पतंजलि सोरायसिस की दवा । छालरोग की 5 आयुर्वेदिक क्रीम

Patanjali me psoriasis ka ilaaj.

पतंजलि सोरायसिस की दवा । वर्तमान में गलत खानपान व दिनचर्या की बदौलत कई बीमारियां घर कर जाती हैं । उनमे से सोरायसिस यानी छाल रोग भी एक है । यह एक स्किन से जुड़ी प्रॉब्लम है जिसमे त्वचा पर प्पड़ी, सूजन व खुजली सी होती हैं । जो त्वचा को प्रभावित करती है, जिससे त्वचा कोशिकाओं के अत्यधिक और तेजी से वृद्धि होती है । जिससे मरीज को बहुत ज्यादा परेशानी होती हैं ।

एक्सपर्ट के अनुसार यह एक स्किन प्रॉब्लम है जिसमे स्किन सेल्स तेजी से बढ़ने के कारण त्वचा पर मोटी परत जमा हो जाती है । वही स्किन पर लाल चकते व रूखी – सूखी हो जाती हैं । जिसके कारण सूजन, खुजली होने लगती है । यही कारण है कि यह एक गंभीर रोग माना जाता है ।

पतंजलि के संचालक बाबा रामदेव का कहना है कि किडनी और लिवर के फक्शन ठीक से कार्य न करने के कारण छाल रोग की समस्या होती हैं । जिनकी शुरुआत कोहनी, घुटनो, हाथ – पैर, पीठ व तलवो से होती है । तो चलिए जानते हैं – छाल रोग के बारे में –

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 क्या सोरायसिस छूने से फैलता हैं ?

सोरायसिस यानी छाल रोग एक प्रतिरक्षा औषधीय त्वचा विकार है जो खुजली का कारण बनता है, लाल रंग की लालची पैच, सूजन और त्वचा पर चकत्ते आदि लक्षण दिखाई देते हैं । इस विकार में, त्वचा कोशिकाओं को सामान्य से 10 गुना तेजी से बढ़ जाता है और कोहनी, घुटनों, हाथों, पैर, खोपड़ी और चेहरे पर सबसे अधिक संभावना दिखाई देती है। यह त्वचा की स्थिति आम है और कोई इलाज नहीं है। यह बेहद दर्दनाक है और एक नींद में कठिनाई पा सकता है । इस स्थिति को ध्यान में रखते गैर यह रोग गैर संक्रामक है । यानी छालरोग व्यक्ति को छूने से नहीं फैलता हैं ।

यह विकार हालांकि चक्रों को छोड़ने के लिए प्रवण है, कुछ हफ्तों या महीनों के लिए दृश्यमान, थोड़ी देर के लिए । छालरोग के प्रकार की बात करें तो नारंगी छालरोग – व्युत्क्रम छालरोग – पट्टिका छालरोग – गुतटे छालरोग – इरिथ्रोडेमिक छालरोग – पुर्लीयला छालरोग, एयूवेडा छालरोग आदि ।

आयुर्वेद के अनुसार यह रोग पित्त व वात दोष के असंतुलन के कारण होता है । वही ठंडी व गर्मी भी प्रभावित करती है । इसी प्रकार संक्रमण व कमजोर इम्युनिटी भी एक कारण है ।

पतंजलि सोरायसिस की दवा व इलाज –

पतंजलि के प्रोडक्ट आयुर्वेदिक माने जाते हैं । जिसमे विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक जड़ी बुटियों का समिश्रण होता है । सोरायसीस एक ऐसी स्किन प्रॉब्लम है जिनका आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज सम्भव है । इन दवाओं का साइड इफ़ेक्ट कम होता है जबकि प्रभाव स्थाई होता हैं ।

आयुर्वेद के अनुसार वात और पित्त दोष के कारण रोगो का जन्म होता है । इसलिए इनका संतुलन करना परम आवश्यक है । और आयुर्वेद सदैव इन दोषों का नियंत्रण करने के लिए तरह तरह की औषधियों का प्रयोग करता आया है । तो चलिए जानते हैं – पतंजलि मे छाल रोग का इलाज –

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पतंजलि दिव्य सोरोग्रिट टैबलेट – पतंजलि सोरायसिस की दवा

Psoriasis को कुष्ट रोग से जोड़कर भी देखा जाता हैं । जिसमे स्किन पर लाल चकते हो जाते हैं । कमजोर इम्युनिटी पॉवर के कारण सूजन आ जाती हैं । वही इस रोग से पीड़ित मरीजों को गठिया भी हो सकता है । उसे सोरायसिस गठिया भी कहा जाता हैं । इनके लिए Divya Psorogrit Tablet एक बेहतरीन दवा है । इसमे मौजूद विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक घटक जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ साथ एलर्जी, खुजली, मुहासों को नियंत्रित करती हैं ।

यह टेबलेट लाल चकतो और रूखी स्किन के लिए भी लाभकारी है । इनके अलाव गठिया जैसे रोगो का उपचार करने मे सहायक होती हैं । यह टैबलेट नीम, गिलोय, मोरिंगा, अमलतास, सिरस बीके, नागरमोथा, करंज एसडी, इंद्रजाऊ, दारुहल्दी, रास माणिक्य आदि घटको से निर्मित होती है । जो Psoriasis जैसे रोगो के लिए लाभकारी है । इनका सेवन सुबह व शाम 1 – 1 टैबलेट के रूप मे किया जा सकता है ।

दिव्य एलोवरा जेल – पतंजलि सोरायसिस की दवा

यह एक ब्यूटी प्रोडक्ट के रूप मे जाना जाता है । इनका उपयोग किसी भी उम्र मे कभी भी किया जाता हैं । यह एलोवरा के अर्क के साथ विटामिन ई से तैयार किया है । जो स्किन से जुड़ी प्रॉब्लम के बहुत ही लाभकारी माना जाता है । इनका इस्तेमाल करने से हल्की फुलकी चोट, मोच, खरोट, दाद – खाज, खुजली, जलन व एलर्जी से मुक्ति मिलती हैं । इनका उपयोग बालों के लिए भी किया जाता है ।

यह जेल स्किन का रुखापन दूर करने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है । एंटी ऑक्सीडेंट्स के रूप मे सोरायसीस के लिए सबसे अच्छी दवा हैं । यह स्किन संक्रमण को भी रोकने मे लाभकारी है। इनका उपयोग रोजाना 2 से 3 बार स्किन पर लगाया जा सकता है । इनका कोई दुष्प्राभाव नहीं है । मगर सिमित मात्रा में इस्तेमाल करें ।

सोरोकेयर पैक – सोरायसीस की बेस्ट क्रीम –

Sorocare पैक जो शरीर में अम्लीय प्रतिक्रियाओं के बिना शरीर में प्रसारित करने में मदद करता है। यह हर्बल उपचार भी विरोधी बैक्टीरिया, विरोधी कवक और रक्त शुद्ध गुणों के रूप में कार्य करता है। यह आयुर्वेदिक उपचार सोरायसिस को हटाने पर केंद्रित है। चारमारी के लाभों को अल्टिज़री, जलन, खुजली और अन्य त्वचा जैसे सभी प्रकार की त्वचा की समस्याओं के लिए उपयोग किया जाता है।

यह अल्सर, खुजली और अन्य त्वचा रोगों के इलाज के लिए भी उपयोग किया जाता है। त्वचा एलर्जी, अल्सर, कवक और बैक्टीरिया एक्जिमा का इलाज और अन्य स्किन संबंधी प्रॉब्लम का इलाज करने में भी सहायक है । इनका उपयोग योग्य डॉक्टर की सलाह से दिन 2 से 3 बार स्किन पर किया जा सकता है । ध्यान रखे अधिक मात्रा मे सेवन करने से साइड इफ़ेक्ट्स हो सकते हैं जो कि अस्थाई होंगे । इनके अलावा Betasalic, बार्थानी Psoroclear, Sorion क्रीम आदि मुख्य है ।

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सोरायसीस के लिए आयुर्वेदिक इलाज व जड़ी – बूटी  –

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के लोगों ने Psoriasis treatment के लिए इस्तेमाल किया है – मुसब्बर वेरा – ब्लैक रात्रि छाया – लोबल – लहसुन – गुगगुल – चमेली फूल पेस्ट – नीम स्नान और मॉइस्चराइज़र नियमित रूप से स्नान करने में मदद करता है छालरोग के क्षेत्रों को साफ और नरम अतिरिक्त, स्नान सुखदायक हो सकता है और तनाव को कम कर सकता है जो छालरोग के फसलों की घटनाओं को काटने में अधिक लाभ प्रदान कर सकता है। प्राकृतिक सूक्ष्म तेलों को लागू करना, जैसे नारियल या जैतून का तेल, त्वचा को नरम करने में मदद कर सकता है और छालरोग के खुजली और परेशानी को दूर कर सकता है ।

इसी प्रकार हल्दी भी Psoriasis treatment के लिए एक अच्छा आयुर्वेदिक विकल्प है । इनका इस्तेमाल पेस्ट के रूप मे किया जाता है । वही पंचकर्म पद्धति से भी छाल रोग का इलाज किया जाता है ।
सोरायसिस के लिए IAFA की बेस्ट आयुर्वेदिक दवा के रूप मे भूमि आंवला स्वरस और आईएएफए 333 तेल और क्रीम भी बहुत उपयोगी हैं । इसी प्रकार नीम, छाछ भी उपयोगी है ।

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छाल रोग की आयुर्वेदिक दवा oil  –

  • कायाकल्प तेल – यह एक आयुर्वेदिक औषधि है।इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधित रोगो मे किया जाता है । त्वचा रोग का मुख्य कारण खून की अशुद्धि होती है और यह दवाई खून को साफ करने का काम करती है।
    यह तेल दाद, खुजली, खाज, चमला श्वेत कुष्ठ कि टीम (सोरायसिस) आदि मे तुरंत लाभ देता है।
  • रस माणिक्य – आयुर्वेद के हिसाब से वात और कफ दोष पर इसका असर होता है। यह अँटी लेपसी ,एंटी बायो टिक,अँटी गाऊट और रक्त शुद्धीकरण जैसे गुणो से भरपूर होता है।
  • सोम राजी तेल – यह तेल एक आयुर्वेद से भरपूर तेल है। जो त्वचा रोगों मे उपयुक्त है। इसे सरसो तेल के बेस से तैयार किया जाता है।
  • सी सौरा – यह मलम कई दवा ओ से मिलकर बना है। जो एगजिमा और सोरा़सिस के इलाज मे मददगार है। यह लालिमा खुजली और सूजन से राहत देने मे मदद करता है । यह मृत त्वचा कोशिकाओं को हटा देता है। त्वचा को नरम बनाता है।

अंतिम शब्द – आज का लेख – पतंजलि मे सोरायसिस का इलाज के बारे बताया गया जो कि एक साधारण जानकारी है । इसे पेशेवर चिकित्सा के रूप मे न ले । और न किसी भी प्रोडक्ट का प्रसार – प्रचार किया गया है । इनका इस्तेमाल करने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक समझे ।।