का सैंपल लेना पड़ता है । इसके अलावा एम्नियोसेंटिसिस इस प्रक्रिया से भी पता लगाया जा सकता है।

डीएनए टेस्ट में कितने रुपए लगते हैं ?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई गंभीर बीमारी या कोई जटिल समस्याएं ना हो ऐसे अवसर में उचित नहीं है डीएनए टेस्ट कराना है लेकिन जब डॉक्टर की सलाह हो तो डीएनए टेस्ट अवश्य करा लें बहुत सारे ऐसे सेंटर खुले हुए हैं जिसमें इसकी पूर्ण जानकारी मिल जाती हैं इसके माध्यम से यह भी पता चलता है कि जो जिनके हिसाब से बताते हैं कि आप क्या खाएं कैसे एक्सरसाइज करें कैसे व्यक्ति से विवाह करें।

बड़े-बड़े शहरों में इसके बहुत सारे सेंटर बनाए गए हैं लेकिन इसका टेस्ट ₹6000 से शुरू होता हैं । और ₹200000 तक जाते हैं हालांकि अधिकतर टेस्ट 15 से ₹20000 तक में ही सफलतापूर्वक हो जाता है।

बच्चे का डीएनए टेस्ट कैसे करें ?

जब महिला गर्भवती होती है तो 9 सप्ताह की शुरुआत में ही स्टेट किया जा सकता है तकनीकी प्रगति का मतलब है कि मां बच्चे में कितने जोखिम हैं। इस परीक्षण में गर्भावस्था के दौरान यह भी पता लगाया जा सकता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे के पिता के असलियत का।

विषम परिस्थिति के दौरान ही डीएनए टेस्ट का सहारा लिया जा सकता है अन्यथा सामाजिक रूप से बच्चे के सामने भविष्य में चुनौतीपूर्ण समस्या खड़ी हो सकती है किसी भी बच्चे का पिता कौन है यह पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट का आदेश नहीं दिया जा सकता हां परिस्थिति अनुकूल नहीं होने पर यह डॉक्टर या फिर सरकारी तौर पर आदेश दिया जाता है कि इसकी जांच की जाए।

डीएनए टेस्ट के माध्यम से असल में यह पता लगाया जा सकता है कि अनुवांशिकता के आधार पर कि व्यक्ति और टेस्ट समान रुप में है या नहीं। यह टेस्ट सफलतापूर्वक कितना कारगर हो सकता है यह पूर्णता सही नहीं है। यह टेस्ट का सहारा तभी ले जब कोई भी जटिल समस्या उत्पन्न हो गई हो। डीएनए टेस्ट मनुष्य जानवर में उसकी मौलिक पहचान को दर्शाती तो ।। कल्पना झा ।।