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मलद्वार में जलन की tablet. एव 5 बेस्ट दवा पतंजलि

maladwar me jalan ki tablet.

मलद्वार में जलन की tablet. आजकल कई लोगों को कब्ज की समस्या होने लगी है इसका कारण गलत जीवनशैली और खान पान की गलत तरीकों के कारण हो रहा है । इन स्थितियों में कब्ज का बनना कोई बड़ी बात नहीं। ऐसी स्थिति में मल त्याग करने समय जुड़ लगाने के कारण या दबाव पड़ने के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। मल त्याग करते समय दर्द और जलन होती है जिससे व्यक्ति को बहुत बेचैनी और परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसके लिए कभी कभार व्यक्ति को डॉक्टर के पास जाने की जरूरत पड़ती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार हरी सब्जियों का सेवन इसबगोल और छिलके वाले अनाज के सेवन करने की सलाह दी जाती हैं । आजकल मोटे अनाज खाने का प्रचलन जोर शोर से चल रहा है । इसका भी कारण मलद्वार में आए कब्ज के कारण परेशानियों से हैं। कई दफा दो ऐसी स्थिति हो जाती है कि कोई औषधि और दवाई काम नहीं करता इस स्थिति में व्यक्ति को ऑपरेशन करने की सलाह दी जाती है । तो चलिए जानते हैं – आयुर्वेदिक दवा के बारे में –

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मलद्वार के जलन के कारण

जलन व खुजन होने के कारण अक्सर मलद्वार के आसपास के जगह में मांसपेशियों में ऐंठन होने लगता है जिसका कारण प्रोक्टैल्जिया फुगैक्स, एसटीआई, मलद्वार में इन्फेक्शन का कारण हो सकता है।

मलद्वार के आसपास एनएमके टिशू में एक छोटा सा ईयर जिसे एनल फिशर के रूप में जाना जाता है । कब्ज के कारण इसी में असर में जलन और दरार आ जाने के कारण होता है । इसके रेक्टम के क्षेत्र में कट जाने के कारण दर्द और जलन होता है । कई दफा तो ब्लड भी निकल पड़ता है।

अक्सर देखा जाता है प्रोक्टैल्जिया फुगैक्स जो मलद्वार के आसपास के भाग हैं । इसमें ऐठन के कारण दर्द और जलन की शिकायत होने लगती हैं । इस प्रकार की प्रॉब्लम महिलाओं में ज्यादा रहती है।

मलद्वार के आसपास एनल फिस्टुला रेक्टम की छोटी ग्रंथियों से घिरा रहता है । इस प्रचार से आयल का स्राव होता है लेकिन यह ग्रंथियां इस स्थिति में रुक जाती है जिसके कारण मलद्वार मे दबाव पड़ने के कारण दरारे पड़ जाती है । जो घाव का रूप ले लेती हैं । इस स्थिति में मल का त्याग करने समय जलन और दर्द का अनुभव व्यक्ति करता है।

मलद्वार में जलन की tablet.

मलद्वार में जलन एव सूजन की कुछ tablet उपलब्ध है जो जलन से तत्काल प्रभाव से राहत प्रदान करती हैं । वही पिछवाड़े हो रही सूजन से राहत देती है । तो चलिए जानते हैं – इन टेबलेट के बारे में –

  1. hydrocortisone.
  2. zinc oxide.
  3. Gynecort Maximum Strength.
  4. Xylocaine Jelly.
  5. RectiCare.
  6. Xylocaine Topical.

उपरोक्त टेबलेट का सेवन योग्य डॉक्टर की सलाह से करें । इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि इनका सेवन अनुशासित या डॉक्टर द्वारा निर्धारित का सेवन करें । इनके अलावा हरी सब्जियों का सेवन फाइबर युक्त भोजन और मोटे अनाज का सेवन करें अमरुद भी इसका एक मुख्य स्रोत है।

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मलद्वार में जलन की दवा पतंजलि –

अक्सर आदमी को कब्ज के कारण जो समस्या उत्पन्न होती हैं जिसके कारण जलन खुजली और दर्द की परेशानियों से व्यक्ति को गुजारना पड़ता है। एनो जेस्ट क्रीम यह दवाई दो तत्वों के मिश्रण से बना हुआ दवाई हैं । इसको लगाने से एनल फिशर के इलाज में राहत मिलती हैं ऐसी समस्या से ग्रसित लोगों को क्रीम को लगाने से दर्द सूजन खुजली जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

मलद्वार में आए परेशानी के कारण कई तरह के निवारण लिखी गई है जिसमें आयुर्वेदिक दवाएं सर्वोपरि माना जाता है इसके अलावा जो जिनकी समस्या अधिक जटिल हो जाती है उन्हें ऑपरेशन करने की सलाह दी जाती हैं लेकिन आयुर्वेदिक में कुछ ऐसी दवाइयां है जिसके माध्यम से व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सकता है।

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अर्शकल्प वटी – मलद्वार में जलन की tablet.

यह एक पतंजलि की ऐसी आयुर्वेदिक दवा है जिनका उपयोग बवासीर और फिस्टुला जैसे रोगो के ट्रीटमेंट में किया जाता है। इस दवा को आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को मिलाकर बनाया गया है । जिसका प्रभाव बवासीर या मलद्वार में आए सूजन और दर्द को कम करता है और सबसे बड़ी बात जिस कारण यह समस्या उत्पन्न होती है । अर्थात कब्ज और मल त्याग करने वक्त परेशानियों से छुटकारा देती हैं।

अर्शकल्प वटी के एक पैक में 60 टेबलेट होती है जो ग्रसित व्यक्ति को दिन में दो बार या योग्य वैध की सलाह के अनुसार लेना चाहिए ।

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इसबगोल भूसी – मलद्वार में जलन की tablet.

यह एक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ है जिसे बवासीर के रोगी के अलावा सामान्य सभी लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं । बहुत से लोग तो इसका सेवन प्रतिदिन करते हैं क्योंकि भरपूर मात्रा में इसमें हर बार मिला रहता है । यह एक लैक्सेटिव की तरह कार्य करता है जिसके कारण माल आसानी से निकलता है।

प्रतिदिन 5 से 10 ग्राम ईसबगोल की भूसी गर्म दूध या पानी के साथ मिलाकर पिए इसका एक उपाय यह भी है कि इसे दोपहर में फूलने दे दे और रात में इसे मिलाकर पी लें।

कायाकल्प वटी – मलद्वार मे जलन व सूजन की आयुर्वेदिक दवा –

यह आयुर्वेदिक दवा पुराने और जड़ से खत्म करने वाले रोग के लिए सटीक दवा है । बवासीर के अलावा यह दवा त्वचा संबंधित रोगों में भी फायदेमंद होता है। इस दवा के सेवन से रोगी को आराम मिलता है।

यह दवा विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक तत्वों से मिलकर बनी है । जो पुराने बावासीर के अलावा मलद्वार पर खुजली, फिस्टूला, स्किन प्रॉब्लम के लिए लाभकारी है । इस दवा का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है फिर योग्य वैध की सलाह से अनुशासित खुराक का सेवन करें ।

दिव्य अभयारिष्ट – मलद्वार मे जलन व खुजली की दवा पतंजलि –

यह दवाई आयुर्वेदिक फार्मूले से तैयार की गई है जिसका काम पाचन तंत्र को बढ़ाना है । और इसकी सेवन करने से शरीर से विषाक्त पदार्थ खत्म हो जाते हैं।

यह दवा प्राकृतिक अर्थ से तैयार किया गया है जो आंतों को दर्द से मुक्ति दिलाने मे बहुत ही लाभकारी है । और पाचन में सुधार लाना है यही कारण है कि बवासीर के दौरान जो सूजन होता है । उसको यह जड़ से खत्म करता है ।

इसमें दिव्या हरड़, मुनक्का, महुआ, वैविदंग, गुड़, निसोथ, धनिया शामिल है। वही इंद्रायण मूल, तान्या, सौंठ, डेंटिमुल और मोटर्स जैसे सामग्री से तैयार की गई यह दवा को भोजन के बाद दिन में दो बार लेना चाहिए।

दिव्या हरीतकी चूर्ण – मलद्वार मे जलन की दवा पतंजलि –

इस दवा का काम पाचन में सुधार लाना है जिससे कब्ज और बवासीर को रोकने में मदद मिलता है । इस दवाई के सेवन से शरीर के हर तरह के टॉक्सिंस को निकालकर डिटॉक्सिफाई करने में भी मदद करते हैं।

यह हरीतकी जैसे फल को चूर्ण करके बनाया जाता है । यह चूर्ण उपचार के लिए बहुत हुई उपयोगी है । इस चूर्ण को 2 से 5 ग्राम दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।

मलद्वार में जलन व सूजन के घरेलू उपाय

इस बीमारी में आयुर्वेदिक एलोपैथिक दवाई के साथ-साथ कुछ घरेलू नुस्खे भी है जिसका इस्तेमाल करने से बहुत रोगी को फायदा भी मिलता है बशर्ते कि वे नियमित रूप से इसका सेवन करें।

  1. नारियल की जटा – इस जटा उतार कर उसे साफ पानी से धो कर सुखा लें । अब इसे जलाकर राख तैयार कर लें । जब इनकी भस्म तैयार हो जाए तो इसे इसी शीशी में रख दें । इस भस्म को एक कप दूध या छाछ के साथ मिलाकर पीने से बहुत ही राहत होता है।
  2. आक के पत्ते का प्रयोग – आक के पते की दूध की तीन बूंद को राय पर डालें और इसको बारीक कूटकर बतासे में रखकर सीधा निगल जाए। इसके अलावा सबसे आसान तरीका यह भी है कि आक के पते को मलद्वार पर रगड़ें जिससे इसमें राहत मिलता है।
  3. नींबू का प्रयोग – इस विधि में एक गिलास दूध में जो कि गर्म ना हो आधा नींबू का रस काट के डाल दें और उसे तुरंत भेजें यह बहुत ही फायदेमंद होता है यह विधि 7 दिनों तक करते रहे।
  4. केला व कपूर से उपाय – इनके लिए सबसे पहले चना, खाने वाले कपूर के साथ पके केले की बराबर की मात्रा में रख दें और उसे निकल जाए ऐसा 5 से 7 दिन करने से रोगी को राहत मिलता है। इसी प्रकार अखरोट भी लाभकारी है ।

मलद्वार में परेशानी का कारण पेट संबंधित बीमारी है । एक तो पाचन की क्रिया सुदृढ ना होने के कारण होता है और दूसरी कब्ज की शिकायत रहने के कारण होता है इसलिए खानपान और अपने जीवन शैली में बदलाव लाने से इस बीमारी से मुक्ति मिलती है। इसलिए इस बीमारी से बचने के लिए अपने खानपान मे बदलाव करें ।

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